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बोको हराम से लड़ती ये नाइजीरियाई औरत
- Author, जिमेह सालेह
- पदनाम, बीबीसी हौसा संवाददाता
नाइजीरिया में एक स्कूल से इस्लामी चरमपंथी संगठन बोको हराम ने 270 से भी ज़्यादा लड़कियों का अपहरण कुछ साल पहले कर लिया था.
चिबोक कस्बे की इन लड़कियों में से अधिकांश का अब तक पता नहीं चल पाया है.
हिंसा से बचने और बोको हराम से लड़ने के लिए नाइजीरिया में सेना समर्थित कई हथियारबंद दस्ते भी बन गए हैं.
बोको हराम के निशाने पर आम तौर पर लड़कियां और महिलाएं ही होती हैं, लेकिन एक महिला ऐसी भी है, जिसने इस हिंसा के ख़िलाफ़ हथियार उठाया.
पति की हत्या के बाद उठाया हथियार
34 साल की हनातू माई देश के उत्तर पूर्वी कस्बे चिबोक में रहती हैं और जब उनके पति की हत्या हुई इसके बाद, वो बोको हराम से लड़ने वाले ऐसे ही एक दस्ते में शामिल हुईं.
वो बताती हैं, "मैं इस ग्रुप में 2014 में शामिल हुई, इसी साल मेरे पति की हत्या हुई थी. वो भी ऐसे ही एक दस्ते के यूनिट कमांडर थे."
वो कहती हैं, "उन्हें बोको हराम ने मार डाला. इसलिए मैंने उनकी जगह ली और मर्दों के साथ काम करना शुरू किया."
इन हथियारबंद दस्तों को 'सिविलियन ज्वाइँट टास्क' के रूप में जाना जाता है. बोको हराम से लड़ने के लिए इन्हें 2013 में बनाया गया था.
सेना के प्रोत्साहन पर इन ग्रुपों में हज़ारों लोग शामिल हुए.
हथियारबंद समूह
हिंसा के प्रति धीमी कार्रवाई को लेकर नाइजीरियाई सेना की काफी आलोचना होती रही है.
इन वॉलंटियरों को जब चरमपंथियों की सूचना मिलती है, वो उनसे लड़ने के लिए निकल पड़ते हैं.
हनातू कहती हैं, "हम बोको हराम का पीछा करते हैं, उनको अपने हाथों से पकड़ते हैं और मार डालते हैं."
इसके लिए उन्होंने हथियार चलाने का भी प्रशिक्षण लिया.
एक घटना का ज़िक्र करते हुए वो कहती हैं, "कोंजुलारी गांव में हम गए, हमने बोको हराम के सदस्यों को पकड़ा और फिर उनको मार डाला."
उनका कहना है कि इसमें शामिल होने के बाद उनमें काफी कुछ बदलाव आया है, "शुरू में मैं काफी डरी हुई थी, लेकिन अब किसी बात से डर नहीं लगता."
हालांकि ऐसे अनियंत्रित और हथियारबंद दस्ते समस्या भी बन गए हैं.
मानवाधिकार संगठनों ने इन हथियारबंद समूहों द्वारा संदिग्ध बोको हराम सदस्यों और नागरिकों के ख़िलाफ़ किए गए उत्पीड़न की घटनाओं पर सवाल खड़े किए हैं.
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