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तस्वीरें- क्लासिक कारें और उनके दिलचस्प निकनेम
क्लासिकल कारों को नए अंदाज़ में 'निकनेम ऑफ 99 क्लासिक रेस कार' शीर्षक के तहत एक कार विशेषज्ञ पत्रिका ने प्रकाशित किया.
इलस्ट्रेटर हेलेज जेपसन और लेखक माइकल कोकरात्ज़ ने इनके उपनामों के साथ चित्र और ख़ूबियां बयां की हैं.
मैकलारेन M7A- डबल डेकर
1968 से एफ वन चैंपियनशिप के दौरान मैकलेरन के पंखों के डिजाइन और रियर एक्सल्स में वृद्धि हुई, ये डबल डेकर बन गई.
बीटल/कैफर- हर्बी VW
1968 में फिल्म 'लवबग' में पहली बार दिखने वाली ये कार अनगिनत हॉलीवुड फिल्मों में सितारे की तरह नज़र आई, हर्बी एक बीटल है जिसका 53 नंबर रहता था.
जादुई शक्ति की तरह हर्बी ख़ुद चल सकती है. ये बेहद तेज़ रफ़्तार कार है जो दीवारों को नाप सकती है और कारों की रेस जीत सकती है.
2005 में हर्बी का आख़िरी अवतार दिखाई दिया जब हर्बी में लिंडसे लोहान ने एक कार रेसर की भूमिका अदा की थी.
ट्रबंट 601- रेसिंग कार्डबोर्ड
अकसर इसे पूर्वी जर्मनी की नाकामी के तौर पर देखा जाता था लेकिन 6 साल बाद 1956 में ट्रबंट 601 मॉडल लॉन्च किया गया था.
इसके बाद ये पूर्वी जर्मनी की पसंदीदा कार बन गई. इसका बाहरी हिस्सा ड्यूरोप्लास्ट से बना है. इसी सामग्री की वजह से इसका उपनाम रेसिंग कार्डबोर्ड दिया गया.
लैंड रोवर SIIA SAS - पिंक पैंथर
बबलगम जैसे बाहरी रंग के बावजूद 'पिंक पैंथर' के इस रंग के पीछे एक गंभीर वजह है.
लैंड रोवर सीरीज़ IIA सेना के उपयोग में आने वाली गाड़ी है जिसे ब्रिटिश आर्मी की स्पेशल सर्विस इस्तेमाल करती थी.
इस मॉडल के लिए गुलाबी रंग का इस्तेमाल किया गया क्योंकि ये रंग रेगिस्तान में छलावा देता है.
मैकलारेन M8D- बैटमोबाइल
दो सीटों वाली इस रेसिंग कार को कैनैडियन-अमेरिकन चैलेंज कप के लिए बनाया गया था, ये कार रेंसिग प्रतियोगिता इन्हीं दो देशों के बीच होती है.
'द मैकलारेन M8D' के एयरोडायनेमिक डिज़ाइन की वजह से इसे बैटमोबाइल नाम दिया गया.
1970 में डेनिस हूम, डैन गर्नी और पीटर गेथिन ने अपने 10 में से 9 रेसें इसी से जीती थीं.
हालांकि इसी साल इसका परीक्षण करते हुए टीम के मालिक ब्रूस मैकलारेन की एक दुर्घटना में मौत हो गई थी.
एल्फा रोमियो 1900 C52- फ्लाइंग सॉसर
इस छोटे आकार की कार में ड्राइवर अपने आपको सीमित महसूस करते थे.
हालांकि फोर्ड कंपनी के संस्थापक हेनरी फोर्ड ने इसकी डिज़ाइन की सराहना की और कहा, ''जब भी मैं अल्फा रोमियो को चलाते देखता हूं मैं अपनी टोपी झुका लेता हूं.''
शेवरले 150- ब्लैक विंडो
मैक्निक्स ब्रेडली डेनिस और पॉल मैक्डफी ने अटलांटा ट्यून अप सर्विस की स्थापना की और शेवरले का सबसे सस्ता ब्रांड भेजने के बावजूद उन्होंने बेहतरीन कार रेसिंग ड्राइवरों को उसे चलाने के लिए राज़ी कर लिया.
इसकी सफलता को देखते हुए 1957 में शेवरले बनाने वाली जनरल मोटर्स ने स्टॉक कार कॉम्पटीशन गाइड प्रकाशित की, जिसमें ब्लैक विंडो कारों की फिटिंग की जानकारी थी.
इन करों को ख़ासतौर से काला और सफ़ेद रंग दिया जाता था.
मर्सिडीज़-बेंज़ 300 SL W 198- गलविंग
तेज़, ख़ूबसूरत और महंगी मर्सिडीज़ 300 SL को 1954 में दुनिया ने देखा, यानी विश्व युद्ध ख़त्म होने के 9 साल बाद, जर्मनी अभी भी शानदार कारें बनाने में सक्षम था.
अमीर और मशहूर लोगों की पंसदीदा मर्सिडीज़ 300 SL को अमरीका में 'गलविंग' कहा गया क्योंकि इसके दरवाज़े बिल्कुल सीगल के पंखों की तरह थे.
जगुआर डी-टाइप- लॉन्ग नोज़
1955 के बाद सारी जगुआर डी टाइप कारों को 'लॉन्ग नोज़' के नाम से जाना जाता था क्योंकि फ्रांस के 'ला सार्ट रेस ट्रैक' पर इसकी रफ़्तार बढ़ाने के लिए इसके अगले हिस्से की लंबाई 19 सेंटीमीटर तक बढ़ दी गई थी.
हालांकि 1955 में डी टाइप ने अपने ड्राइवरों माइक हॉथॉर्न और आइवर बुएब की फ्रांसीसी ट्रैक पर जीतने में मदद की थी, लेकिन ये जीत उस दुर्घटना के कारण फीकी पड़ गई जिसमें 80 से ज़्यादा दर्शक मारे गए थे.
मासेराती टिपो 61- बर्डकेज
1959 में मासेराती के डिज़ाइन प्रमुख ग्वीडो अलफेयरी ने 200 ट्यूबों को एक तंग जाली में डाल दिया.
'टिपो 61' कार के तहत उन्होने हवाई जहाज़ के पहियों का इस्तेमाल किया. इसलिए इसका नाम 'बर्डकेज' रखा.
1960 में मासेराती ने कई कार रेस जीती थीं..
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