नॉर्वे की कड़क, जांबाज़ महिला सैनिक

बंदूक चलाती हुई महिला सैनिक

इमेज स्रोत, Mohamed Madi/BBC

    • Author, केविन पोन्नैया
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, एल्वेरम

नॉर्वे की सेना ने साल 2014 जगरट्रॉपन शुरू किया. यह महिला सैनिकों का समूह है.

इसमें सबसे सक्षम और ताक़तवर महिला सैनिक चुनी जाती हैं और उसके बाद उन्हें सबसे कठिन प्रशिक्षण से गुजरना होता है.

इन महिलाओं को सबसे पहले अफ़ग़ानिस्तान में तैनात किया गया जहां उन्होंने अपनी उपयोगिता साबित भी की.

क्रॉस कंट्री स्की में शिरकत करती महिला सैनिक

इमेज स्रोत, Norwegian Special Forces

ये काफ़ी भारी सामान उठा कर मीलों चल सकती हैं, जिंदा रहने के लिए कोई भी जानवर मार कर खा सकती हैं और उड़ते जहाज़ से कूद कर दुश्मनों के बीच तेज़ी से घुस सकती हैं.

इन्हें हंटर ट्रूप कहा जाता है.

सन ग्लास, मास्क, पूरी वर्दी और बंदूक से लैस महिला सैनिक

इमेज स्रोत, Mohamed Madi/BBC

इस ट्रूप की शुरुआत सिर्फ़ प्रयोग से हुई थी. पहले साल 300 महिलाओं ने आवेदन किया था, सिर्फ़ 12 रंगरूट चुने गए और वे अब भी ज़बरदस्त प्रशिक्षण से गुजर रही हैं.

एक महिला सैनिक का कहना है कि सबसे कठिन होता है 'हेल वीक'. इसमें उन्हें विपरीत स्थितियों, हथियारों और जले हुए टैंकों के बीच काफ़ी समय रहना होता है.

ओल वडीक सैनिकों से बात करती हुई

इमेज स्रोत, Kevin Ponniah/BBC

ये महिलाएं गाना गाती हैं, मजाक करती हैं. लेकिन बीच बीच में अपना इक्विपमेंट बॉक्स चेक करती हैं, हथियार उठा कर लड़ाई का अभ्यास करती हैं. फिर यकायक खाने पीने की तैयारियां भी करने लगती हैं.

जगरट्रॉपन ट्रूप की पैराशूट ट्रेनिंग

इमेज स्रोत, Norwegian Special Forces

अमरीका और ब्रिटेन ने भी मैदान में लड़ने वाली महिलाओं की अपने यहां भर्ती की छूट दे दी है. वहां अब तक महिला सैनिक कॉम्बैट रोल में नहीं थीं.

अलाव के पैसे बैठे सैनिक

इमेज स्रोत, Mohamed Madi/BBC

अमरीका के विशेष सुरक्षा दलों ने अपनी ज़बरदस्त प्रतिरोधक क्षमता साबित कर दी है.

लेकिन रैंड इंस्टीट्यूट ने 2014 में अपने अध्ययन में पाया था कि 85 फ़ीसदी लोग स्पेशल ऑपरेशन्स कमांड में महिलाओं को शामिल करने के ख़िलाफ़ थे.

प्रशिक्षण के दौरान बात करती दो महिला सैनिक

इमेज स्रोत, Kevin Ponniah/BBC

लोगों का कहना था कि महिलाएं पुरुषों के साथ पूरी तरह सामंजस्य नहीं बिठा पाएंगी. पुरुषों के साथ काम करने में उन्हें दिक्क़त होगी.

पर पाया गया कि महिला सैनिक पुरुषों के साथ एक ही कमरे में सोने तक को तैयार हो गईं.

अभ्यास करती दो महिला सैनिक

इमेज स्रोत, Norwegian Special Forces

यह भी समझा गया कि महिलाओं की शारीरिक क्षमता पुरुषों से कम होगी, वे पुरुषों का सारा काम नहीं कर सकेंगी. इससे टीम के पूरे प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ेगा.

बाईस साल की वांडरेला पोनी टेल में

इमेज स्रोत, Kevin Ponniah/BBC

नॉर्वे के विशेष दल से प्रशिक्षण पाई महिलाएं फ़िलहाल जॉर्डन में तैनात हैं. वे वहां सीरियाई विद्रोहियों की मदद कर रही हैं.

वे ख़ुद को इस्लामिक स्टेट कहने वाले चरमपंथी संगठन के छापामारों का भी मुक़ाबला कर रही हैं.

अपने हथियार थामी झुकी हुई दो महिला सैनिक

इमेज स्रोत, Kevin Ponniah/BBC

जगरट्रॉपन की महिलाओं को अब तक किसी विशेष अभियान के लिए तैनात नहीं किया गया है.

महिला सैनिक जनिक कहती हैं कि नॉर्वे जैसे शांतिप्रिय देशों में यह सीखना मुश्किल होता है कि उन्हें दूसरों को 'मारने के गुर सीखने' हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)