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पुतिन से मुलाक़ात पर क्यों हो रही है ट्रंप की आलोचना?
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने के बाद कहा है कि अब समय आ गया है कि 'रूस के साथ रचनात्मक रूप से काम' किया जाए.
शुक्रवार को जी-20 देशों के शिखर सम्मेलन में पहली बार दोनों नेताओं के बीच मुलाक़ात हुई थी.
ट्रंप ने ट्वीट कर कहा कि अमरीकी आम चुनावों में हस्तक्षेप की ख़बरों का पुतिन ने 'पुरज़ोर तरीक़े से खंडन' किया.
हालांकि ट्रंप और उनके वरिष्ठ अधिकारियों के बयानों में 'विरोधाभास' नज़र आया.
रूस के साथ मिलकर ऑनलाइन सिक्योरिटी पर साझेदारी के प्रस्ताव की जानकारी देने के बाद ट्रंप अपनी ही पार्टी में आलोचना का सामना कर रहे हैं.
संयुक्त राष्ट्र में अमरीकी राजदूत निकी हेली ने कहा कि 'अमरीका रूस पर भरोसा नहीं कर सकता है और वो कभी भी रूस पर भरोसा नहीं करेगा.'
उन्होंने सीएनएन से कहा कि 'रूस से बात करने का मतलब कतई ये नहीं है कि अमरीका अपने लक्ष्य से भटक रहा है.'
उधर विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा कि 'रूस के साथ बेहतर रिश्ते में अभी भी 2016 के चुनाव में हस्तक्षेप का मुद्दा रुकावट बना हुआ है.'
अमरीका में एक विशेष जांचकर्ता इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या ट्रंप के सहयोगियों ने पिछले नवंबर में हुए अमरीकी चुनाव को प्रभावित करने के लिए रूस की कोशिशों में सांठ गांठ की थी या नहीं.
जर्मनी के हैम्बर्ग में बैठक के दौरान दोनों ही पक्षों ने इस बात की पुष्टि की है कि दोनों राष्ट्रपतियों ने अमरीकी चुनाव को कथित तौर पर प्रभावित करने के विवाद पर बात की.
लेकिन दूसरी तरफ़ दोनों मुलाक़ात के बारे में दोनों पक्षों के बयान अलग अलग आए.
रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि 'ट्रंप ने पुतिन के खंडन को स्वीकार किया.'
जबकि टिलरसन ने कहा कि इस मुद्दे पर दोनों नेताओं के बीच 'बहुत सकारात्मक' बातचीत हुई और ट्रंप ने कई मौकों पर रूसी नेता पर दबाव बनाया लेकिन कुछ 'असहमतियां' बनी रह सकती हैं.
रविवार को एक के बाद एक किए गए ट्वीट में ट्रंप ने कहा कि 'उन्होंने हस्तक्षेप के मुद्दे पर दो बार रूसी राष्ट्रपति से पूछा और पुतिन ने पुरजोर तरीक़े से इसका खंडन किया.'
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