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जल विवाद पर क्या कहते हैं पाकिस्तानी अख़बार?
- Author, वसीम मुश्ताक़
- पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग
सिंधु जल समझौते के तहत भारत के साथ पाकिस्तान के जल विवाद पर हुई बातचीत में प्रगति को पाकिस्तानी अख़बार सकारात्मक तरीक़े से देख रहे हैं.
बीते सोमवार को भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों के बीच सिंधु जल आयोग की बैठक हुई.
पिछले साल भारत प्रशासित कश्मीर के उरी में सेना के मुख्यालय पर हमले के बाद भारत ने जल विवाद पर दिल्ली में होने वाली बैठक को रद्द कर दिया था.
इस हमले में सेना के 17 जवान मारे गए थे.
सिंधु जल समझौते पर अब 11 से 13 अप्रैल के बीच वॉशिंगटन में सचिव स्तर की बातचीत होगी.
हालांकि सूत्रों ने संकेत दिया है कि भारत उस किसी भी बैठक में हिस्सा नहीं ले सकता 'जो सिंधु जल समझौते के प्रावधानों के ख़िलाफ़ हो.'
इससे वॉशिंगटन बैठक पर आशंका के बादल भी हैं. लेकिन पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर सचिव स्तर की बातचीत शुरू करने के फैसले का स्वागत किया है.
पाकिस्तानी अख़बार सरकार से अपील कर रहे हैं कि वो जल विवाद पर बातचीत के लिए भारत को मनाने करने की कोशिश करे.
कराची के उदारवादी अंग्रेज़ी अख़बार 'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' ने कहा है कि सिंधु जल संधि के भविष्य को लेकर पाकिस्तान की ओर से कूटनीतिक पहल समय की मांग है, क्योंकि यही वो मंच है जिससे कोई 'हल' निकलने की उम्मीद की जा सकती है.
अख़बार ने कहा है कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच जल विवाद, अन्य सभी विवादों पर भारी है.
इस्लामाबाद के मध्यमार्गी और मुक्तबाज़ार के समर्थक अंग्रेज़ी अख़बार 'दि न्यूज़' ने लिखा है कि जैसे जैसे जलवायु परिवर्तन की हकीक़त सामने आ रही है और जल संसाधनों की किल्लत बढ़ती जा रही है, भारत द्वारा 'पानी को हथियार के रूप में' इस्तेमाल करने की संभावना और बढ़ती जाएगी.
अख़बार ने लिखा है कि यही सबसे सही रहेगा कि भारत से उन परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी मांगी जाए, जो पाकिस्तान को आपूर्ति किए जाने वाले पानी पर गंभीर असर डालती हों.
कराची के उर्दू अख़बार 'डेली एक्सप्रेस' के इस्लामाबाद संस्करण ने लिखा है कि ये समय की मांग है कि जल विवाद पर बातचीत जारी रहनी चाहिए और पाकिस्तान अपने हितों का बचाव करे.
इस्लामाबाद से प्रकाशित होने वाले रुढ़िवादी राष्ट्रवादी उर्दू अख़बार 'नवा-ए-वक़्त' ने लिखा है कि पाकिस्तान को ऐसी रणनीति अपनानी चाहिए कि भारत को सचिव स्तर की बातचीत में बाधा डालने का मौका न मिल सके.
उसका कहना है कि बातचीत के मार्फत ही लंबे समय से दोनों देशों के बीच चले आ रहे जल विवाद का समाधान निकलेगा.
इसी तरह इस्लामाबाद से निकलने वाला उर्दू अख़बार पाकिस्तान का कहना है कि पाकिस्तान को जल विवाद पर संयुक्त बातचीत के लिए भारत को मनाने की कोशिश करनी चाहिए.
सिंधु जल समझौते पर 1960 में भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब ख़ान ने दस्तख़त किया था.
बंटवारे के बाद सिंधु घाटी से गुजरने वाली छह नदियों पर नियंत्रण को लेकर उपजे विवाद की मध्यस्थता विश्व बैंक ने की थी.
(बीबीसी मॉनिटरिंग दुनिया भर के टीवी, रेडियो, वेब और प्रिंट माध्यमों में प्रकाशित होने वाली ख़बरों पर रिपोर्टिंग और विश्लेषण करता है. आप बीबीसी मॉनिटरिंग की ख़बरें ट्विटर और फ़ेसबुक पर भी पढ़ सकते हैं.)