महिला सांसद को अश्लील SMS भेजने के आरोप पर बोले इमरान ख़ान

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पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी (पीटीआई) के चेयरमैन इमरान ख़ान पर उन्हीं की पार्टी से असेंबली की सदस्य आएशा गुलालई की तरफ़ से लगाए गए आरोपों की जांच के लिए एक विशेष संसदीय समिति के गठन के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है.
इमरान ख़ान ने कहा है कि वह इस जांच समिति का स्वागत करते हैं. उन्होंने कहा कि वह इस मामले की पूरी जांच चाहते हैं. इमरान ख़ान ने कहा, ''मैं ख़ुश हूं कि नए प्रधानमंत्री ने आते ही एक संसदीय समिति बना दी है. इसके अलावा पाकिस्तान में कोई और समस्या नहीं थी... लेकिन फिर भी मैं इसका स्वागत करता हूं. मुझे पता है कि मैंने कुछ भी ग़लत नहीं किया है.''
संवाददाता शहज़ाद मलिक के अनुसार, शुक्रवार को नेशनल असेंबली के सत्र में इस समिति के गठन को मंज़ूरी दी गई जो अपनी जांच पूरी करके एक महीने के अंदर सदन में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी.
समिति की कार्रवाई की होगी रिकॉर्डिंग
प्रस्ताव के मुताबिक़, संसदीय समिति की कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी. नेशनल असेंबली के स्पीकर विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के संसदीय सदस्यों से बातचीत के बाद एक विशेष समिति का गठन करेंगे.
इससे पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी ने नेशनल असेंबली की सदस्य आएशा गुलालई की ओर से तहरीक-ए-इंसाफ़ पार्टी के प्रमुख इमरान ख़ान पर लगाए गए आरोपों की समीक्षा के लिए समिति बनाने का प्रस्ताव दिया था.
नेशनल असेंबली के सत्र के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने आएशा गुलालई को सुरक्षा प्रदान करने के लिए इस्लामाबाद के आईजी इस्लामाबाद को निर्देश दिए हैं.

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उन्होंने कहा कि संसदीय समिति की कार्रवाई कैमरे के आगे होगी, जहां पर आरोप लगाने वाले और जिन पर आरोप लगाया गया है, वह अपना पक्ष पेश कर सकेंगे. उनका कहना था कि जिसने आरोप लगाए और जिन पर आरोप लगे, वह उन दोनों का सम्मान करते हैं.
क्या हैं आएशा के आरोप?
ग़ौरतलब है कि पीटीआई नेता आएशा गुलालई ने एक अगस्त को एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए पार्टी के प्रमुख इमरान ख़ान पर मोबाइल फ़ोन के माध्यम से आपत्तिजनक संदेश भेजकर उत्पीड़न करने का आरोप लगाया था.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि इमरान ख़ान और उनके आसपास मौजूद लोगों के हाथों में सम्मानित औरतों की इज़्ज़त और आबरू सुरक्षित नहीं हैं.
हालांकि पीटीआई की ओर से इन आरोपों का खंडन किया जा रहा है और यह कहा जा रहा है कि इसके पीछे सत्तारूढ़ पीएमएल (एन) का हाथ है.
वहीं, प्रधानमंत्री शाहिद ख़ाक़ान अब्बासी का कहना है कि राजनेताओं को ही संसद के सम्मान को बढ़ाना है. उन्होंने कहा कि चूंकि यह इस सदन का मामला है इसलिए बेहतर है कि इस मामले को यहीं पर ही हल कर लिया जाए.

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'नहीं पेश होंगे इमरान ख़ान'
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ का कहना है कि इमरान ख़ान किसी भी संसदीय समिति के सामने पेश नहीं होंगे.
असेंबली सत्र के दौरान सत्ताधारी दल से संबंध रखने वाली महिला सदस्यों ने सदन में आएशा गुलालई द्वारा इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ बोलने पर उनकी हिम्मत की दाद दी.
विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की असेंबली सदस्य शगुफ़्ता ज़मानी ने भी आएशा गुलालई के मुद्दे पर संसदीय समिति बनाने की मांग की जबकि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़ की सदस्य शीरीं मज़ारी अपने पार्टी प्रमुख के पक्ष में बिना माइक के ही बोलती रहीं.
'मंत्री ने मुझे दीं गालियां'
शीरीं ने कहा कि केंद्रीय मंत्री ख़्वाजा आसिफ़ ने उन्हें सदन में गालियां दीं, लेकिन उनके ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की गई. शीरीं मज़ारी का कहना है कि अगर जांच करनी है तो पहले ख़्वाजा आसिफ़ से शुरू करें.
नेशनल असेंबली के सत्र में आवामी मुस्लिम लीग के प्रमुख शेख़ रशीद अहमद पर कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर हमला करने की कोशिश के ख़िलाफ पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ़, एमक्यूएम और जमात-ए-इस्लामी ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार किया.
आएशा का कहना, उनके पास हैं सबूत
गौरतलब है कि आएशा गुलालई ने विभिन्न टीवी कार्यक्रमों में अपने इंटरव्यू में कह चुकी हैं कि उनके पास इन आरोपों के पूरे सबूत हैं. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में स्वतः संज्ञान लेने का अनुरोध भी किया है.

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इमरान ख़ान ने पिछले दिनों अपने एक ट्वीट में लिखा था कि 'जब उन्हें नज़र आ रहा है कि मुझे अयोग्य साबित करने की उनकी कोशिशें नाकाम हो रही हैं, तो पीएमएल (एन) वह करा रही है जिसके लिए वह जानी जाती है.'
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