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क़तर पर अमरीका ने खींचे हाथ, स्थिति ख़राब होने की आशंका
अमरीकी सरकार ने क़तर राजनीतिक संकट को पारिवारिक झगड़ा कहना शुरू कर दिया है.
व्हाइट हाउस प्रवक्ता शॉन स्पाइसर ने कहा, "हमारे हिसाब से ये राजनयिक संकट एक पारिवारिक झगड़ा है और ये चारों देश इसका हिस्सा हैं. उन्हें खुद ही इसका निपटारा करना चाहिए. अगर हम इन देशों के बीच बातचीत करा सकें तो ठीक है. ये देश अपने आप से इसका समाधान निकालना चाहते हैं और उन्हें निकालना भी चाहिए."
सऊदी अरब समेत चार अन्य अरब देशों ने क़तर के सामने 13 मांगों की एक सूची रखी है.
समाचार एजेंसी एपी के मुताबिक, इनमें अल-जज़ीरा को बंद करने और ईरान के साथ संबंध तोड़ने जैसी शर्तें शामिल हैं.
क्या हैं ये मांगे?
न्यूज़ एजेंसी एपी के जरिए पहली बार दुनिया के सामने आने वाली इन मांगों ने दोनों पक्षों के बीच तकरार को बढ़ा दिया है.
- क़तर मुस्लिम ब्रदरहुड के साथ सभी तरह के संबंध तोड़ें जो कि अरब देशों में प्रतिबंधित है
- अल-जज़ीरा, अरबी21 और मिडिल ईस्ट आई न्यूज़ चैनलों को आर्थिक मदद देना बंद करे
- मुआवजे के रूप में एक मात्रा में धनराशि दे
- सऊदी अरब और अन्य देशों में विपक्षी पार्टियों को दी गई आर्थिक मदद से जुड़ी विस्तृत जानकारी दे
- अमरीकी प्रशासन के बताए चरमपंथी संगठनों को आर्थिक मदद देना बंद करे
- इन चार देशों द्वारा चरमपंथ के मामले में लंबित उन सभी व्यक्तियों को सौंपे
- चार देशों के उन नागरिकों को बेअसर करने से इनकार करे और क़तर में मौजूद ऐसे लोगों को बाहर निकाले
- गल्फ़ को-ऑपरेशन काउंसिल के साथ राजनीतिक, आर्थिक और सभी अन्य तरीकों के साथ क़तर खुद को जोड़े
- बीते दिनों में कुवैत और ओमान जैसे कुछ अरब देशों को छोड़कर ज्यादातर अरब देशों ने क़तर के साथ अपने राजनीतिक संबंध ख़त्म कर लिए हैं और अपने हवाई क्षेत्रों को कुवैत के लिए बंद कर दिया है.
बीते दिनों में कुवैत और ओमान जैसे कुछ अरब देशों को छोड़कर ज्यादातर अरब देशों ने क़तर के साथ अपने राजनीतिक संबंध ख़त्म कर लिए हैं और अपने हवाई क्षेत्रों को कुवैत के लिए बंद कर दिया है.
अमरीका की बढ़ती दूरी
क़तर के सामने इन मांगों को रखने वाले चारों देशों के साथ अमरीका के गहरे संबंध हैं. लेकिन अमरीकी विदेश मंत्रालय और विदेश मंत्री रेक्स टिलरस ने शुक्रवार को सामने आने वाली इन मांगों पर अब तक प्रतिक्रिया नहीं दी है.
अमरीकी विदेश मंत्री की ओर से शुक्रवार को इस मुद्दे पर बयान दिए जाने की अपेक्षा थी.
क्योंकि, उन्होंने ही सऊदी और उनके समर्थक देशों से क़तर के लिए मांगों की सूची जारी करने की अपेक्षा की थी.
इसके बाद इन देशों ने क़तर के सामने 13 मांगों की सूची रखी है.
इन देशों का कहना है कि क़तर चरमपंथ के साथ-साथ क्षेत्रीय अस्थिरता को बढ़ावा देता है.
हालांकि, क़तर के विदेश मंत्रालय ने इन मांगों के मिलने की पुष्टि की है और जल्द ही उचित जवाब देने की बात कही है.
अमरीकी राष्ट्रपति ने क़तर के खिलाफ बयान देते हुए इसे चरमपंथ का बड़ा मददगार बताया था.
लेकिन मध्य-पूर्व में अमरीका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा क़तर में है जिसका मतलब है कि अमरीका इस पूरे मामले में बीच में फंसा हुआ है.
अमरीका का फैलाया हुआ झमेला - पॉल दानाहर, बीबीसी वॉशिंगटन ब्यूरो चीफ़
अरब देशों और क़तर के बीच संबंध साल 2011 से ख़राब हैं. अरब क्रांति के दौरान क़तर ने खुद को किंग मेकर बनाने की कोशिश की.
इस कोशिश में क़तर ने मुस्लिम ब्रदरहुड और इससे जुड़े संगठनों में भारी निवेश किया.
सऊदी अरब ये देखकर बेहद नाराज हुआ क्योंकि एक तरफ तो वह खुद को अरब दुनिया का कर्ताधर्ता मानता है. वहीं, दूसरी तरफ़ वह मुस्लिम ब्रदरहुड को अपने अस्तित्व के लिए ख़तरा मानता है.
इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप सऊदी अरब पहुंचते हैं. इस यात्रा में ट्रंप ये छवि बनाते हैं कि उनका झुकाव सऊदी अरब की तरफ है.
इससे सऊदी अरब को क़तर के ख़िलाफ़ क़दम उठाने का मौका मिलता है जबकि दोनों देशों के बीच सब कुछ ठीक चल रहा था.
अब ऐसे में अगर अमरीकी सरकार इस मामले से पल्ला झाड़ने की कोशिश करती है तो कोई भी इस मामले का समाधान नहीं निकाल सकता है और यहां से स्थिति के बिगड़ने की संभावना है.
इन चार देशों में से एक देश ने नाम ना बताने की शर्त पर न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि क़तर को कथित चरमपंथी संगठन इस्लामिक स्टेट, अल-कायदा, और लेबनान के शिया उग्रवादी संगठन हिज़बुल्ला से भी संबंध तोड़ने को कहा गया है.
आधिकारिक तौर पर ये मांगें अब तक सामने नहीं आई हैं.
क़तरने अगर ये मांगे नहीं मानीं तो?
न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के सूत्रों के मुताबिक, अगर 10 दिनों में क़तर इन मांगों को नहीं मानता है तो ये रद्द हो जाएंगी.
ऐसे में ये लगेगा कि कुछ मांगें तो क़तर को कुछ मांगे स्वीकार नहीं होंगी.
विदेश मंत्री शेख मोहम्मद पिछले हफ़्ते ही कह चुके हैं कि क़तर किसी तरह के विदेशी आदेश स्वीकार नहीं करेगा और अल-जज़ीरा चैनल पर कुछ बर्दाश्त नहीं करेगा क्योंकि वह उसे ये अपना आंतरिक मामला मानता है.
इन प्रतिबंधों ने क़तर को खाद्य और अन्य सामानों की सप्लाई के लिए दूसरे रास्तों की तलाश की है. अब ईरान और तुर्की क़तर में खाना और पानी पहुंचा रहे हैं. इसके साथ ही ईरान ने क़तर के लिए अपना हवाई क्षेत्र भी खोल दिया है.
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