अक्तूबर क्रांति को नवंबर में क्यों मनाया जाता है?

रूसी क्रांति को अक्तूबर क्रांति भी कहते हैं और इतिहास की किताबों में पढ़ाया जाता है कि ये 25 अक्तूबर 1917 को घटित हुई थी.

लेकिन, सौ साल पहले रूस में साम्यवाद स्थापित करने वाली बोल्शेविक क्रांति की सालगिरह अक्तूबर में न मना कर, हर साल 7 नवंबर को मनाया जाता है.

इसका कारण बेहद सामान्य हैः जब रूसी क्रांति घटित हुई तो उस समय रूसी साम्राज्य में जूलियन कैलेंडर का इस्तेमाल होता था.

उसके हिसाब से ये तारीख़ थी- 25 अक्तूबर. लेकिन पश्चिमी दुनिया में, जहां ग्रेगोरियन कैलेंडर इस्तेमाल किया जाता था, उसमें इसे 7 नवंबर कहना जारी रखा गया.

जब व्लादिमीर लेनिन ने सत्ता संभाली तो उन्होंने अन्य चीजों के साथ ही जूलियन कैलेंडर को भी समाप्त कर दिया और इस तरह से रूस ने खुद अक्तूबर क्रांति की सालगिरह को नवंबर में मनाना शुरू कर दिया.

जूलियन कैलेंडर क्या है और रूस में क्यों सबसे अलग पंचांग का इस्तेमाल किया जाता था?

इस कैलेंडर का नाम रोम के नेता जूलियस सीज़र के नाम पर रखा गया था. सीज़र ने ही मिस्र को फ़तह करने के बाद, 45 ईसापूर्व में इसे शुरू किया था.

जूलियन कैलेंडर

इसमें पहले के कैलेंडरों की कुछ ग़लतियों को सुधारा गया था. जैसे कि रोमन कैलैंडर में 304 दिन हुआ करते थे और और जबतक 355 दिनों के साल का विचार नहीं आया, इसमें 10 महीने हुआ करते थे.

ये भी खगोलीय गणना की सटीकता के क़रीब नहीं था.

असल में पृथ्वी सूरज का एक पूरा चक्कर लगाने में 365 दिन, पांच घंटे, 48 मिनट और 45.16 सेकेंड का समय लगाती है.

इसलिए, मौसम के मुताबिक और हर मौसम में मनाए जाने वाले रोम के पर्वों के हिसाब से एक ज़्यादा सटीक पंचाग बनाया गया.

जूलियन कैलेंडर में 365 दिनों को 12 महीनों में बांटा गया था, जैसा आज हम इस्तेमाल करते हैं.

लेकिन इसमें भी आज के कैलेंडर के मुकाबले थोड़ी भिन्नता थी.

चूंकि लीप वर्ष में 366 दिन होते हैं, इसीलिए जूलियन कैलैंडर के अनुसार, इन्हें हर चार साल में इस अंतर को शामिल किया जाता है.

ग्रेगोरियन कैलेंडर की शुरुआत

इस तरह हर साल में 365.25 दिन होते हैं. ये गणना खगोलीय समय-काल के क़रीब है. हालांकि, कुछ शताब्दियों बाद जूलियन कैलेंडर भी धीरे धीरे पुराना पड़ता गया.

इसका कारण ये है कि हालांकि साल में दिनों की संख्या 365.25, खगोलीय गणना के क़रीब है, लेकिन इसमें कुछ मिनट कम थे.

दरअसल, सटीक गणना 365.24 दिन है. इसलिए जूलियन कैलेंडर में 11 मिनट हर साल जोड़ा जाता था.

इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता है लेकिन व्यवहार में इसका मतलब है कि हर 128 सालों में एक दिन का बढ़ जाना. साल 1528 तक आते आते इस कैलेंडर के हिसाब से दिनों की संख्या 10 दिन ज़्यादा हो गई थी.

इसकी वजह से इसमें सुधार के आदेश दिए गए और इस अंतर को भरने की कोशिश भी की गई. चूंकि नया कैलेंडर पोप ग्रेगोरी तेरहवें ने प्रस्तावित किया था, इसलिए इसे ग्रेगोरियन कैलेंडर के रूप में जाना जाता है.

जूलियन कैलेंडर ने हर साल 11 मिनट जोड़ने का नियम बनाया था, इस समस्या को हल करने के लिए नए पंचांग में गणना का तरीक़ा थोड़ा जटिल है.

इसको लीप वर्ष के नियम में सुधार कर हल किया गया.

इसे हर चार साल में सुधारा जाता था, लेकिन इसमें दो अपवादों को शामिल किया गयाः 100 के गुणन वाले वर्षों को लीप वर्ष मान लिया गया लेकिन जो 400 से विभाजित हो जाएं उन्हें वैसा ही रखा गया, जैसे 1600, 2000 या 2400.

इस तरह की जटिल गणना के तरीक़े से, खगोलीय गणना के हिसाब से ग़लती को प्रति वर्ष आधे मिनट तक कम कर दिया गया, यानी इससे 3300 सालों में एक दिन का हेरफेर होता है.

रूस में क्या हुआ?

ग्रेगोरियन कैलेंडर को 16वीं शताब्दी में मान्य बनाया गया. हालांकि 1917 में जब रूसी क्रांति हुई, उस समय भी इस देश में पंचांग गणना के पुराने तरीक़े ही इस्तेमाल होते रहे.

इसकी मुख्य वजह धार्मिक थी. ग्रेगोरिनय कैलेंडर को मान्यता देने का मतब था कैथोलिक चर्च के प्राधिकार को मानना.

इसलिए प्रोटेस्टेंट और एंग्लिकन देशों में जूलियन कैलेंडर को अलविदा कहने में कई सदियां लग गईं.

और इसीलिए, एक शताब्दी पहले जब रूस में अक्तूबर क्रांति हुई, तो इसे छोड़कर लगभग पूरी दुनिया में ये महीना नवंबर का था.

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