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महिला जेल में भेजा गया ट्रांसजेंडर बलात्कारी
लिंग परिवर्तन सर्जरी करा महिला बनने के बाद एक ट्रांसजेंडर बलात्कारी को महिलाओं की जेल में भेजना पड़ा है.
ब्रिटेन के जेसिका विनफील्ड को मार्टिन पोंटिंग के रूप में जाना जाता था, जिन्हें अब महिला जेल में शिफ्ट करना पड़ा है.
दोषी ठहराए गए इस व्यक्ति को पहले कड़ी सुरक्षा के बीच कैंब्रिजशर के वाइटमूर जेल में रखा गया था. उसे आजीवन क़ैद की सज़ा मिली है.
लिंग परिवर्तन के पहले विनफील्ड ने शिकायत की थी कि उसे पुरुष ट्रांससेक्शुअल होने के कारण प्रताड़ित किया जाता है. 10 साल पहले उन्होंने क़ैदियों के अख़बार 'इनसाइट टाइम्स' में लिखा था, ''लैंगिकता के कारण मुझे सताया जाता है. शायद यह कम समझदारी और संवेदनशीलता के अभाव के कारण है.''
तब उन्होंने लिखा था, ''मैंने अपना नाम बदलकर महिला का रख लिया था, जिससे साबित हो सके कि मैं अपने जेंडर को लेकर गंभीर हूं और एक पुरुष के रूप में रहना अच्छा नहीं लगता है.''
हालांकि पोंटिंग की एक पीड़िता का कहना है कि उसे सेक्स बदलने की अनुमति देना एक तरह की क्रूरता है.
उसने सन अख़बार से कहा, ''उसकी शैतानी बताने के लिए शब्द कम पड़ जाएंगे. ये एक तरह की क्रूरता है कि उसे सेक्स बदलने दिया गया और वो साल तक जेल से रिहा हो सकता है. वह शारीरिक रूप से भले बदल गया है पर उसका दिमाग़ अब भी वही है.''
जेल की तरफ़ से कहा गया कि वह व्यक्ति विशेष पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते हैं.
कैंपेन ग्रुप 'वॉइस फोर विक्टिम्स' का कहना है कि यह केस न्यायिक सिस्टम में समानता को लेकर जो असंतुलन है उसे सामने लाता है.
इस ग्रुप ने ट्विटर पर लिखा है, ''बलात्कारी के सेक्स परिवर्तन का खर्च सरकार ने उठाया जबकि बलात्कार पीड़िताएं इलाज में मदद और फिर से मुख्यधारा में शामिल होने के लिए जूझ रही हैं.''
यह कोई पहली बार नहीं है जब एक ट्रांसजेंडर क़ैदी को पुरुषों की जेल से महिला जेल में भेजा गया. जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर जिस शख़्स का जो लिंग होता है, ब्रिटेन में उसी की बुनियाद पर क़ैदियों को महिला या पुरुषों जेल में रखा जाता है.
अगर क़ैदी के पास लिंग पहचान प्रमाण पत्र है तो जेल सेवा को क़ानूनी उस क़ैदी को उचित जेंडर वाली जेल में शिफ़्ट करना पड़ता है.
पुरुषों की जेल में एक ट्रांसजेंडर क़ैदी विकी थॉम्पसन की मौत के बाद पिछले साल नवंबर में सरकार ने इस नीति पर फिर से विचार करने की घोषणा की थी.
1999 में ब्रिटेन के क़ानूनी इतिहास में जॉन पिले पहले क़ैदी थे जिन्हें सेक्स बदलवाने के लिए सर्जरी की अनुमति मिली थी. जॉन ने महिला टैक्स ड्राइवर को अगवा और हत्या करने की कोशिश की थी. इसी मामले में उन्हें उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई थी.
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