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सद्दाम के पतन की कहानी लिखने वाले 'तालिबानी'
इराक़ में सद्दाम हुसैन की हुकूमत के पतन की पटकथा लिखने वाले जलाल तालिबानी की मौत हो गई है.
83 वर्षीय जलाल तालिबानी का 3 अक्टूबर को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया.
इराक़ी सियासत में जलाल की जगह का अंदाजा एक कुर्द सांसद के इस बयान से लगाया जा सकता है, "वे इकलौते ऐसे राष्ट्रपति थे जिनके लिए अरब, कुर्द और दूसरी नस्लों के लोग भी मातम मनाएंगे. खुदा से हमारी दुआ है कि उनकी मौत के बाद हम फिर एक हो सकें."
सद्दाम हुसैन की सरकार को गिराने में जलाल तालिबानी ने न केवल अहम भूमिका निभाई बल्कि मुल्क का नए संविधान तैयार करने में भी उनका अहम रोल रहा.
कुर्दिस्तान की मांग
वे साल 2005 से 2014 तक इराक़ के राष्ट्रपति रहे.
25 सितंबर को कुर्दिस्तान के मुद्दे पर हुए जनमत संग्रह के पहले ही उन्हें इलाज के लिए जर्मनी ले जाया गया था. जहां उनकी मौत हुई.
कुर्दों के अपने देश कुर्दिस्तान की स्थापना के लिए दो दशकों तक उन्होंने काम किया.
इसी का नतीज़ा था कि कुर्दिस्तान के लिए हुए जनमत संग्रह में 92.7 कुर्दों ने इसके पक्ष में वोट दिया.
इस जनमत संग्रह को इराक़ी सरकार ने खारिज कर दिया है कुर्दों और बगदाद की हुकूमत के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई है.
पैट्रिओटिक यूनियन ऑफ़ कुर्दिस्तान के अध्यक्ष रहे जलाल तालिबानी इराक़ के पहले कुर्द राष्ट्रपति बने.
पहले कुर्द राष्ट्रपति
वे 1933 में पैदा हुए और 1950 के दशक में उन्होंने कुर्दिस्तान नेशनल डेमोक्रैटिक पार्टी के स्थापना के साथ सियासत में कदम रखा.
पूर्व इराक़ी प्रधानमंत्री अब्दुल करीम कासिम की सरकार के ख़िलाफ़ सितंबर, 1961 में हुए सशस्त्र विद्रोह की अगुवाई करने वालों में एक जलाल तालिबानी भी थे.
इस बगावत के बाद फरवरी, 1963 में सरकार के साथ बातचीत के लिए भेजे गए कुर्द प्रतिनिधिमंडल में भी वे शरीक हुए.
कुर्द नेता मुस्तफा बरज़ामी की फौज की इराक़ी सेना के हाथों हार के 11 सालों के बाद जलाल तालिबानी ने पैट्रिऑटिक यूनियन ऑफ़ कुर्दिस्तान पार्टी का गठन किया.
वे सद्दाम हुसैन की सरकार के पतन के बाद अप्रैल, 2005 में इराक़ के राष्ट्रपति बने और साल 2014 तक इस पद पर रहे. उनकी जगह मौजूदा राष्ट्रपति फौद मौसम ने ली.
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