हवा में एक फ़ाइटर जेट से दूसरे को गिराना इतना दुर्लभ क्यों?

अमरीकी लड़ाकू विमान

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, अमरीकी लड़ाकू विमान एफ-15 जो कभी हवा में मार गिराया नहीं गया.

अमरीकी लड़ाकू विमान का हवा में सीरियाई लड़ाकू विमान को गिराना 1999 के बाद पहली बार हुई ऐसी घटना है.

सीरियाई विमान को ऐसे अमरीकी विमान ने गिराया जिसे पायलट उड़ा रहा था.

हॉलीवुड की फ़िल्मों में भले ही हवा में लड़ाकू विमानों की झड़पें दिखती हों, लेकिन वर्तमान युद्ध कला से ये लगभग समाप्त ही हो गई हैं.

20वीं शताब्दी में हवा में विमान मार गिराने में महारथ रखने वाले पायलटों को ऐस (इक्का) कहा जाता था.

अमरीका में कम से कम पांच विमान मार गिराने वाले पायलट को ही ऐस माना जाता है. लेकिन अभी वहां कोई भी पायलट ऐसा नहीं है जो ये खिताब रखता है.

सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड बजेटरी एसेसमेंट्स (सीएसबीए) की एक रिपोर्ट के मुताबिक 1990 से 2015 के बीच कुल 59 विमान हवा में मार गिराए गए. इनमें से अधिकतर पहले खाड़ी युद्ध के दौरान गिराए गए थे.

मार गिराया गया रूसी विमान

इमेज स्रोत, EPA/HABERTURK TV CHANNEL

इमेज कैप्शन, नवंबर 2015 में तुर्की ने एक रूसी विमान को मार गिराया था. इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था.

नवंबर 2015 में जब तुर्की ने एक रूसी विमान को सीरियाई सीमा के नज़दीक गिराया तब ये इतनी बड़ी घटना थी कि दोनों देशों के बीच राजनयिक विवाद पैदा हो गया.

ब्रिेटेन के रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज़ इंस्टीट्यूट में हवा में लड़ाकू विमानों के मुकाबलों पर शोध कर रहे जस्टिन ब्रोंक कहते हैं, "हवा में आमने-सामने की लड़ाई के युग का लगभग अंत हो गया है."

जब सद्दाम ने लड़ने ही नहीं भेजे विमान

ब्रोंक कहते हैं, "पहले खाड़ी युद्ध में अमरीका और गठबंधन सेनाओं के विमानों ने पूरी तरह एकतरफा जीत हासिल की थी. उसके बाद से अमरीका या सहयोगी देशों का हमला झेलने वाले देशों के लिए अपने हवाई क्षेत्र की रक्षा के लिए विमान भेजना दुर्लभ बात हो गई है क्योंकि वो जानते हैं कि इसका नतीजा क्या होगा."

1991 के शुरुआती महीनों में हुए उस युद्ध में इराक़ ने 33 विमान गंवाएं थे और बदले में सिर्फ़ एक अमरीकी एफ-18 को गिराया था.

इसका सबक ये हुआ कि बहुत से देशों ने अमरीका और उसके सहयोगी देशों से हवा में लड़ना ही बंद कर दिया.

अमरीकी विमान

इमेज स्रोत, US Air Force

इमेज कैप्शन, हवाई लड़ाई में अमरीकी विमान बेहद प्रभावशाली हैं.

"पहले खाड़ी युद्ध के अंतिम दौर में बहुत से इराक़ी पायलट निश्चित बर्बादी से बचने के लिए अपने विमानों को ईरान ले गए थे. ये इराक-ईरान युद्ध के बाद कोई आसान फ़ैसला नहीं था."

दूसरे खाड़ी युद्ध में सद्दाम हुसैन ने अपनी बची-खुची वायुसेना को हवा में लड़ने भेजने के बजाए अंडरग्राउंड दबवा दिया था ताकि उसे बर्बादी से बचाया जा सके.

और जब नेटो ने 2011 में लीबियाई विद्रोह के दौरान हवाई हस्तक्षेप किया तो मोहम्मद गद्दाफ़ी की एयरफ़ोर्स ने अपने हवाई क्षेत्र की रक्षा के लिए कुछ नहीं किया.

अमरीका इतना प्रभावशाली क्यों हैं?

अमरीकी लड़ाकू विमान

इमेज स्रोत, Getty Images

पहले विश्व युद्ध के दौरान हवा में दुश्मन के विमान को गिराने के लिए विमान पर नज़र रखी जाती थी और उसका पीछा किया जाता था और फिर मशीन गन से नीची उड़ान भर रहे प्रोपेलर चालित विमानों पर निशाना लगाया जाता था.

तकनीकी विकास के बावजूद लगभग पचास सालों तक हवा में लड़ाइयां ऐसे ही लड़ी जाती रहीं.

लेकिन मौजूदा दौर में मानवीय आंख की जगह उन्नत तकनीक ने ले ली. सीएसबीए के डाटा के मुताबिक 1965 से 1969 तक हवा में विमान मार गिराने में मशीन गनों का प्रतिशत 65 रहा.

लेकिन 1990 से 2002 के बीच इनका योगदान सिर्फ़ 5 प्रतिशत ही था. विमान गिराने के बाक़ी मामलों में किसी न किसी प्रकार की मिसाइल का इस्तेमाल किया गया.

ब्रोंक कहते हैं, "मौजूदा दौर में हवा में लड़ाई का नतीजा स्थितियों की जानकारी रेडार और अन्य सेंसरों के माध्यमों और मिसाइल तकनीक पर निर्भर करता है. हाल के दिनों में हवा में विमान मार गिराने के सभी मामले लगभग इकतरफ़ा थे."

हाल के दिनों में जिन दुश्मन विमानों को गिराया गया, वो इतनी दूर थे कि उन्हें मानवीय आंख से देखना संभव नहीं था. इसका मतलब ये है कि तकनीक पायलटों के कौशल पर हावी है.