You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
तुर्की के भविष्य पर जनमत संग्रह के नतीजों का इंतज़ार
तुर्की में संसदीय शासन प्रणाली हो या राष्ट्रपति शासन प्रणाली, इसे लेकर कराए गए जनमत संग्रह में मतदान ख़त्म हो चुका है और वोटों की गिनती शुरू हो गई है.
राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन चाहते हैं कि देश की शासन प्रणाली संसदीय से राष्ट्रपति शासन व्यवस्था में तब्दील हो जाए.
यदि जनमत संग्रह राष्ट्रपति शासन व्यवस्था के पक्ष में गया तो अर्दोआन साल 2029 तक राष्ट्रपति बने रह सकते हैं.
समर्थकों का कहना है कि राष्ट्रपति शासन प्रणाली देश में कारगर साबित होगी और इससे देश का आधुनिकीकरण होगा, जबकि विरोधी मानते हैं कि इससे निरंकुशता को बढ़ावा मिल सकता है.
शुरुआती रुझान के मुताबिक मतदान प्रतिशत अच्छा रहा है.
दियारबाक़िर प्रांत के दक्षिण पूर्वी इलाके में एक मतदान केंद्र केपास तीन लोगों को वोटिंग को लेकर हुए विवाद में गोली मार दी गई है.
देश भर में एक लाख 67 हज़ार पोलिंग बूथों पर लगभग साढ़े 5 करोड़ लोग अपने मताधिकार का उपयोग करने के लिए योग्य हैं.
अगर जनमत संग्रह में मतदान अर्दोआन के पक्ष में होता है तो उन्हें असीम शक्ति मिल जाएगी. कैबिनेट मंत्रियों की नियुक्ति, नए फरमानों, जजों की नियुक्ति और संसद भंग करने में उनका एकाधिकार होगा.
अर्दोआन का कहना है कि इस बदलाव से तुर्की सुरक्षा के स्तर पर जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनसे निपटने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि इससे भविष्य में सरकार गठन के लिए नाजुक गठबंधनों की भी ज़रूरत नहीं रह जाएगी.
इस्तांबुल के तुज़्ला ज़िले में आख़िरी रैली को संबोधित करते हुए अर्दोआन ने अपने समर्थकों से कहा, ''नए संविधान से स्थिरता और भरोसा क़ायम होगा जो देश की तरक्की के लिए ज़रूरी है.''
क़रीब एक दशक तक तुर्की के प्रधानमंत्री रहने के बाद अर्दोआन 2014 में तुर्की के राष्ट्रपति बने थे. तुर्की में राष्ट्रपति को कार्यकारी शक्तियां हासिल नहीं हैं.
संविधान संशोधन को मंजूरी मिल जाती है तो प्रधानमंत्री का पद पूरी तरह से ख़त्म हो जाएगा. इसके बाद राष्ट्रपति के पास सारे राज्यों की शासन व्यवस्था पर नियंत्रण होगा. राष्ट्रपति ने कहा कि नई व्यवस्था फ्रांस और अमरीका की तरह होगी.
उन्होंने कहा कि इससे कुर्द विद्रोहियों पर काबू किया जा सकेगा. अर्दोआन ने कहा कि इस व्यवस्था से इस्लामिक चरमपंथियों, शरणार्थी समस्या और सीरिया में जारी संघर्ष से भी राहत मिलेगी.
पिछले साल जुलाई में सेना की तख़्तापलट की कोशिश के बाद इस जनमतसंग्रह को लेकर राजनीतिक लामबंदी को हवा मिली थी. हालांकि तख़्तापलट की कोशिश नाकाम रही थी लेकिन उसके बाद सरकार ने हज़ारों गिरफ़्तारियों को अंजाम दिया था.