इस्लामाबाद में प्रदर्शनकारियों और पुलिस में हिंसक झड़पें

    • Author, फ़रान रफ़ी
    • पदनाम, बीबीसी उर्दू संवाददाता, इस्लामाबाद से

पाकिस्तान में अधिकारियों का कहना है कि इस्लामाबाद में इस्लामिक प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प में 141 से अधिक लोग घायल हुए हैं.

राजधानी इस्लामाबाद के पास फ़ैज़ाबाद इंटरचेंज पर इस्लामिक संगठन तहरीक-ए-लब्बैक (टीएलपी) या रसूल अल्लाह का अशरफ़ जलानी धड़ा और सुन्नी तहरीक पिछले 20 दिनों से धरना प्रदर्शन कर रहे थे.

ये वही जगह है जो राजधानी इस्लामाबाद को देश के दूसरे हिस्से से जोड़ती है.

इसी धरने को खत्म कराने के लिए शनिवार की सुबह प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ सुरक्षाबलों ने कार्रवाई की और इससे ज़बर्दस्त हंगामा हुआ.

क्या है मामला?

यह धरना प्रदर्शन चुनाव सुधार विधेयक 2017 में संशोधन के ख़िलाफ़ शुरू किया गया था जो पैगम्बर मोहम्मद की सर्वोच्चता के ख़िलाफ़ था. प्रदर्शनकारी इसे लेकर क़ानून मंत्री ज़ाहिद हमीद को हटाने की मांग कर रहे हैं. हालांकि, सरकार ने इसे 'क्लेरिकल ग़लती' बताते हुए इसे सुधार दिया था.

प्रदर्शकारी अपनी मांग पर डटे रहे जिसके बाद इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने उन्हें हटाने का आदेश दिया. सरकार ने प्रदर्शकारियों को हटने के लिए एक समय सीमा निर्धारित की, लेकिन वो नहीं हटे. इस समयसीमा को कई बार आगे भी बढ़ाया गया. आखिरकार समयसीमा बीत जाने के बाद सरकार ने शनिवार की सुबह 7 बजे प्रदर्शनकारियों को हटाने का ऑपरेशन शुरू किया.

न्यूज़ चैनलों पर रोक

इस बीच पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी (पेमरा) ने उन सभी न्यूज़ चैनलों के प्रसारण पर रोक लगा दिया है जो सरकार के आदेश का उल्लंघन करते हुए इस कार्रवाई का सीधा प्रसारण दिखा रहे थे.

सोशल मीडिया और मीडिया के ज़रिए प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का कराची, लाहौर, सियालकोट जैसी जगहों पर भी असर होता देख प्रशासन ने यह कदम उठाया.

फिलहाल केवल सरकारी पाकिस्तानी टीवी (पीटीवी) ही अपना प्रसारण दिखा रहा है. इस हिंसक झड़प की रिपोर्टिंग करते हुए कई पत्रकारों के भी घायल होने की ख़बरें हैं.

निजी समाचार चैनलों पर यह अस्थाई रोक पेमरा के आदेश से लगाई गई है.

370 प्रदर्शनकारी गिरफ़्तार

बीबीसी उर्दू की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान मेडिकल साइंस इंस्टीट्यूट में दाखिल घायलों की कुल संख्या 141 है. इनमें 57 पुलिसकर्मी जबकि 46 आम नागरिक हैं.

राजधानी इस्लामाबाद में और इसके आस-पास की सड़कें इस ऑपरेशन के कारण ब्लॉक कर दी गई हैं. ऑपरेशन में 8500 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं. अब तक 370 प्रदर्शकारियों को गिरफ़्तार किया गया है.

प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए उनपर आंसू गैस और रबड़ बुलेट चलाए गये. इसके जवाब में प्रदर्शकारियों ने सुरक्षाबलों पर पत्थरबाज़ी की.

क्या है ताज़ा हाल?

बीबीसी उर्दू रिपोर्टर शाहज़ाद मलिक ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की गाड़ियों और एक बस में भी आग लगा दी.

इस्लामाबाद के मुख्य सड़कों पर प्रदर्शनकारी कैंप लगाकर रह रहे थे. पुलिस ने इन्हें ध्वस्त कर दिया.

प्रदर्शनकारियों ने मुख्य रूप से इस्लामाबाद एक्सप्रेसवे के पास फ़ैज़ाबाद इंटरचेंज पर कैंप लगाया हुआ था. लेकिन इस्लामाबाद और रावलपिंडी के अन्य हिस्सों से भी हिंसा भड़की.

देश के अन्य हिस्सों लाहौर, कराची और पेशावर से भी इस ऑपरेशन के बाद हिंसा की ख़बरें बीबीसी को मिली हैं.

पिछले कुछ दिनों में प्रदर्शनकारियों पर कई केस दर्ज किए गए हैं. इसमें एक मामला हत्या का भी है, जब प्रदर्शनकारियों की वजह से एक मरीज़ तक एंबुलेंस नहीं पहुंच सका और उसकी मौत हो गई.

इस दौरान सड़कों के बंद किए जाने और ट्रैफ़िक जाम का असर दफ़्तरों, स्कूल और कॉलेज़ों में उपस्थिति पर भी पड़ा.

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