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ब्रिटेन में चोरों के निशाने पर क्यों हैं एशियाई?
- Author, राहुल जोगलेकर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, लंदन
जब हम संजय टौंक के मिल्टन कीन्ज़ के उपनगरीय इलाक़े में स्थित घर पहुंचे तो वो वहां अकेले थे.
संजय के घर एक हफ़्ते पहले सेंधमारी हुई थी और वो अब तक सदमे में नज़र आते हैं.
वो घर के एक दरवाज़े की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, "वो यहां से आए थे." और फिर मुझे टूटे हुए दरवाज़े की तस्वीरें दिखाते हैं.
संजय के घर में दाखिल हुए चोर उनकी पत्नी के सोने के सारे जेवर साथ ले गए लेकिन किसी और चीज़ पर हाथ साफ नहीं किया.
उनकी बेटी के लिए ये एक ख़ौफनाक अनुभव था. वो बताते हैं कि स्कूल के बाद वो मुख्य दरवाज़े से घर में दाखिल हुई.
दो महीने में 24 भारतीय परिवार
संजय कहते हैं, "मैं काम के सिलसिले में लंदन गया हुआ था. घर की चाबियां मेरी बेटी के पास थीं. उसने अंदर आकर देखा कि सारे दरवाज़े खुले हुए हैं. वो अपना बैग स्टडी रूम में रखती है, वहां सबकुछ खुला हुआ था. सारी अल्मारियां और सारी दराजें खुली थीं."
सेंधमारी का शिकार होने वाले संजय अकेले नहीं हैं. स्थानीय कांउसलर और निवासियों का कहना है कि उनके इलाके में भारतीय मूल के लोगों के घरों में चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं.
स्थानीय काउंसलर ईडिथ बाल्ड कहती हैं, "ऐसा लगता है कि ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं. पुलिस को लगता है कि ऐसा नहीं है कि भारतीय समुदाय को ही निशाना बनाया जा रहा है."
वो आगे कहती हैं कि हालांकि बीते दो महीने में 24 भारतीय परिवारों को निशाना बनाया गया है.
वो कहती हैं, "ये राष्ट्रीय औसत और मिल्टन कीन्ज़ के औसत से अधिक है."
गीता मोर्ला स्थानीय काउंसलर हैं और इसी इलाके में रहती हैं. उनके घर भी चोरी हो चुकी है.
वो कहती हैं, "मंगलसूत्र, अंगूठी, चूड़ियां और झुमके पहनना हमारी संस्कृति का हिस्सा है. लड़की का जन्म होने के बाद से आठ संस्कार होते हैं और हर बार उसे सोने से बनी कोई चीज़ दी जाती है."
मिल्टन कीन्ज़ 1960 के दशक से ऐसे इलाके के तौर पर विकसित हुआ जहां लोग रहें और कामकाज के लिए लंदन आ जा सकें.
बीते कुछ सालों के दौरान यहां आईटी क्षेत्र में काम करने वाले और तमाम भारतीय आकर बसे हैं.
मिल्टन कीन्ज़ में पुलिस ने इस बारे में टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.
मिल्टन कीन्ज़ एक अपवाद नहीं है. तमाम दूसरे पुलिस बल इस समस्या से वाकिफ हैं और इसे लेकर नागरिकों को आगाह भी करते रहे हैं.
ब्रिटेन में जहां कहीं भी भारतीय समुदाय के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं वहां उन्हें निशाना बनाया जाता है. लीस्टर, बर्मिंगम, लंदन और मैनचेस्टर जैसे शहरों में भारतीय परिवारों को लगातार कहा जाता है कि वो सेंधमारी को लेकर सतर्क रहें और खुद को सुरक्षित रखें.
एसेक्स पुलिस के इंस्पेक्टर जिम वाइट कहते हैं, "एशियाई परंपराओं में आभूषणों की हमेशा से ख़ास अहमियत रही है. सोने में निवेश की आदत पुरानी है. कई धार्मिक महोत्सवों और पारिवारिक कार्यक्रमों में सोने के आभूषण इस्तेमाल होते हैं. सोने के कई आभूषण पीढ़ियों आगे तक सौंपे जाते हैं."
लंदन मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अनुमान के मुताबिक, बीते वित्तीय वर्ष के दौरान सिर्फ लंदन में एशियाई परिवारों से करीब 5 करोड़ पाउंड यानी करीब 4 अरब 34 करोड़ रुपये कीमत के आभूषण चोरी हुए हैं.
बीते साल लंदन में एशियाई परिवारों से सोना या आभूषण चोरी की 3463 घटनाएं हुईं.
सुरक्षा उपकरण ख़रीदने में बढ़ोतरी
ये समस्या ब्रिटेन के दूसरे हिस्सों में भी नज़र आने लगी है. पुलिस का ज़ोर जहां लोगों को सुरक्षा के उपाय अपनाने पर होता है. वहीं, कुछ लोगों ने इस समस्या के समाधान के लिए महंगे उपाय आज़माए हैं.
मिल्टन कीन्ज़ में रहने वाले रबी शंकर चौधरी ने हाइटेक उपकरण लगाने में काफ़ी रकम खर्च की है.
चौधरी बताते हैं कि उन्होंने अपने घर पर 24 घंटे मुस्तैद रहने वाला सुरक्षा तंत्र लगाया है.
वो बताते हैं, "सेंधमारी की स्थिति में अलार्म बजेगा और मुझे निगरानी केंद्र से एक फोन आएगा. मेरे परिसर में दाखिल होने वाले व्यक्ति की तस्वीर भी मुझे भेजी जाएगी और मुझे फोन पर सूचना दी जाएगी. अगर मुझसे संपर्क नहीं हो सका तो मेरे परिवार के दूसरे सदस्यों से संपर्क किया जाएगा."
उन्होंने इस तंत्र पर सैंकड़ों पाउंड खर्च किए हैं और वो बड़े गर्व के साथ अपने घर में लगे उपकरणों को दिखाते हैं.
उधर, गीता के घर के करीब रहने वाले एकजुट हो रहे हैं. उनमें से कई लोगों के घर एक बार से ज़्यादा चोरी हुई है. वो लोग काफी डरे हुए हैं. वो एकसाथ ख़ुद को सुरक्षित रखने की योजना तैयार कर रहे हैं.
गीता कहती हैं, "अगर कोई और हमारी मदद नहीं कर सकता तो हमें ख़ुद की मदद करनी होगी."
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