You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
ईरान में भूकंप आने के क्या कारण हैं ?
ईरान और इराक़ के सीमावर्ती इलाके में रविवार को आए भूकंप में बड़ी संख्या में लोग हताहत हुए हैं. ईरान में इस साल पहले भी तीन बार भूकंप के झटके आ चुके हैं.
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे का कहना है कि इस बार भूकंप का केंद्र इराक़ी कस्बे हलाब्जा से दक्षिण-पश्चिम में 32 किलोमीटर दूर स्थित था.
ईरान लंबे समय से भूकंप से प्रभावित देश रहा है. यहां लगभग हर साल भूकंप के झटके आते हैं.
इसी साल की बात करें तो ईरान में रविवार को आया भूकंप चौथा झटका था. इससे पहले मई, अप्रैल और जनवरी में भूकंप आ चुके हैं.
ये भूकंप भी 5 से 7 रिक्टर स्केल की तीव्रता वाले रहे हैं. इस बार आया भूकंप 7.3 तीव्रता का था.
क्या हैं कारण
ईरान में भूकंप के कारणों पर राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के निदेशक विनीत गहलोत कहते हैं, ''ईरान ज़ागरोस पर्वत श्रृंखला है. ये पर्वत अरेबियन प्लेट्स और यूरेशियन प्लेट्स के टकराने से बने हैं.
उन्होंने बताया, ''भूकंप चक्र के चलते इन पर्वतों का निर्माण हुआ है. अरेबियन और यूरेशियन प्लेट्स बार-बार टकराती हैं जिससे ज़ागरोस पर्वत में बार-बार भूकंप के झटके आते हैं.''
हालांकि, भूकंप आने के प्राकृतिक कारणों के अलावा मानव निर्मित कारण भी ज़िम्मेदार हैं.
मानवीय कारण
इस संबंध में विनीत गहलोत कहते हैं, ''इसके लिए फ्रैकिंग जिम्मेदार है जिसके जरिए पहाड़ों में लिक्विड इंजेक्ट करके तेल निकाला जाता है.''
वो बताते हैं, ''इससे पहाड़ में दरार पड़ जाती है और फिर जमीन के अंदर बना हुआ संतुलन बिगड़ जाता है. भूकंप की फ्रीक्वेंसी इस बात पर निर्भर करती है कि आपने कितना फ्लूइड इंजेक्ट किया है और कितनी फ्रैकिंग की है. इनमें सीधा संबंध है. हालांकि, इससे आने वाले भूकंप अधिकतर कम तीव्रता के होते हैं.''
गहलोत कहते हैं, ''ईरान की भी यही स्थिति है. हालांकि यहां साफ-साफ कहना मुश्किल होता है कि कौन सा भूकंप फ्रैकिंग के कारण आया है या कौन-सा प्राकृतिक कारणों से.''
भूकंपीय दृष्टि से सक्रिय
विनीत गहलोत कहते हैं कि ईरान को भूकंप के हिसाब से बहुत अधिक सक्रिय देश नहीं कहा जा सकता है.
उन्होंने बताया कि उन जगहों को अतिसक्रिय माना जाता है, जहां भूकंप में ज्यादा ऊर्जा निकलती हैं. ज्यादा तीव्रता के भूकंप आते हैं लेकिन ईरान में भूकंपों की संख्या ज्यादा होती है न कि तीव्रता.
बचाव के तरीके
विनीत गहलोत इमारतों के ढांचे में सुधार को सबसे बड़ा बचाव का तरीका मानते हैं. वह कहते है कि हम लोग अपनी इमारतों को बनाने में सावधानी नहीं बरतते. भूकंपरोधी इमारते नहीं बनाते.
कहा जाता है कि भूकंप नहीं मारता, इमारतों का गलत ढांचा मारता है. अगर हम इस पर ध्यान दें तो काफी हद तक तबाही को कम किया जा सकता है.
ईरान के भूकंप के भारत पर असर के बारे में गहलोत बताते हैं कि बड़े स्केल पर ये बात सही है कि लंबे समय में इसका असर हो सकता है. क्योंकि कहा जाता है कि टैक्टोनिक फोर्स नहीं टैक्टोनिक प्लेट्स होती हैं और एक प्लेट में हलचल होने से दूसरी प्लेट में हलचल हो सकती है.
गहलोत ने यह भी बताया कि छोटे स्केल पर यह कहना मुश्किल है कि इसका असर भारत पर होगा. हो सकता है कि इनके बीच संबंध न भी हो.
(बीबीसी संवाददाता कमलेश मठेनी की राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के निदेशक विनीत गहलोत से बातचीत पर आधारित)
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)