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उर्दू प्रेस रिव्यू- 'कुलभूषण जाधव का पाकिस्तान में बचना मुश्किल'
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते जासूसी के आरोप में पाकिस्तानी जेल में क़ैद भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव, पाकिस्तान-अफ़ग़ानिस्तान के रिश्ते और पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ से जुड़ी ख़बरें सुर्खियों में रही.
सबसे पहले बात कुलभूषण जाधव की.
रोज़नामा एक्सप्रेस में छपी ख़बर के मुताबिक़ पाकिस्तान का दावा है कि कुलभूषण जाधव के ख़िलाफ़ कुछ और नए सुबूत सामने आए हैं जिससे उनका बचना मुश्किल हो जाएगा.
कुलभूषण जाधव एक भारतीय नागरिक हैं जिन्हें पाकिस्तान में गिरफ़्तार कर लिया गया था. पाकिस्तान की अदालत ने उन्हें भारतीय जासूस मानते हुए पाकिस्तान में हुए कई चरमपंथी हमलों का दोषी क़रार दिया था और फांसी की सज़ा सुनाई थी.
एक्सप्रेस अख़बार के अनुसार पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल की अध्यक्षता में एक सेल गठित की गई है जिसमें विदेश, गृह और रक्षा मंत्रालय के अधिकारी शामिल हैं.
ये सेल कुलभूषण जाधव से जुड़े तमाम दस्तावेज़ों को आईसीजे के सामने 13 दिसंबर तक जमा करेगा. उसके बाद आईसीजे अगले साल यानी 2018 में इस पर दोबारा सुनवाई करेगी.
भारत ने कुलभूषण की फांसी की सज़ा के ख़िलाफ़ आईसीजे यानी अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत में अपील की थी. आईसीजे ने कुलभूषण की फांसी पर रोक लगा दी थी.
अब पाकिस्तान का कहना है कि उसने कुलभूषण के ख़िलाफ़ ऐसे कई सुबूत जमा किए हैं जिनके आधार पर चरमपंथी गतिविधियों में शामिल होने का जुर्म साबित होता है.
'खोखले इल्ज़ाम लगा रहा है अमरीका'
जंग अख़बार के मुताबिक़ पाकिस्तानी विदेश मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ का कहना है कि अमरीका खोखले इल्ज़ाम लगा रहा है कि पाकिस्तान चरमपंथियों को पनाह देता है.
अमरीकी दौरे पर गए पाकिस्तानी विदेश मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने अमरीकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार से मुलाक़ात के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि तालिबान से जल्द ही मसक़त में दोबारा बातचीत शुरू होगी.
उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान का मसला हल करने के लिए पाकिस्तान हर संभव प्रयास कर रहा है.
अख़बार के अनुसार अमरीकी मीडिया से बात करते हुए ख़्वाजा आसिफ़ ने कहा, ''हम ये नहीं कह रहे हैं कि हम देवता हैं. शायद पहले हमसे भी ग़लतियां हुईं हों लेकिन इस संकट के लिए सिर्फ़ पाकिस्तान को अकेले ज़िम्मेदार न ठहराया जाए.''
उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि उनमें भारतीय दख़लअंदाज़ी और बलूचिस्तान में अस्थिरता के कारण इस मामले में पाकिस्तान और अमरीका के बीच गहरे मतभेद हैं.
ख़्वाजा आसिफ़ ने कहा कि ज़्यादातर चरमपंथी ठिकाने अफ़ग़ानिस्तान में हैं और अगर अमरीका को लगता है कि पाकिस्तान चरमपंथियों को पनाह देता है तो अमरीका उन ठिकानों की जानकारी दे और पाकिस्तान ख़ुद उन ठिकानों पर बमबारी करेगा.
'सियासी शहीद बनना चाहते हैं शरीफ'
पाकिस्तान में विपक्षी नेता इमरान ख़ान ने सत्ताधारी पार्टी मुस्लिम लीग (नून) के प्रमुख नवाज़ शरीफ़ पर हमला करते हुए कहा कि नवाज़ शरीफ़ मुल्क में मार्शल लॉ लागू करवाकर सियासी शहीद बनना चाहते हैं.
अख़बार दुनिया के अनुसार इमरान ख़ान का कहना था, ''केंद्र में क़ाबिज़ मुस्लिम लीग की सरकार हर तरह से निकम्मी हो गई है और नवाज़ शरीफ़ मार्शल लॉ लागू करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन फ़िलहाल मार्शल लॉ की कोई बात नहीं कर रहा है. मसले का हल यही है कि नए चुनाव करवाए जाएं.''
एक अन्य महत्वपूर्ण ख़बर ये है कि पाकिस्तान के गृह मंत्री ने मस्जिदों और मदरसों से दिए जाने वाले फ़तवे की जमकर आलोचना की है.
अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार गृहमंत्री अहसन इक़बाल ने संसद में बोलते हुए कहा, ''हर मोहल्ले, मस्जिद से फ़तवा मुल्क को जंग का मैदान बना देगा.''
उन्होंने कहा कि इस्लामिक देश में जिहाद की घोषणा करने का अधिकार सिर्फ़ और सिर्फ़ सरकार को है और कोई भी अल्लाह और उसके रसूल (पैग़ंबर मोहम्मद) से प्यार करने का ठेकेदार नहीं जिससे ये सर्टिफ़िकेट लिया जाए.
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर किसी के भी क़त्ल का फ़तवा जारी करने वालों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी.
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