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पाक प्रेस रिव्यू- '...तो मीनार-ए-पाकिस्तान पर उलटा लटका दिया जाता'
- Author, इक़बाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान से छपने वाले उर्दू अख़बारों में इस हफ़्ते जो ख़बरें सुर्ख़ियों में रहीं, उनमें पनामा लीक्स की जांच में नवाज़ शरीफ़ के बेटों से पूछताछ, उनके एक सांसद की धमकी और सुप्रीम कोर्ट के जजों के स्टेटमेंट शामिल हैं.
सबसे पहले बात प्रधानमंत्री के बेटों से पूछताछ की. पनामा लीक्स की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के ज़रिए बनाई गई संयुक्त जांच कमिटी (जेआईटी) ने प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के दोनों बेटों हसन नवाज़ और हुसैन नवाज़ से कई दिनों तक पूछताछ की.
पनामा लीक्स भ्रष्टाचार से जुड़ा मामला है और शरीफ़ परिवार पर आरोप है कि उन्होंने लंदन में कई घर ख़रीदे हैं, विदेशों में उनकी कई कंपनियां हैं और भ्रष्टाचार के ज़रिए कमाए गए पैसों से ये सारी संपत्तियां बनाई गई हैं.
सांसद की धमकी
लेकिन इसी जांच के बारे में नवाज़ शरीफ़ की पार्टी के एक सांसद ने ऐसा बयान दे दिया जो न सिर्फ़ अख़बारों में छा गया बल्कि सोशल मीडिया में भी वायरल हो गया.
अख़बार नवा-ए-वक़्त के अनुसार सांसद नेहाल हाशमी ने एक कार्यक्रम में कहा कि जो लोग नवाज़ शरीफ़ के बेटों से हिसाब मांग रहे हैं, उनका भी हिसाब लिया जाएगा और उन्हें नहीं छोड़ा जाएगा.
अख़बार के अनुसार उन्होंने कहा, "तुम जिनका हिसाब ले रहे हो वो नवाज़ शरीफ़ के बेटे हैं. तुम कान खोलकर सुन लो हम तुम्हें नहीं छोड़ेंगे. तुम आज नौकरी में हो लेकिन कल रिटायर हो जाओगे. हम तुम्हारे बच्चों और ख़ानदान के लिए पाकिस्तान की ज़मीन तंग कर देंगे."
सैनिक शासन
सुप्रीम कोर्ट ने इस बयान का संज्ञान लेते हुए नेहाल हाशमी पर अदालत की अवमानना का केस दर्ज कर लिया और नवाज़ शरीफ़ सरकार को भी खरी-खोटी सुनाई.
अख़बार दुनिया के मुताबिक़ अदालत ने कहा कि बच्चों को धमकियां दी जा रही हैं लेकिन सुप्रीम कोर्ट न डरने वाला है न किसी अंजाम से घबराने वाला है.
कोर्ट ने कहा कि पाकिस्तान में सैनिक शासन के दौरान भी जजों के बच्चों को धमकियां नहीं दी गईं.
एक जज जस्टिस अज़मत सईद ने सरकार पर चुटकी लेते हुए अटॉर्नी जनरल को संबोधित करते हुए कहा, "अटॉर्नी जनरल साहब आपकी हुकूमत क्या कर रही है? आपको पता है लड़ाई में बच्चों को कौन शामिल करता है."
नेहाल हाशमी के पीछे कौन?
जस्टिस अज़मत ने कहा "ऐसी धमकियां दहशतगर्द और माफ़िया देते हैं. ऐसी धमकियां सिसली का बदनाम ज़मीन माफ़िया देता है. मुबारक हो मिस्टर अटॉर्नी जनरल. आपकी हुकूमत ने सिसली की माफ़िया को ज्वॉइन कर लिया है. आपको ऐसी कम्यूनिटी का हिस्सा बनना मुबारक हो."
अटॉर्नी जनरल ने सरकार का बचाव करते हुए कहा कि सरकार ने धमकी नहीं दी.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने उनसे पूछा कि अदालत आख़िर कैसे ये बात मान ले कि नेहाल हाशमी के पीछे कोई और नहीं बोल रहा था.
जजों ने कहा कि अदालत को इस बात के लिए संतुष्ट करना होगा कि ये बयान सिर्फ़ नेहाल हाशमी के ही थे और सरकार उनके साथ नहीं है.
इस पर नेहाल हाशमी अचानक बोल पड़े, "रोज़े से हूँ. झूठ नहीं बोलूँगा. मेरा बयान किसी के ख़िलाफ़ नहीं था. ऐसा मेरे ख़्वाब-ओ-ख़्याल में भी नहीं था."
अवमानना का केस
सांसद नेहाल हाशमी ने अदालत से माफ़ी मांगी और उम्मीद जताई कि अदालत उन्हें माफ़ कर देगी.
लेकिन ऐसा नहीं हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने उनके ख़िलाफ़ अदालत की अवमानना का केस दर्ज करने का आदेश दे दिया.
बीते सप्ताह छपे कई अख़बार के संपादकीय में भी इस बयान की निंदा की गई.
अख़बार एक्सप्रेस ने अपने संपादकीय में लिखा है कि सांसद का ये बयान भड़काने वाला था और इस तरह के बयान से यही समझा जाएगा कि जांच अधिकारियों को कोई ख़ास संदेश दिया जा रहा है और उन्हें डराया जा रहा है.
इस बयान के वायरल होने के बाद विपक्षी दल पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता और संसद में नेता प्रतिपक्ष सैयद ख़ुर्शीद शाह ने सदन में ज़ोरदार भाषण दिया.
अख़बार जंग के मुताबिक़ उन्होंने कहा कि सरकार संस्थाओं से लड़ाई कर रही है और संस्थाओं से टकराव तबाही की तरफ़ ले जाता है.
उनका कहना था, अगर पीपीपी सुप्रीम कोर्ट के जजों या उसकी बनाई हुई जेआईटी के ख़िलाफ़ इस तरह का धमकी भरा बयान देती तो उसे मीनार-ए-पाकिस्तान पर उलटा लटका दिया जाता.
नवाज़ शरीफ़ ने आख़िरकार इस तरह का बयान देने वाले सांसद नेहाल हाशमी को पार्टी से निकाल दिया.
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