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किन हथियारों के बल पर चीन ललकार रहा है
- Author, प्रतीक जाखड़
- पदनाम, बीबीसी मॉनीटरिंग
चीनी फ़ौज ने 30 जुलाई को हुए मिलिट्री परेड में कई नए हथियारों की नुमाइश की है. यह मौका था एक अगस्त को पूरे होने वाले पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की 90वें वर्षगांठ का.
1200 से ज़्यादा सेना के जवानों ने इसमें हिस्सा लिया. इस मौके पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग फ़ौजी यूनिफॉर्म में मौजूद थे.
परेड के दौरान उन्होंने फ़ौज को आधुनिक बनाने की बात कही और कहा, "युद्ध लड़ने और जीतने के लिए एक ताकतवर फ़ौज तैयार की है."
शी जिनपिंग के सत्ता में रहते हुए चीनी फ़ौज के अंदर बड़ा बदलाव आया है. यह 'अधिक सक्षम और विश्व स्तरीय आधुनिक फ़ौज' बनी है.
चीनी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक़ परेड के दौरान क़रीब 600 मिलिट्री हार्डवेयर्स प्रदर्शित किए गए जिनमें से क़रीब आधे पहली बार सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किए जा रहे थे.
यह पहली बार था जब सेना के जवानों ने यूनिफ़ॉर्म की जगह जंग के दौरान पहने जाने वाले कपड़ों में परेड किया.
यहां हम आपको कुछ उन हथियारों के बारे में बता रहे हैं जो पहली बार इस परेड के दौरान प्रदर्शित किए गए.
नए रॉकेट
पीएलए रॉकेट फ़ोर्स की स्थापना दिसंबर 2015 में हुई थी. यह पहला मौका है जब मिलिट्री परेड में उन्होंने अपना प्रदर्शन किया है.
रॉकेट फ़ोर्स ने पांच मॉडल प्रदर्शित किए जिनमें नए और पुराने दोनों ही तरह के मॉडल थे.
इनमें परंपरागत रॉकेट से लेकर न्यूक्लियर मिसाइल तक शामिल थे.
इन रॉकेट में नई जेनरेशन की डॉगफ़ेंग (DF)-31AG इंटरकॉटिनेन्टल बैलिस्टिक मिसाइल शामिल है जो कि 10,000 किलोमीटर तक मार कर सकता है. इसके अलावा मध्यम दूरी की मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल DF-21D भी है. इसे 'कैरियर किलर' भी कहते हैं.
इस सूची में DF-26 और DF-16G बैलिस्टिक मिसाइल भी हैं. DF-16G को बीजिंग में हुए मिलिट्री परेड में पहली बार प्रदर्शित किया गया था.
हांगकांग में रहने वाले सैन्य विश्लेषक लोंग क्वाक लोंग ने ताइवान की समाचार एजेंसी सीएनए को बताया, "चीन में मिसाइलों को नाम दिए जाने के मौजूदा सिस्टम के मुताबिक 'A' परमाणु हथियारों के लिए हैं तो 'B' सामान्य हथियारों के लिए और 'G' संशोधित संस्करण के लिए इस्तेमाल किया जाता है."
चीन की सरकारी टीवी ने परेड के दौरान कम से कम 16 DF-31AG मिसाइल दिखाए. इसे DF-31A का विकसित रूप माना जाता है.
इसके अलावा नए एयर डिफेंस मिसाइल भी परेड में दिखाए गए.
इसमें HQ-9B और HQ-22 जैसे मिसाइल शामिल थे. HQ-9B ज़मीन से हवा में मार करने में सक्षम है तो वही HQ-22 विंग विमानों और क्रूज मिसाइलों को रोकने में काम आता है.
सिंगापुर के अख़बार द स्ट्रेट टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक़ HQ-9B मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम HQ-9 का विकसित रूप है जिसे विवादित दक्षिण चीन सागर में तैनात किया गया था.
आधुनिक फ़ाइटर जेट
J-16 फ़ाइटर जेट को पहली बार लोगों के सामने 30 जुलाई की परेड में प्रदर्शित किया गया है.
इसे चेंगयांग एयरक्राफ्ट कॉरपोरेशन के द्वारा विकसित किया गया है. यह J-11B तकनीक पर विकसित किया गया है जो रूस के सुखोई-30MKK का ही संशोधित रूप है.
सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक़ J-16 दो सीटों, दो इंजनों वाला फ़ाइटर विमान है जिसका कई मकसदों में प्रयोग किया जाता है फिर चाहे वो हवा से हवा में मार करने की बात हो या फिर हवा से पानी के जहाज़ पर. यह ख़ास तौर पर नौसैनिकों के लिए तैयार किया गया है.
चीन के मिलिट्री विश्लेषक यिन झू ने चाइना न्यूज़ सर्विस को कहा है, "J-16 में वार करने की ज़बरदस्त क्षमता है और इसमें लगा रडार दुनिया का सबसे बेहतरीन रडार है."
रडार से बच कर निकलने में चीन का सबसे माहिर फ़ाइटर जेट J-20 की भी इस परेड में झलक मिली.
इसे चेंगडु एयरोस्पेस कॉरपोरेशन ने तैयार किया है. J-20 चीन में ही तैयार किए गए फ़ाइटर विमान का चौथा जेनरेशन है जो लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम है.
इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरण
पीएलए ने अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध उपकरणों की नुमाइश की है. उसने पहली बार अपनी सूचना तंत्र की क्षमता' को सार्वजनिक तौर पर दिखाया है.
परेड में इलेक्ट्रॉनिक सूचना तकनीक दिखाने वाली टीम के प्रमुख वू फ़ेई ने कहा कि लड़ाई के मैदान में दुश्मनों के रडार को नकाम करने वाले 16 इलेक्ट्रॉनिक उपकरण परेड के दौरान प्रदर्शित किए गए हैं.
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक इसके अलावा दो इलेक्ट्रॉनिक टोही वाहन भी प्रदर्शित किए गए - वाई -8 इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग विमान और मिलिट्री ड्रोन्स का समूह.
ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक ये दोनों ही दुश्मनों के सिस्टम को पहले ही "रोकने और उसे अक्षम बनाने की क्षमता" रखते हैं.
फ़ौजी ताकत
टिप्पणीकारों का मानना है कि चीनी फ़ौज के आधुनिकीकरण के साथ ही चीन इस मामले में अमरीका के करीब पहुंचता जा रहा है.
शिन्हुआ ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के उदय को याद करते हुए लिखा है, "इन चमचमाते हुए हथियारों को देखकर लगता है कि पीएलए ने 1927 में नानचांग में अपने उदय से लेकर अब तक में काफ़ी दूरी तय कर ली है."
लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि चीनी फ़ौज वास्तविक लड़ाई की परिस्थितियों के लिए तैयार नहीं है. इनमें से "ज़्यादातर हथियारों की वास्तविक लड़ाई में आज़माया जाना बाकी है."
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