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दुनिया की 'सबसे दुखी कुतिया' खोज रही है घर
दुनिया की 'सबसे दुखी कुतिया' फिर सुर्ख़ियों में है. उसे तीसरी बार एक घर की तलाश है.
इस कुतिया का नाम 'लाना' है और वह 2015 में पहली बार सुर्ख़ियों में आई थी. कनाडा में जानवरों को गोद लेने वाले एक संगठन ने उसकी एक तस्वीर पोस्ट की थी, जो वायरल हो गई थी.
इसी के बाद 'लाना' को 'दुनिया की सबसे दुखी कुतिया' कहा गया था. लाना को कुत्तों के लिए काम करने वाली एक संस्था मेक्सिको से कनाडा लेकर आई थी.
गोद लेने के 5 हजार प्रस्ताव
'लाना' के दूसरे मालिक ने हाल ही में उसे लौटा दिया है. लिहाज़ा अब वह तीसरी बार गोद लिए जाने के लिए तैयार है. 20 मई तक 'लाना' को गोद लेने के लिए आवेदन किया जा सकता है.
तब से इस संस्था के पास लाना को गोद लेने के लिए पांच हज़ार ईमेल और प्रस्ताव आ चुके हैं.
ओंटारियो के कैंब्रिज में 'रेस्क्यू डॉग्स मैच' की ब्रेंडा डोबरांस्की ने कहा, 'हम ज़रूर उसके लिए एक जगह खोज लेंगे. तीसरी बार इसका ख़ास आकर्षण है.'
हालांकि लाना के बर्ताव पर भारी ट्रेनिंग के बावजूद अभी काफी काम किया जाना बाकी है. संस्था के मुताबिक, उसे अपना ज़्यादा वक़्त बाहर बिताना चाहिए, क्योंकि घर के अंदर वह आसानी से डर जाती है.
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इंसानों के छूने से हिचकती है लाना
ब्रेंडा डोबरास्की लाना को थोड़ा-बहुत एक बिल्ली की तरह बताती हैं जो लोगों से दूरी बनाकर रखती है.
वह कहती हैं, 'जब आप लाना को देखते हैं तो वह आपको उन कुत्तों की तरह लगती है जिसे आप गले लगाकर और बांहों में भरकर आप अपने सोफे पर बैठना चाहेंगे.'
वह आगे कहती हैं, 'लेकिन वह उस तरह की नहीं है. वह इंसानों के छूने से काफी हिचकती है. वह अभी सीख रही है कि दूसरे कुत्तों के साथ भी खेला जा सकता है. अभी वह जिस ट्रेनर के साथ है, वह उसके सिर पर कुछ-एक बार हाथ फेरे तो उसका शरीर तन जाता है.'
लाना की कहानी 2015 में सुर्ख़ियों में आई थी, जब कुत्तों को बचाने का काम करने वाले एक समूह ने लिखा था कि कैसे उसे उसके मालिकों ने छोड़ दिया था. पहली बार उसे जिस परिवार ने गोद लिया था, वहां वह खाने को लेकर मालिकों में से एक पर भड़क गई थी.
इसके बाद उसे दूसरा मालिक मिला, लेकिन यह रिश्ता भी ज़्यादा समय तक नहीं टिका.
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लाना की कहानी ने जुटाए 7 करोड़ रुपए
लाना को 'भोली और प्यार करने वाली' बताया गया है, लेकिन नए लोगों के आस-पास वह सतर्क हो सकती है और अपने खाने को लेकर ख़ासी फ़िक्रमंद रहती है.
लाना इसी महीने तीन साल की हुई है. ग्रुप का कहना है कि उन्हें ऐसे घर की तलाश है जहां कोई और पालतू जानवर और बच्चे न हों और मकान के पिछवाड़े में बाड़ लगी हो.
ब्रेंडा डोबरास्की के मुताबिक, लाना की कहानी से उनकी संस्था को 11 हज़ार अमरीकी डॉलर यानि करीब 7 करोड़ रुपये जुटाने में मदद मिली थी. यह पैसा कुत्तों के इलाज़ और उन्हें रेस्क्यू करके लाने के ख़र्च में इस्तेमाल किया जा रहा है.
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