जर्मनीः चौथी बार चांसलर बनेंगी मर्केल, लेकिन राष्ट्रवादियों की ऐतिहासिक छलांग

जर्मनी में एंगेला मर्केल चौथी बार चासंलर बनने जा रही हैं. वहां रविवार को आम चुनाव हुए थे. हालांकि उनकी पार्टी की स्थिति पहले के मुक़ाबले कमज़ोर हुई है और राष्ट्रवादियों के प्रदर्शन में ऐतिहासिक उछाल आया है.

मर्केल के सीडीयू/सीएसयू गठबंधन को 70 साल के सबसे बुरे नतीजों का सामना करना पड़ रहा है, हालांकि संसद में अब भी यह सबसे बड़ा मोर्चा है. उन्हें 33 फीसदी वोट मिलते नज़र आ रहे हैं.

सामाजिक लोकतंत्र की हिमायती पार्टी एसपीडी को 20.5 फीसदी मत मिलने का अनुमान है और उसने कहा है कि ऐतिहासिक हार के बाद वह विपक्ष में बैठेगी.

कई लोगों के लिए चौंकाने वाले चुनाव नतीजो में प्रवासी विरोधी राष्ट्रवादी एएफडी पार्टी ने संसद में अपना खाता खोला है और 12.6 प्रतिशत मतों के साथ वह तीसरे नंबर की पार्टी हो सकती है. इसके ख़िलाफ देश के में कुछ विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं.

इस दक्षिणपंथी और इस्लाम विरोधी पार्टी के बर्लिन स्थित दफ़्तर के बाहर कुछ प्रदर्शनकारी जुटे. उन्होंने 'शरणार्थियों का स्वागत है' के पोस्टर ले रखे थे. फ्रैंकफर्ट और कोलोन में भी प्रदर्शन हुए हैं.

मर्केल के लिए नतीजों का मतलब

मर्केल का गठबंधन सबसे आगे है लेकिन विश्व युद्ध के बाद पहली बार 1949 में हुए चुनाव के बाद से उन्हें सबसे कम वोट मिले हैं.

जर्मन संसद में पहली बार छह पार्टियों का प्रतिनिधित्व होगा.

अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए मर्केल ने कहा कि उन्हें बेहतर नतीजों की उम्मीद थी और आने वाला समय चुनौतीपूर्ण है.

उन्होंने कहा कि वो एएफ़डी को वोट देने वाले लोगों की चिंताओं और उलझनों को समझेंगी ताकि वो फिर से उनका विश्वास हासिल कर सकें.

एक्ज़िट पोल के नतीजों के बाद मार्टिन शुल्ज़ के नेतृत्व वाली सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी दूसरे विश्व युद्ध के बाद से सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है.

शुल्ज़ ने कहा कि ये नतीजे मर्केल की पार्टी के साथ गठबंधन का अंत भी हैं.

अपने समर्थकों से बात करते हुए शुल्ज़ ने कहा, "हम अपना लक्ष्य हासिल नहीं कर सके. ये जर्मनी में सोशल डेमेक्रेट लोगों के लिए एक कड़वा और मुश्किल दिन है."

वहीं दक्षिणपंथी एएफ़डी के उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन ने पार्टी की संसद में सीटें सुनिश्चित कर दी हैं. ये पहली बार होगा जब एएफ़डी बुंडेस्टाग में दाख़िल होगी.

पार्टी के नेता फ्राक पेटरी ने चुनावी नतीजों को जर्मनी में एक राजनीति भूकंप बताया है.

मर्केल को अब नए गठबंधन सहयोगी तलाशने होंगे और इस प्रक्रिया में कई महीने भी लग सकते हैं.

एएफ़डी के मजबूत होने का मतलब?

पार्टी ने सीरिया जैसे देशों से आने वाले शरणार्थियों और अप्रवासियों पर मर्केल की नीति के ख़िलाफ प्रदर्शन किए हैं. पार्टी का कार्यक्रम शरणार्थी विरोधी और ख़ास तौर से इस्लाम विरोधी माना जाता है. वे मीनारों पर प्रतिबंध की मांग करते रहे हैं और इस्लाम को जर्मन संस्कृति से बेमेल मानते हैं.

साथ ही, इसके कई उम्मीदवारों को धुर दक्षिणपंथी टिप्पणियों से जोड़ा जाता है. पार्टी की नेता बीट्रिक्स वान स्टोर्श ने बीबीसी से कहा कि चुनाव नतीजों से जर्मनी की राजनीतिक व्यवस्था बदल जाएगी और उन लोगों को 'आवाज़' मिलेगी, जिन्हें पिछली संसद में नहीं मिली थी.

उन्होंने कहा, "हम आप्रवासन पर बहस शुरू करेंगे. हम इस्लाम पर बहस शुरू करेंगे. हम एक बंद संघीय व्यवस्था पर बहस शुरू करेंगे."

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