क़तर पर क्यों लग रहे चरमपंथ को बढ़ावा देने के आरोप?

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- Author, टॉम कीटिंग
- पदनाम, सेंटर फॉर फ़ाइनेंशियल क्राइम एंड सिक्यूरिटी स्टडीज़
क़तर पर चरमपंथी संगठनों को फ़ंड मुहैया कराने के आरोप ने इतना तूल पकड़ लिया कि सऊदी अरब और खाड़ी के अन्य देशों ने अपने सारे संबंध तोड़ लिए.
ये पहली बार नहीं है कि क़तर के पड़ोसी देशों ने उसकी विदेश नीति को लेकर नाखुशी ज़ाहिर की है. 2014 में उसके साथ नौ महीने तक राजनीयिक संबंध टूटे रहे थे.

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तनाव की शुरुआत इस्लामी मुस्लिम ब्रदरहुड को क़तर की ओर से दिए जाने वाले समर्थन से हुई.
इसके अलावा तालिबान और अल क़ायदा से जुड़े हुए कुछ संगठनों से उसके क़रीबी रिश्ते और ईरान के साथ उसके संबंध भी इसका कारण रहे.
अभी हाल ही में सऊदी अरब ने ईरान पर आरोप लगाया था कि सरकारी धन से चलने वाला अल जज़ीरा यमन में हूती विद्रोहियों का समर्थन कर रहा है जो सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात समर्थित सरकारी फ़ौजों से लड़ रहे हैं.
क़तर ने दी थी फिरौती

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हालांकि दोहा ने रियाद के इन आरोपों को पूरी तरह ख़ारिज किया है.
वैसे मौजूदा तनाव गैस प्रधान धनी देश क़तर की फ़ंडिंग पर रोशनी डालता है.
कथित तौर पर अप्रैल में क़तर ने सीरिया में अलक़ायदा के एक पूर्व सहयोगी और ईरानी सुरक्षा अधिकारियों को एक अरब डॉलर (लगभग 6400 करोड़ रुपये) की फ़िरौती दी थी.
इसके बदले शाही परिवार के 26 सदस्यों को छोड़ा गया था जिनका कथित तौर पर ईरान समर्थित इराक़ी शिया चरमपंथियों ने अपहरण कर लिया था.
इसके अलावा इस समझौते में उन दर्जनों शिया लड़ाकों को भी छोड़ा गया जिन्हें सीरिया में जिहादियों ने पकड़ लिया था.
हमास को करता रहा खुलेआम समर्थन

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इसलिए क़तर का कथित रूप से चरमपंथी विचारधारा को आर्थिक मदद देना जारी रखना, मौजूदा संकट की मूल वजह दिखता है.
9/11 हमले के बाद से अमरीकी नीत वैश्विक गठबंधन की ओर से चरमपंथियों की आर्थिक मदद को ख़त्म करने की लगातार कोशिश हो रही है.
कई नए क़ानून बनाकर चरमपंथियों की फ़ंडिंग को रोकने के लिए फ़र्जी कंपनियों, संस्थाओं की आर्थिक गतिविधियों पर पाबंदी लगाई गई, इससे जुड़ी संपत्तियों और व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाए गए.
लेकिन इसके बावजूद, क़तर जैसे कुछ मुख्य देशों की प्रतिबद्धता पर सवाल खड़ा किए जाते रहे हैं.
साल 2014 में तत्कालीन टेररिज़्म एंड फ़ाइनेंशियल इंटेलीजेंस के ट्रेज़री अंडर सेक्रेडरी डेविड कोहेन ने कहा था, "अमरीका के लंबे समय से सहयोगी रहे क़तर ने सालों तक खुले तौर पर हमास की मदद की. मीडिया में आई ख़बरों से संकेत मिलता है कि क़तर की सरकार सीरिया में चरमपंथी समूहों को भी मदद कर रही है."
'क़तर में है चरमपंथ के लिए फ़ंड जुटाने का माहौल'

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उन्होंने इस बात का भी ज़िक्र किया कि क़तर अपने यहां, अल क़ायदा और कथित इस्लामिक स्टेट जैसे चरमपंथी ग्रुपों के लिए धन इकट्ठा करने की इजाज़त देता है.
साल 2016 में कोहेन की जगह लेने वाले एडम शूबीन ने कहा कि चरमपंथ को आर्थिक मदद देने वालों पर कार्रवाई की इच्छा जताने के बावजूद क़तर ने इसे नज़रअंदाज़ किया और इस पर काबू पाने के लिए ज़रूरी राजनीतिक इच्छाशक्ति नहीं दिखाई और ना ही कोई कड़े क़ानून बनाए.
अमरीका ने चरमपंथ को प्रायोजित करने वाले क़तर के कई नागरिकों पर प्रतिबंध भी लगाए.
हालांकि क़तर की आर्थिक गतिविधियों के विरोध की अगुवाई करने और हाल ही में अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के रियाद दौरे के बावजूद सऊदी अरब भी इसी किस्म की आलोचनाओं से बरी नहीं है.
सऊदी अरब भी बरी नहीं

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9/11 के विमान अपहरणकर्ताओं में 19 में से 15 सऊदी नागरिक थे.
2009 में विकीलीक्स द्वारा प्रकाशित राजयनिक संदेशों से पता चलता है कि चरमपंथ को आर्थिक मदद देने के मामले से कड़ाई से निपटने के लिए सऊदी अरब को मनाने में अमरीका को लगातार निराशा हाथ लगी है.
सऊदी अरब ने पेट्रोलियम संपदा से मिले धन को पूरी दुनिया में स्कूलों और मस्जिदों के मार्फ़त कट्टर वहाबी धारा के प्रचार में ख़ूब इस्तेलमाल किया.
कुछ लोग आरोप लगाते हैं कि वहाबी धारा चरमपंथ का स्रोत है.
हालांकि इसके चंद व्यक्तियों और संस्थाओं पर चरमपंथ की मदद करने के आरोप लगे हैं, लेकिन क़तर के मुकाबले सऊदी अरब चरमपंथ के ख़िलाफ़ कार्रवाईयों में ज़्यादा मददगार रहा है.
ट्रंप की यात्रा के दौरान चरमपंथ को आर्थिक मदद देने के संबंध में आने वाले नए ख़तरों से निपटने के लिए अमरीका और सऊदी सरकार ने एक संयुक्त इलाकाई टेररिस्ट फ़ाइनेंसिंग सेंटर स्थापित करने की घोषणा की.
चरमपंथी विचारधारा

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हालांकि सऊदी अरब का ये क़दम चरमपंथ को आर्थिक मदद से निपटने के लिए काफ़ी नहीं है.
हाल ही में उन लोगों और संस्थाओं को भी चरमपंथ विरोधी नीति में शामिल किया गया है जो चरमपंथी विचारधारा को प्रचारित-प्रसारित करते हैं.
हालांकि जैसा पहले भी हुआ है, ये संकट भी जल्द गुज़र जाएगा, लेकिन चरमपंथ को आर्थिक मदद का मुद्दा बना रहेगा और इसके केंद्र में दोहा रह सकता है.
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