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10 साल की बच्ची ने क्यों बनाया ख़ुद के रेप का वीडियो?
10 साल वह उम्र होती है जब एक बच्चा हाथों में कलम पकड़ना सीख रहा होता है. कॉपियों में रंग भरने की कोशिश करता है या किसी खेल में अपना हुनर तलाश रहा होता है. इस उम्र में किसी बच्ची को अपने रेप का वीडियो बनाना पड़ जाए, तो यह हैरान करने से ज्यादा शर्मसार करने वाली बात हो जाती है.
'इस घटना से हम सभी को शर्मसार हो जाना चाहिए', ये शब्द हैं मारिया नुनेज़ के.
वे एक रेप पीड़ित बच्ची के मुकदमे में अभियोजक हैं. उरुग्वे की रहने वाली 10 वर्षीय इस बच्ची का यौन शोषण उसी की दोस्त के पिता ने किया है.
इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि रेप पीड़िता बच्ची ने अपने साथ हुए रेप का वीडियो खुद बनवाया. यह सब उसने अपने साथ हो रही ज्यादती के सबूत जुटाने के मकसद से किया, ताकि उसके परिजनों को उसकी बातों पर यकीन हो सके.
एर्टिगस शहर में अभियोजन पक्ष के कार्यालय के प्रमुख ने अपने बयान में बताया, ''10 वर्षीय पीड़ित लड़की, अपनी दोस्त के घर खेलने जाती थी. उसी मौके का फायदा उठाते हुए अभियुक्त अपनी बेटी को बाहर भेज दिया करता था, फिर वह पीड़ित लड़की का यौन शोषण करता था.''
''यह सब लगभग एक साल तक चलता रहा. जब पीड़िता की दोस्त ने खुद उसे बताया कि वह जानती है कि उसके पिता उसके साथ क्या करते हैं.''
दोनों बच्चियों को लगा कि शायद उनकी बात का कोई विश्वास नहीं करेगा इसलिए उन्होंने इसका वीडियो बनाने पर विचार किया.
लैपटॉप से शूट किया वीडियो
पीड़ित बच्ची ने वीडियो बनाने के लिए स्कूल से मिले लैपटॉप का प्रयोग किया. यह लैपटॉप उरुग्वे सरकार की तरफ से बच्चों को दिए गए हैं.
अभियुक्त की उम्र 62 साल है और उसका इससे पहले कोई आपराधिक रिकॉर्ड भी नहीं है. यदि उन पर लगे आरोप सही साबित होते हैं तो उन्हें दो से छह साल तक की सजा हो सकती है.
बच्चे झूठ नहीं बोलते
मीडिया द्वारा इस मुद्दे को लगातार उठाने के बाद बच्ची के बयान को गंभीरतापूर्वक सुना गया.
पीड़ित बच्ची के वकील ने बताया, ''इस मामले को महज न्याय पाने के मकसद से नहीं देखा जाना चाहिए, यह मामला हमें बताता है कि इस तरह की घटनाएं समाज में लगातार बढ़ रही हैं. हमें बच्चों की बातों पर विश्वास करना होगा, क्योंकि बच्चे झूठ नहीं बोलते.''
पीड़ित बच्ची ने सबसे पहले अपनी चाची को वह वीडियो दिखाया और फिर अपने पिता को इस बारे में जानकारी दी. इसके बाद पिता ने इस वीडियो को सबूत के रूप में पेश किया.
बच्चों के यौन शोषण के मुद्दों पर काम करने वाले कई लोगों ने बताया कि पर्याप्त सबूतों की कमी की वजह से अधिकतर अभियुक्त छूट जाते हैं.
बच्चों के यौन शोषण के मामलों में समस्याएं
बच्चों के साथ होने वाले यौन शोषण जैसे मुद्दों पर काम करने वाली एड्रिया टुआना कहती हैं, ''यौन शोषण से पीड़ित बच्चे तीन तरह की मुश्किलों का सामना करते हैं, पहली तो उनकी बात पर कोई भरोसा नहीं करता, दूसरे वे अपने परिचित पर इस तरह के आरोप लगाने से डरते हैं, तीसरी और सबसे बड़ी समस्या होती है सबूतों का अभाव.''
उरुग्वे के बाल एवं किशोर संस्थान (आईएनएयू) ने आंकड़े जारी कर बताया था कि साल 2016 में घरेलू हिंसा के कुल 2,647 मामले दर्ज किए गए, जिसमें से 20 प्रतिशत मामले बच्चों के साथ यौन शोषण के थे.
टुआना कहती हैं, ''इस तरह के मामले बताते हैं कि हम बच्चों की बातों पर कितना कम विश्वास करते हैं, हम दरअसल इस बात को मानने से इनकार करते रहते हैं कि यौन शोषण जैसी चीजें हो सकती हैं, असल में यह हमारी सोच और संस्कृति की समस्या है.''
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