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भारत में कहां पहुंची 'पनामा पेपर्स' जांच?
- Author, दिव्या आर्य
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
पाकिस्तान में 'पनामा पेपर्स' से सामने आई जानकारी से एक बार तो ऐसा लगा कि प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ की कुर्सी तक पर संकट बन आया है. वहीं, भारत के 500 से ज़्यादा नागरिकों के नाम पनामा पेपर्स में आने के बाद उनका क्या हाल है?
पनामा पेपर्स कही जानेवाली अंतरराष्ट्रीय पड़ताल का हिस्सा बनीं इंडियन एक्सप्रेस अख़बार की ऋतु सरीन ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि भारत में तहक़ीक़ात कहां पहुंची है.
सरीन के मुताबिक भारतीय नागरिकों के नाम सामने आने पर सरकार के इनकम टैक्स विभाग यानी 'सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सिस' (सीबीडीटी) ने इसकी जांच शुरू कर दी.
जिन लोगों के नाम सामने आए उनमें से 450 को क़ानूनी नोटिस भेजा जा चुका है और जवाब तलब किए गए हैं.
ग़ौरतलब है कि पनामा पेपर्स में पिछले साल लीक हुए दस्तावेज़ों में जिन लोगों की जानकारी सामने आई उन पर गैर क़ानूनी ढंग से विदेश में पैसा रखने के आरोप हैं.
ऋतु सरीन बताती हैं कि, "जिस दिन हमारी तहक़ीक़ात प्रकाशित हुई, सरकार ने जांच के लिए एक टास्क-फ़ोर्स बना दी लेकिन ये आम लोगों के ज़हन में नहीं है क्योंकि कार्रवाई अदालत में नहीं बल्कि आयकर विभाग के तहत की जा रही है."
सीबीडीटी के तहत हो रही जांच की रिपोर्ट सीधा प्रधानमंत्री कार्यालय को दी जाती है.
अब सुप्रीम कोर्ट ने यही जानकारी सीबीडीटी से बंद लिफ़ाफ़े में मांगी है. इसके बाद कोर्ट तय करेगी की जांच उसकी अध्यक्षता में होनी चाहिए या नहीं.
अगर ऐसा होता है तो जांच की जानकारी आम जनता को सार्वजनिक तौर पर उप्लब्ध हो सकती है.
ऋतु कहती हैं, "मैं मौजूदा जांच में पक्षपात का आरोप नहीं लगा रही पर सही है कि कोर्ट की निगरानी से ये फ़ायदा होगा कि कोई सरकारी विभाग ये तय नहीं कर पाएगा कि किसकी जांच हो और किसकी नहीं."
दुनिया में सबसे अधिक गोपनीयता से काम करने वाली पनामा की कंपनी 'मोसाक फोंसेका' के लाखों कागज़ात लीक हो गए.
इन दस्तावेज़ों से पता चलता है कि मोसाक फोंसेका ने किस तरह अपने ग्राहकों को कर बचाने, कर की चोरी, काले धन को वैध बनाने और प्रतिबंधों से बचने में मदद की.
इन दस्तावेज़ों की जांच 'अंतर्राष्ट्रीय कनसोरशियम ऑफ़ इनवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स' (आईसीआईजे) ने 100 मीडिया कंपनियों के साथ मिलकर की.
इनमें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ के परिवार समेत 12 वर्तमान राष्ट्राध्यक्षों और विश्व स्तर के 60 वर्तमान या पूर्व नेताओं से जुड़े लोगों के नाम शामिल हैं.
भारत में कई नामी-गिरामी हस्तियां भी इसमें शक़ के घेरे में हैं लेकिन किसी एक नाम ने अबतक सुर्ख़ियां नहीं बटोरी हैं.