क्या है उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ ट्रंप का 'सनकी सिद्धांत'

    • Author, गिरार्डो लिसार्डी
    • पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड, न्यूयॉर्क

कुछ लोगों को लगता है कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ कूटनीति के 'सनकी सिद्धांत' यानी 'मैडमैन थ्योरी' का इस्तेमाल कर रहे हैं. अगर ऐसा है तो उत्तर कोरिया की नज़रों में ख़ुद को 'मानसिक विक्षिप्त' की तरह दर्शाना एक क़िस्म की उपलब्धि कही जा सकती है.

इस 'मैडमैन थ्योरी' या 'क्रेज़ी थ्योरी' का मतलब है कि किसी देश को उसके अपने हितों पर काम करने से रोकने के लिए उसके सामने एक अप्रत्याशित दुश्मन की तरह खड़े रहना जो युद्ध या ऐसी किसी भी स्थिति के लिए तैयार है.

डोनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से पहले ही ऐसी अटकलें थीं कि वह विदेश नीति के मोर्चे पर इस तरह पेश आ सकते हैं. अपने चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने अमरीका के प्रत्याशित होने पर सवाल उठाए थे.

प्रत्याशित होने को बुरा मानते हैं ट्रंप

'द वॉशिंगटन पोस्ट' ने जब उनसे चीन के विस्तारवाद के बारे में पूछा था तो उन्होंने कहा था, "हमें अप्रत्याशित होना होगा. हमारे क़दमों का अंदाज़ा लगाना बहुत आसान है और यह बुरी बात है."

पिछले महीने ट्रंप ने कहा था कि उत्तर कोरिया को 'आग और प्रकोप' झेलना पड़ेगा. तब से इन अटकलों को बल मिला है कि ट्रंप सोची समझी रणनीति के तहत ख़ुद को अप्रत्याशित नेता के तौर पर दर्शा रहे हैं जो कभी भी कुछ भी कर सकता है.

इसके बाद न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में उन्होंने उत्तर कोरिया को 'पूरी तरह तबाह' करने की धमकी दी. शनिवार को तनाव फिर बढ़ गया जब अमरीकी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, अमरीकी बमवर्षक और लड़ाकू विमानों ने उत्तर कोरिया के पूर्वी किनारे के पास से उड़ानें भरीं.

तो क्या ट्रंप वाक़ई चाहते हैं कि उत्तर कोरिया उन्हें एक सनकी प्रशासक के तौर पर देखे? और क्या परमाणु ताक़त से लैस एक देश के साथ इस तरह पेश आने के जोख़िम नहीं होंगे?

निक्सन की विरासत

रिचर्ड निक्सन वह पहले अमरीकी राष्ट्रपति कहे जाते हैं, जिन्होंने इस 'क्रेज़ी थ्योरी' का इस्तेमाल किया था. निक्सन 1969 से 1974 तक अमरीका के राष्ट्रपति रहे थे और कहा जाता है कि तब उन्होंने इस थ्योरी का इस्तेमाल सोवियत संघ और उत्तर कोरिया को काबू में रखने के लिए किया था.

निक्सन के चीफ़ ऑफ़ स्टाफ एचआर हाल्डेमन ने लिखा है कि निक्सन चाहते थे कि उत्तर वियतनाम के लोग यह सोचें कि 'वियतनाम युद्ध को रोकने के लिए निक्सन कुछ भी कर सकते हैं और यह भी याद रखें कि उनके पास न्यूक्लियर बटन है.'

ट्रंप के बारे में कहा जा रहा है कि वह भी अपने पास 'एन-बटन' होने पर ज़ोर दे रहे हैं. जबकि उनके 'आग और प्रकोप' वाले बयान को उन्हीं की सरकार के लोग अचानक कर दी गई टिप्पणी बता रहे हैं.

'बशर्ते आप सच में क्रेज़ी न हों'

विदेश मंत्री रेक्स टिलर्सन भी अपने सहयोगियों को भरोसा दिला रहे हैं कि फिलहाल उत्तर कोरिया से कोई ऐसा ख़तरा नहीं है, जिस पर तुरंत बड़ी कार्रवाई की ज़रूरत हो. लेकिन ट्रंप ने ट्विटर पर लिखा था कि राष्ट्रपति बनने के बाद उनका पहला आदेश अमरीका के परमाणु ज़ख़ीरे को 'नया और आधुनिक' बनाने का था.

