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उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग-उन विदेशी दौरों पर जाने से क्यों डरते हैं?
- Author, रजनीश कुमार
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग-उन ने शुक्रवार को दुनिया के सबसे ताक़तवर देश अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को 'पागल' कहा था.
लगभग ढाई करोड़ आबादी वाला उत्तर कोरिया आजकल विश्व कूटनीति के केंद्र में है. संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी उत्तर कोरिया अहम मुद्दा बना हुआ है. उत्तर कोरिया से ज़्यादा वहां के शासक किम जोंग-उन की चर्चा हो रही है.
किम जोंग-उन के बारे में कहा जा रहा है कि वो अपने पिता किम जोंग-इल और दादा किम इल-सुंग से भी ज़्यादा रहस्यपूर्ण हैं. 2011 में अपने पिता किम जोंग-इल की मौत के बाद किम जोंग-उन ने उत्तर कोरिया की सत्ता संभाली थी.
किम जोंग-उन का कोई विदेशी दौरा नहीं
साल 2011 में सत्ता संभालने के बाद से आज तक आधिकारिक तौर पर किम जोंग-उन ने कोई विदेशी दौरा नहीं किया है.
हालांकि किम का विदेशी दौरे पर नहीं जाना चौंकाता नहीं है, क्योंकि उनके पिता और दादा के भी विदेशी दौरों पर जाने की खबरें नहीं आती थीं. हैरान करने वाली बात यह है कि सत्ता संभालने के बाद किम जोंग-उन ने अपने मित्र देशों चीन और रूस का भी दौरा नहीं किया है.
उनके पिता किम जोंग-इल कम से कम चीन के दौरे पर ज़रूर जाते थे. किम जोंग-इल 2010 और 2011 में चीन को दौरे पर गए थे और कई विदेशी अखबारों ने इसे सुर्खी बनाया था. तब इन दौरों को लेकर कहा जा रहा है कि वह अपने बेटे को सत्ता हस्तांतरित करने की रणनीति तैयार कर रहे हैं.
चीन और रूस भी नहीं गए किम
चीन के साथ इतने क़रीबी रिश्तों के बावजूद किम जोंग-उन ने एक भी दौरा क्यों नहीं किया? उत्तर कोरिया में 2000 से 2002 तक भारत के राजदूत रहे है आरपी सिंह कहते हैं कि उत्तर कोरिया का आज का शासक अपने पिता से भी अलग है. उन्होंने कहा कि जिस देश की राजनीति का जो रुख होता है उसी हिसाब से दौरे भी होते हैं.
आरपी सिंह बताते हैं, ''किम जोंग-उन ने उत्तर कोरिया को पूरी दुनिया से अलग-थलग कर लिया है. विदेशी दौरे पर नहीं जाने के पीछे कई वजहें हो सकती हैं. एक तो उन्हें डर लगता है कि पता नहीं क्या हो जाए. उन्हें किसी देश पर भरोसा नहीं है. उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर डर लगता है. किम जोंग-उन डरे हुए हैं. शायद इसलिए भी वो विदेशी दौरा नहीं करते हैं.''
आरपी सिंह ने कहा कि उत्तर कोरिया के दुनिया के 26 देशों से राजनयिक संबंध हैं, जिसमें भारत भी शामिल है. हालांकि भारत में भी उत्तर कोरिया का कोई शासक आज तक नहीं आया.
किम के पिता और दादा गए थे चीन और रूस
आरपी सिंह ने कहा, ''किम के दादा के हाथ में जब तक उत्तर कोरिया कमान रही तब तक वो विदेशी दौरे पर गए. अब चीन और रूस भी किम जोंग-उन के साथ उस तरह से नहीं हैं. इस बात का अहसास किम को भी होगा. किम किसी से भी बात नहीं करते हैं. ऐसे में दौरे की बात तो और दूर रह जाती है.''
मई 2015 में किम जोंग-उन दूसरे विश्व युद्ध के ख़त्म होने की 70वीं सालगिरह का जश्न मनाने रूस जाने वाले थे. रूस ने इस बात की जानकारी दी थी. कुछ ही दिन में पता चला कि किम जोंग-उन ने अपना रूस दौरा रद्द कर दिया है. 2015 में किम 9 मई को रूस जाने वाले थे और रूस को उम्मीद थी कि पुतिन के साथ किम की द्विपक्षीय बैठक होगी.
अगर किम रूस के दौरे पर गए होते तो यह उनका पहला विदेशी दौरा होता. तब रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा था कि किम ने प्योंगयांग से बाहर नहीं जाने का फ़ैसला किया है और यह उनका आंतरिक मामला है.
क्यों डरता है किम परिवार?
उत्तर कोरिया का कोई शासक न विदेशी दौरा करता है और न ही किसी विदेशी नेता के लिए वहां की सत्ता से संपर्क करना आसान है. अमरीका ने उत्तर कोरिया से कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली.
किम जोंग-उन को लेकर 13 नवंबर 2015 को ब्रिटिश अख़बार द गार्डियन में रिपोर्ट छपी थी कि जब वो देश के भीतर भी दौरे पर होते हैं तो काफिले में एक मोबाइल टॉयलेट होता है.
क्या किम अपनी जान को लेकर इस कदर डरे रहते हैं? इस सवाल को उत्तर कोरिया में 1997 से 1999 तक भारत के राजदूत रहे जगजीत सिंह सपरा के सामने रखा.
उन्होंने जवाब में कहा, ''डर तो है. किम ही नहीं बल्कि उनके पूर्वज भी सुरक्षा को लेकर काफी सतर्क रहते थे. किम जोंग-उन के पिता किम जोंग-इल जब भी मॉस्को और बीजिंग गए तो प्लेन नहीं बल्कि ट्रेन से गए.''
ट्रेन से विदेशी दौरा करता था किम परिवार
सपरा ने कहा, ''किसी भी देश का शासक प्लेन के बदले ट्रेन से विदेशी दौरा करे इसी से हम समझ सकते हैं कि वो अपनी सुरक्षा को लेकर कितना सतर्क था. उत्तर कोरिया का हवाई संपर्क केवल चीन से है. वो भी हफ़्ते में दो दिन ही बीजिंग से प्योंगयांग फ्लाइट आती है. अगर आपको उत्तर कोरिया जाना है तो पहले बीजिंग जाना होगा.''
सपरा ने कहा कि किम जोंग-उन के दादा किम इल-सुंग ने एक बार केवल प्लेन से इंडोनेशिया का दौरा किया था.
उन्होंने कहा, ''पूरा देश तो अलर्ट पर रहता है. इनका किसी देश से पीस अग्रीमेंट नहीं है. ऐसे में ये अपनी सुरक्षा को लेकर ही डरे रहते हैं. अभी उस देश में जितना शोर है, उसका सीधा संबंध असुरक्षा से है.''
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