नॉर्वे की कड़क, जांबाज़ महिला सैनिक

    • Author, केविन पोन्नैया
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, एल्वेरम

नॉर्वे की सेना ने साल 2014 जगरट्रॉपन शुरू किया. यह महिला सैनिकों का समूह है.

इसमें सबसे सक्षम और ताक़तवर महिला सैनिक चुनी जाती हैं और उसके बाद उन्हें सबसे कठिन प्रशिक्षण से गुजरना होता है.

इन महिलाओं को सबसे पहले अफ़ग़ानिस्तान में तैनात किया गया जहां उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित भी की.

ये काफ़ी भारी सामान उठा कर मीलों चल सकती हैं, जिंदा रहने के लिए कोई भी जानवर मार कर खा सकती हैं और उड़ते जहाज़ से कूद कर दुश्मनों के बीच तेज़ी से घुस सकती हैं.

इन्हें हंटर ट्रूप कहा जाता है.

इस ट्रूप की शुरुआत सिर्फ़ प्रयोग से हुई थी. पहले साल 300 महिलाओं ने आवेदन किया था, सिर्फ़ 12 रंगरूट चुने गए और वे अब भी ज़बरदस्त प्रशिक्षण से गुजर रही हैं.

एक महिला सैनिक का कहना है कि सबसे कठिन होता है 'हेल वीक'. इसमें उन्हें विपरीत स्थितियों, हथियारों और जले हुए टैंकों के बीच काफ़ी समय रहना होता है.

ये महिलाएं गाना गाती हैं, मजाक करती हैं. लेकिन बीच बीच में अपना इक्विपमेंट बॉक्स चेक करती हैं, हथियार उठा कर लड़ाई का अभ्यास करती हैं. फिर यकायक खाने पीने की तैयारियां भी करने लगती हैं.

अमरीका और ब्रिटेन ने भी मैदान में लड़ने वाली महिलाओं की अपने यहां भर्ती की छूट दे दी है. वहां अब तक महिला सैनिक कॉम्बैट रोल में नहीं थीं.

अमरीका के विशेष सुरक्षा दलों ने अपनी ज़बरदस्त प्रतिरोधक क्षमता साबित कर दी है.

लेकिन रैंड इंस्टीट्यूट ने 2014 में अपने अध्ययन में पाया था कि 85 फ़ीसदी लोग स्पेशल ऑपरेशन्स कमांड में महिलाओं को शामिल करने के ख़िलाफ़ थे.

लोगों का कहना था कि महिलाएं पुरुषों के साथ पूरी तरह सामंजस्य नहीं बिठा पाएंगी. पुरुषों के साथ काम करने में उन्हें दिक्क़त होगी.

पर पाया गया कि महिला सैनिक पुरुषों के साथ एक ही कमरे में सोने तक को तैयार हो गईं.

यह भी समझा गया कि महिलाओं की शारीरिक क्षमता पुरुषों से कम होगी, वे पुरुषों का सारा काम नहीं कर सकेंगी. इससे टीम के पूरे प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ेगा.

नॉर्वे के विशेष दल से प्रशिक्षण पाई महिलाएं फ़िलहाल जॉर्डन में तैनात हैं. वे वहां सीरियाई विद्रोहियों की मदद कर रही हैं.

वे ख़ुद को इस्लामिक स्टेट कहने वाले चरमपंथी संगठन के छापामारों का भी मुक़ाबला कर रही हैं.

जगरट्रॉपन की महिलाओं को अब तक किसी विशेष अभियान के लिए तैनात नहीं किया गया है.

महिला सैनिक जनिक कहती हैं कि नॉर्वे जैसे शांतिप्रिय देशों में यह सीखना मुश्किल होता है कि उन्हें दूसरों को 'मारने के गुर सीखने' हैं.

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