9 अगस्त को उन्होंने कहा था, "उम्मीद करते हैं कि हमें कभी इस ताक़त का इस्तेमाल न करना पड़े, लेकिन कभी वो वक़्त आएगा जब हम दुनिया के सबसे ताक़तवर देश नहीं रहेंगे."

तब से कई अमरीकी विश्लेषक इस ओर इशारा कर रहे हैं कि ट्रंप वैसा ही कुछ कर रह हैं जो निक्सन ने किया था.

न्यूयॉर्क टाइम्स में स्तंभकार डेविड ब्रूक्स कहते हैं, "ऐसा हो सकता है कि क्रेज़ी थ्योरी ही यहां पर सही थ्योरी हो. मुझे लगता है कि यह काफी कारगर है, बशर्ते आप सच में 'क्रेज़ी' न हों."

कहीं ट्रंप गंभीर तो नहीं!

हालांकि यह एक ऐसी रणनीति है, जिसको कभी ऐलान नहीं किया जा सकता. इसलिए इसे लेकर शक और शुबहे हमेशा बने रहेंगे.

हो सकता है कि अपनी और सहयोगियों की रक्षा के लिए उत्तर कोरिया के साथ विनाशकारी युद्ध के लिए ट्रंप वाकई तैयार हों और इस संबंध में सच में दुनिया को चेतावनी दे रहे हों.

निक्सन और अमरीका की विदेश नीति पर किताबें लिख चुके इतिहासकार जोन हॉफ़ मानते हैं कि अभी यह बात ही पुख़्ता नहीं है कि निक्सन ने सच में यह 'मैडमैन थ्योरी' अपनाई भी थी या नहीं.

उन्होंने बीबीसी से कहा, "हमेशा निक्सन के बारे में यह बात कही जाती है. लेकिन इस तरह के सरलीकरण के लिहाज़ से विदेश नीति का उनका ज्ञान काफी अच्छा था."

हालांकि वह कहते हैं कि ट्रंप के संबंध में यह अंदाज़ा सही हो सकता है क्योंकि 'वह विदेश नीति के बारे में कुछ नहीं जानते हैं.'

अप्रत्याशित दिखने के जोखिम

हालांकि इस संबंध में चेतावनियां भी दी गई है कि अप्रत्याशित दिखना जोख़िम भरा हो सकता है.

अमरीका के रिटायर्ड जनरल डेविड पैटरस ने यूनिवर्सिटी ऑफ न्यूयॉर्क में कुछ दिन पहले हुई एक चर्चा में कहा था, "क्रेज़ी थ्योरी की कुछ विशेषताएं हो सकती हैं लेकिन वे तभी तक हैं जब तक आप ख़ुद मुसीबत में न पड़ जाएं. "

उन्होंने चेताया था, "आप नहीं चाहेंगे कि सामने वाला यह माने कि आप इतने अतार्किक हैं कि पहले हमला कर देंगे या ऐसा कुछ कर देंगे जिसके बारे में सोचा न जा सकता हो."

कई लोग यह भी मानते हैं कि उत्तर कोरिया के शीर्ष नेता किम जोंग-उन ख़ुद क्षेत्र में अपना असर बनाए रखने और अमरीका को धमकाने के लिए 'क्रेज़ी थ्योरी' का इस्तेमाल करते हैं.

'सड़कछाप तर्क'

ट्रंप ख़ुद ट्विटर पर किम जोंग उन को 'मैडमैन' कह चुके हैं जिसे अपने ही लोगों को क़त्ल करवाने या भूखे मारने की परवाह नहीं है.

हालांकि राष्ट्रीय सुरक्षा के विशेषज्ञ हावर्ड स्टोफर मानते हैं, "किम जोंग-उन मैडमैन नहीं हैं. वह बहुत सोच-समझकर काम करते हैं. वहां से ऐसी सूचनाएं आती हैं जो बमबारी के समान हैं या अपनी प्रकृति में सैन्य हैं, लेकिन उन्होंने गुआम, अमरीका या दक्षिण कोरिया में मिसाइलें नहीं दागी हैं."

उनके मुताबिक, जब आप ऐसे अहम पद पर हों तो तीखी बातें करना और अप्रत्याशित दिखना, वैश्विक हितों के ख़िलाफ़ है.

वह कहते हैं, "यह एक सड़कछाप तर्क है. यह बचपन में खेले जाने वाले चोर-पुलिस के खेलों में काम करता है. अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में यह कारगर नहीं है. दुनिया तभी बेहतर होती है जब चीज़ें स्थिर और प्रत्याशित हों."

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