जब पिता ने सुनी अपनी मृत बेटी की धड़कन

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बेटी तो नहीं रही, पर उसका दिल ज़िंदा है.
वह दिल अब एक दूसरे आदमी के सीने में धड़क रहा है और जब बेटी के पिता ने उसकी धड़कनें सुनीं तो वह आंसुओं को रोक नहीं सके. इस दिल छूने वाली घटना की तस्वीरें सामने आई हैं.
अपनी मृत बेटी के दिल की धड़कनें सुनने के लिए बिल कॉनर दो हज़ार किलोमीटर साइकिल चलाकर अमरीका के विस्कॉन्सिन राज्य से लुइज़ियाना राज्य के बैटन रूज पहुंचे थे.
उन्होंने जब लॉमंथ जैक के सीने में स्टेथेस्कोप लगाया तो वह भावुक होकर रोने लगे.

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'मेरी बेटी उसके भीतर ज़िंदा है'
लॉमंथ जैक को दिल का दौरा पड़ा था और डॉक्टरों ने कह दिया था कि उनके पास कुछ ही दिन बचे हैं. लेकिन कॉनर की बेटी ऐबी ने अपनी मौत से पहले अंगदान का ऐलान किया था और इस तरह उन्हें ट्रांसप्लांट के ज़रिये दिल मिल गया.
बिल कॉनर ने सीबीएस न्यूज़ से कहा, 'यह जानना कि वह मेरी बेटी ऐबी की वजह से ज़िंदा है- मेरी बेटी भी उसके भीतर ज़िंदा है. वह उसके दिल की बदौलत आज सीधा खड़ा हुआ है.'
उन्होंने कहा, 'मैं उसके और उसके परिवार के लिए खुश हूं. मुझे अपनी बेटी से मिलने का मौक़ा मिल गया.'
जनवरी में हुई थी ऐबी की मौत

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इसी जनवरी में 20 साल की ऐबी और उसका भाई कैनकुन के एक रिज़़ॉर्ट में एक स्वीमिंग पूल में बेहोशी की हालत में मिले थे. वे वहां छुट्टियां मनाने गए थे.
इसके बाद उन्हें फ्लोरिडा के एक अस्पताल ले जाया गया. ऐबी के भाई की जान बच गई. लेकिन ऐबी के अंगों का ट्रांसप्लांट के लिए इस्तेमाल करने तक डॉक्टरों ने उसके शरीर को लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा.
कॉनर कहते हैं कि ऐबी ने 16 साल की उम्र में ही अंगदान करने का फ़ैसला कर लिया था.
उन्होंने कहा, 'उसने रजिस्टर कर दिया था. उसे बहुत पहले ही यह पता लग गया था. दुर्भाग्य से यह सच हो गया. लेकिन ऐबी ऐसी ही थी. अगर वह आपकी दोस्त थी तो हमेशा आपके साथ रहती थी. वो ज़रूरतमंद लोगों की मदद करने वाली थी- यही उसका सही परिचय है.'
अंगदान के प्रचार पर निकले थे पिता

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बेटी की मौत के बाद बिल कॉनर ने तय किया कि वह चार हज़ार किलोमीटर साइकिल चलाकर अंगदान का प्रचार करेंगे और फ्लोरिडा के उस अस्पताल भी जाएंगे जहां उनकी बेटी का शरीर रखा हुआ था.
वह अपनी यात्रा के 2,250 किलोमीटर चल चुके थे, तभी उन्हें पता चला कि वह लॉमंथ जैक से मुलाक़ात कर सकते हैं, जिन्हें ऐबी का दिल लगाया गया है.
जिस अस्पताल में ऐबी का शरीर रखा गया था, वहां से उन चारों लोगों को चिट्ठियां भेजी गईं, जिन्हें ऐबी के शरीर के चार अलग-अलग अंग दान किए गए थे. इन चारों में लॉमंथ जैक भी शामिल थे.
'यह कितना सुंदर है'

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21 साल के लॉमंथ जैक ने बैटन रूग में समाचार वेबसाइट डब्ल्यूएएफ़बी से कहा, 'उसने मेरी जान बचाई और मैं इसके बदले कुछ नहीं कर सका. काश मैं ये कर पाता, लेकिन मैं नहीं कर सका. मैं बस उसके परिवार को अपना प्यार दे सकता था.'
चश्मदीदों ने बताया कि फ़ादर्स डे पर हुई दोनों की यह मुलाक़ात दिल तोड़ने की हद तक मार्मिक थी.
लुइज़ियाना की एक अंगदान एजेंसी की प्रवक्ता मैरी क्लेमेनॉक ने बीबीसी से कहा, 'इस पर यक़ीन नहीं होता. ऐबी के अंगदान से किसी को नई ज़िंदग़ी मिल गई. आज बिल अपनी बेटी की धड़कनें सुन पा रहे थे. वह इसे रिकॉर्ड करके सारी ज़िंदग़ी अपने पास रख सकते हैं. यह कितना सुंदर है.'
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