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अमरीका वीज़ा के लिए फ़ेसबुक पासवर्ड के साथ ये जानकारी भी देनी होगी
अब से आप जब भी अमरीकी वीज़ा के लिए आवेदन करेंगे, तो हो सकता है कि आवेदन फ़ॉर्म के साथ आपसे आपका फ़ेसबुक आईडी और पासवर्ड भी मांग लिया जाए.
डोनल्ड ट्रंप सरकार ने जो नया नियम शुरू किया है, उसके मुताबिक़ अमरीकी प्रशासन अमरीका जाने वाले किसी भी यात्री की सोशल मीडिया गतिविधि की जांच करने का अधिकार रखता है. यह नियम दुनिया भर के सभी देशों के लिए बराबर होगा.
वीज़ा के आवेदन फ़ॉर्म के साथ अब एक नई प्रश्नावली जारी की गई है.
इसमें आवेदकों से फ़ेसबुक और ट्विटर पर उनके बीते पांच सालों की सोशल मीडिया एक्टिविटी के बारे में सवाल किए जा रहे हैं.
ये जानकारी भी देनी होगी...
इसके अलावा, वीज़ा दफ़्तरों में बैठे अधिकारी आवेदकों से उनके ईमेल, पुराने पासपोर्ट नंबर, सभी फ़ोन नंबर, संबंधित पते और करीब 15 साल की 'बायोग्राफ़िकल जानकारी' भी मांग रहे हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए एक वरिष्ठ अमरीकी राज्य विभाग अधिकारी ने कहा, "मज़बूत राष्ट्रीय सुरक्षा और अधिक कठोर सुरक्षा नियंत्रण के लिए ऐसे नियम की ही आवश्यकता थी."
इस नए नियम की आलोचना करने वाले मानते हैं कि इस प्रणाली के प्रभाव में आने से वीज़ा प्रक्रिया लंबी हो जाएगी. जबकि इस प्रकिया में जमा किया गया ज़्यादातर डेटा किसी भी काम का नहीं होगा.
वीज़ा की लंबी प्रक्रिया के कारण हो सकता है कि कई योग्य कर्मचारी, शिक्षाविद, वैज्ञानिक और छात्र अमरीका में प्रवेश करने से ही हतोत्साहित हो जाएं.
अमरीका के 50 बड़े शैक्षिक संस्थानों ने अपनी यह चिंता ट्रंप प्रशासन के साथ शेयर की है.
वर्तमान में, जब अमरीका का टूरिस्ट वीज़ा लेने में कई हफ़्ते या महीना भर से भी ज़्यादा का वक़्त लग जाता है. तो नियम सख़्त होने के बाद हो सकता है कि वर्क परमिट लेने में साल भर का इंतज़ार भी करना पड़े.
अमरीका को "मनमानी शक्ति" मिल जाएगी
इस बारे में बात करते हुए सैन फ्रांसिस्को स्थित वकील बाबक यूसेफ़जादेह ने रॉयटर्स को बताया कि इस नए नियम के बाद अमरीका को "मनमानी शक्ति" मिल जाएगी, जिसके आधार पर प्रशासन तय करेगा कि कौन वीज़ा लेगा और कौन नहीं.
यूसेफ़जादेह ने बताया, "पूरी दुनिया में संयुक्त राज्य अमरीका की वीज़ा आवेदन प्रकिया पहले ही काफ़ी सख़्त थी. इसे अब और सख़्त और अस्पष्ट बना दिया गया है."
पिछले साल जून में अमरीका के कस्टम और बॉर्डर प्रोटेक्शन ऑफिस (सीबीपी) ने एक कार्यक्रम शुरू किया था. इसका मकसद यात्रियों की सोशल मीडिया एक्टिविटी की जानकारी लेना था. लेकिन इस कार्यक्रम में करीब 38 देशों के नागरिकों को वीज़ा आवेदन करते वक़्त सोशल मीडिया की जानकारी न देने की छूट थी. इनमें स्पेन, चिली और ब्रिटेन जैसे देश शामिल थे.
एक करोड़ लोगों को अमरीकी वीज़ा
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक़, 2016 में करीब एक करोड़ लोगों को अमरीकी वीज़ा दिया गया था.
लेकिन 23 मई के बाद आवेदन फ़ॉर्म के साथ जोड़ी गई इस नई प्रश्नावली से सभी देशों के आवेदक प्रभावित हुए हैं.
ट्रंप ने चुनाव जीतने से पहले यह वादा किया था कि वो अगर पावर में आए, तो देश की सुरक्षा और सीमा सुरक्षा के लिए काम करेंगे. उनके आते ही वीज़ा नियम सख़्त भी किए गए हैं. फिर चाहें एच-1बी वीज़ा हो या साधारण आवेदन के साथ सोशल मीडिया की जानकारी मांगना हो.
हालांकि, कई सामाजिक संगठन, आप्रवासन पर काम कर रहे वकील और एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे कई मानवाधिकार समूह ट्रंप के इन आदेशों की महीनों से आलोचना कर रहे हैं.
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