You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
जर्मन चांसलर को नहीं है ब्रिटेन और अमरीका पर भरोसा
जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल का कहना है कि अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप की जीत और ब्रिटेन के ब्रेक्ज़िट के फ़ैसले के बाद यूरोप अब अमरीका और ब्रिटेन पर 'पूरी तरह भरोसा' नहीं कर सकता.
उन्होंने कहा कि वो दोनों देशों के अलावा रूस से भी दोस्ताना रिश्ते चाहती हैं, लेकिन यूरोप को अब अपनी क़िस्मत के लिए ख़ुद ही लड़ना होगा.
पेरिस संधि पर मतभेद से निराशा
मर्केल का ये बयान जी-7 की शिखर बैठक में जलवायु संकट के हल के लिए हुई 2015 की पेरिस संधि पर मतभेद सामने आने के बाद आया है.
उन्होंने इटली के सिसली में दो दिन की बैठक में हुई चर्चा को बेहद मुश्किल बताया था.
जी-7 सम्मेलन में अमरीका के समर्थन ना करने की वजह से इस संधि का पालन करने के बारे में एक साझा घोषणापत्र जारी नहीं हो पाया था.
बाद में अमरीकी राष्ट्रपति ने ट्वीट करके कहा था कि इस मामले पर फ़ैसला वो अगले हफ़्ते लेंगे.
मर्केल की प्राथमिकता
म्यूनिख में एक रैली को संबोधित करते हुए मर्केल ने कहा " वो वक़्त बीत चुका है जब हम दूसरों पर पूरी तरह निर्भर हो सकते थे. मैंने इस बात को पिछले कुछ दिनों में महसूस किया है."
बर्लिन में बीबीसी संवाददाता डेमियन मैक्गिनिज़ ने कहा कि मर्केल के शब्द काफ़ी जोशीले और भावुक थे और वो काफ़ी खुलकर सीधी बात बोल रही थीं.
मर्केल ने कहा कि जर्मनी और फ्रांस के नए राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के बीच के रिश्ते प्राथमिकता होना चाहिए.
इससे पहले एंगेला मर्केल ने सिसली में पेरिस संधि पर जी-7 में हुई बातचीत को 6 के मुक़ाबले एक बताते हुए 'बहुत असंतोषजनक तो नहीं लेकिन बेहद मुश्किल' बताया था.
ट्रंप का रवैया
ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान के दौरान जलवायु समझौते पर संदेह जताया था और कहा था कि वो पेरिस संधि को छोड़ देंगे.
पेरिस संधि दुनिया का पहला व्यापक जलवायु समझौता है जिससे कार्बन उत्सर्जन में कटौती करने के लिए देशों को साथ आने की ज़रूरत है.
पिछले हफ़्ते ब्रसेल्स में ट्रंप ने नाटो के सदस्यों से कहा था कि वो रक्षा क्षेत्र में और पैसा ख़र्च करें , उन्होंने नेटो की परस्पर सुरक्षा गारंटी को लेकर प्रशासनिक प्रतिबद्धता को नहीं दोहराया था.
बीबीसी के रक्षा और कूटनीतिक मामलों के संवाददाता जॉनथन मार्कस का कहना है कि फिलहाल सबसे बड़ा सवाल ये है कि ट्रंप का उस संगठन के साथ रिश्ता कितना असहज है जिसका अग्रणी देश अमरीका है.
ख़बरों के मुताबिक़ बेल्जियम में ट्रंप ने जर्मनी की व्यापार प्रणाली को 'बुरा, बेहद बुरा' बताया था. उन्होनें शिकायत की थी कि यूरोप की सबसे बड़ी अर्थवय्वस्था अमरीका तो बहुत ज़्यादा कारें बेचती है.
ट्रंप ने अपने यूरोप दौरे को 'बड़े नतीजों' के साथ 'अमरीका के लिए बड़ी सफलता' बताया था.
(बीबीसी हिंदी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)