You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
उर्दू प्रेस रिव्यू: 'चीन पाकिस्तान में सैन्य अड्डा बना सकता है'
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पिछले हफ़्ते पाकिस्तान के उर्दू अख़बारों में क़तर संकट, ईरान, ब्रिटेन और अफ़ग़ानिस्तान में चरमपंथी हमला, पाकिस्तान के अंदरूनी सियासी हालात और एससीओ की बैठक से जुड़ी ख़बरें प्रमुखता से छपीं.
सबसे पहले बात क़तर संकट की. सऊदी अरब समेत छह देशों ने क़तर से राजनयिक रिश्ते ख़त्म कर लिए हैं लेकिन पाकिस्तान ने क़तर से अपने संबंध को क़ायम रखने का फ़ैसला किया है.
पाकिस्तान का ये फ़ैसला इसलिए अहम है क्योंकि पाकिस्तान और सऊदी अरब के बहुत ही गहरे संबंध हैं.
क़तर से साथ रहेगा पाक
एक्सप्रेस अख़बार के मुताबिक़ पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि पाकिस्तान चाहता है कि इस्लामी दुनिया में एकता बनी रहे इसलिए वो क़तर से अपने संबंध जारी रखेगा.
अख़बार ने इस मुद्दे पर संपादकीय भी लिखा है. अख़बार लिखता है कि इस फ़ैसले से ये बात साबित हो गई है कि तेल पैदा करने वाले खाड़ी देशों के बीच गहरे मतभेद हैं.
अख़बार के अनुसार इस एक फ़ैसले ने पाकिस्तान के लिए भी बड़ी मुश्किल पैदा कर दी है. पाकिस्तान और क़तर के संबंध भी बहुत अच्छे हैं और सऊदी अरब के नेतृत्व में बनने वाले 39 इस्लामी देशों के सैन्य गठबंधन का भी पाकिस्तान एक अहम हिस्सा है.
अख़बार के अनुसार सीरिया, यमन और इराक़ पहले से ही गृहयुद्ध के शिकार हैं, बहरीन में अंदरुनी हालात अच्छे नहीं हैं, अब अगर गल्फ़ कॉरपोरेशन काउंसिल के सदस्य देशों में भी हालात बिगड़ने शुरु हो गए तो इसका नुक़सान सिर्फ़ अरब देशों को ही नहीं बल्कि पूरे इस्लामी जगत को उठाना पड़ सकता है.
अख़बार लिखता है कि इससे पहले कि हालात और बिगड़ें, पाकिस्तान, तुर्की और दूसरे इस्लामी देशों को इस मसले को सुलझाने में पहल करनी चाहिए.
अख़बार के मुताबिक़ अमरीका और यूरोप के अपने हित हैं, इसलिए इस्लामी देशों को भी अपने हितों का ध्यान रखते हुए मतभेदों को ख़त्म करने की कोशिश करनी चाहिए.
इस्लाम दुश्मनों का असली एजेंडा
पाकिस्तान के जाने माने पत्रकार हामिद मीर ने जंग अख़बार में एक लेख लिखा है जिसमें वो कहते हैं कि क़तर के मामले में सऊदी अरब के साथ-साथ ईरान ने भी हालात की नज़ाकत को नहीं समझा.
मीर कहते हैं कि सऊदी अरब और ईरान के नेताओं का अहंकार पूरी एक नस्ल को युद्ध की आग में झोंक सकता है और यही इस्लाम दुश्मन ताक़तों का असली एजेंडा है.
अफ़ग़ानिस्तान में हाल ही में हुए चरमपंथी हमले के बाद वहां के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी ने इसके लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराया है.
अख़बार दुनिया के अनुसार ग़नी ने कहा कि पाकिस्तान उनके देश पर अघोषित युद्ध थोप रहा है. लेकिन पाकिस्तान ने अफ़ग़ानिस्तान के इन आरोपों को ख़ारिज कर दिया है.
प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की अध्यक्षता में हुई सुरक्षा काउंसिल की बैठक के बाद पाकिस्तान ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान बेबुनियाद आरोप लगा रहा है और उसे अपने घर को पहले ठीक करना चाहिए.
अख़बार नवा-ए-वक़्त ने लिखा है कि पाकिस्तानी सेना के कोर कमांडरों की बैठक के बाद सेना के प्रवक्ता ने बयान जारी कर कहा कि अफ़ग़ानिस्तान को अपने अंदर झांकने की ज़रुरत है.
एससीओ में चर्चा चीन की
कज़ाकस्तान में एससीओ (शंघाई कॉरपोरेशन ऑर्गनाइज़ेशन) की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की मुलाक़ात भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति पुतिन से भी हुई.
अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार पुतिन ने पाकिस्तान को विश्वास दिलाया है कि वो पाकिस्तान को हर चुनौती से निपटने में मदद करेंगे.
भारत और पाकिस्तान दोनों को एससीओ की सदस्यता मिल गई है. अख़बार के मुताबिक़ नवाज़ शरीफ़ और मोदी के दरम्यान सिर्फ़ रस्मी मुलाक़ात हुई जिसमें दोनों नेताओं ने एक दूसरे की ख़ैरियत पूछी.
अख़बार दुनिया ने अमरीकी रक्षा मंत्रालय के हवाले से एक ख़बर छापी है कि चीन पाकिस्तान में सैन्य अड्डा बना सकता है.
लेकिन इस ख़बर के आते ही पहले चीन और पाकिस्तान ने इसे महज़ अफ़वाह बताकर ख़ारिज कर दिया है.
अख़बार के अनुसार अमरीकी रक्षा मंत्रालय ने 97 पेज की अपनी रिपोर्ट अमरीकी कांग्रेस को पेश की थी जिसमें इस बात का ज़िक्र किया गया था.
लेकिन चीन ने इसे झूठ का पुलिंदा क़रार दिया है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)