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चीन: इस शहर का वायु प्रदूषण आधा हो गया
चीन के शेनज़ेन प्रांत में आठ मंजिली एक इमारत है ग्रीन ऑफ़िस बिल्डिंग.
इस बिल्डिंग की ख़ास बात ये है कि इसका एक तिहाई हिस्सा पूरी तरह से खुला हुआ है, जिसके चलते पक्षी इस इमारत के अंदर भी आ जाते हैं और उड़ते हुए बाहर निकल जाते हैं.
दरअसल इस इमारत को नेचुरल अंदाज़ में इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि इसे ठंडा रखने के लिए एअरकंडीशनर की जरूरत नहीं है.
दरअसल ये इमारत शहर के उस इलाके में स्थित है, जो लो कार्बन पार्क के नाम से मशहूर है. यहां पर कुहासे का छिड़काव किया जाता है, ताकि शहरों की गलियों की धूलकण जम जाएं.
ये एक बानग़ी है, प्रदूषण से निजात पाने के लिए चीन के शहरों में किए गए प्रयोगों की. ऐसे कई प्रयोग चीन के शहरों में अपनाए जा रहे हैं.
ताकि शहरों में फैले धुंध को हटाया जा सके और ऊर्जा संबंधी ज़रूरतों को भी पूरा किया जा सके.
कैसे बदली तस्वीर?
दरअसल दुनिया भर के शहरों की तरह ही, चीन के शहर भी प्रति व्यक्ति ज़्यादा ऊर्जा की खपत करते हैं और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग धंधों का ठिकाना भी है.
ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि शहर की आबोहवा को कैसे बेहतर रखा जाए. चीन की शासन व्यवस्था में शहर स्तर के अधिकारियों की भूमिका बेहद अहम होती है, अर्थव्यवस्था को रफ़्तार देने और इंडस्ट्री विकसित करने की ज़िम्मेदारी भी उन पर होती है.
लेकिन अब चीन की सरकार चाहती है कि वे वायु प्रदूषण से निजात पाने का तरीका निकालें.
ऐसे में चीन के शहरों की हवा में कार्बन की मात्रा को कम करने की कवायद शुरू हुई है. जिन शहरों को सबसे पहले लो कार्बन सिटी बनाया जा रहा है, उनमें शेनज़ेन भी शामिल है.
50 फ़ीसदी तक प्रदूषण कम
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी इसे शहरी विकास का नया कांसेप्ट बता रही है.
इस कार्यक्रम की शुरुआत को हुए करीब एक दशक बीतने को है, लेकिन देश के प्रत्येक शहर की स्थिति में सुधार हुआ हो, ये नहीं कहा जा सकता. कई शहर अभी भी देश के सबसे प्रदूषित इलाके हैं.
लेकिन शेनज़ेन ऐसा शहर है, जिसकी स्थिति बेहतर हुई है. शहर के अधिकारियों के मुताबिक यहां 50 फ़ीसदी तक वायु प्रदूषण कम करने में कामयाबी मिली है.
ऐसा किस तरह से संभव हो पाया है?
शेनज़ेन हांगकांग की सीमा पर बसा शहर है, इसकी आबादी 1.1 करोड़ है. यह देश का तेज़ी से बढ़ता शहर है. यहां दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कंटेनर पोर्ट भी मौजूद है.
इस पोर्ट पर सैकड़ों क्रेन समुद्री जहाजों पर माल को लादते-उतारते हैं. लेकिन यहां पहुंचने पर पता चलता है कि किस तरह छोटे छोटे बदलावों से बड़ा बदलाव संभव है.
उदाहरण के लिए, जब इस बंदरगाह में कोई डीजल ईंधन से चलने वाला जहाज प्रवेश करता है, तो अपने इंजन बंद कर देता है, उसकी जगह उसे बंदरगाह से चलने वाले क्लीन इलेक्ट्रेसिटी केबल के जरिए ऊर्जा मिलने लगती है.
क़ानून का डंडा
इसी तरह से शहर के अंदर इलेक्ट्रिक बसें और टैक्सियां चलाई जा रही हैं, प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग इकाईयों को बंद किया गया है.
लेकिन सबसे प्रभावी क़दम, वायु की गुणवत्ता को लेकर बनाए गए सख़्त क़ानून का बनाया जाना है.
शेनज़ेन के पर्यावरण आयोग के लु जूयांग का कहना है, "क़ानून का उल्लंघन करने वालों को हम कड़ी सजा देते हैं."
औद्योगिक इकाईयों से निकलने वाले प्रदूषण के आंकड़ों की निगरानी होती है. लु जूयांग बताती हैं, "अगर कोई यूनिट लगातार प्रदूषण फैला रही है, तो हम प्रति घंटे उनके उत्सर्जन पर नज़र रखते हैं."
इसके चलते शहर में दो तरह के आंकड़े प्रकाशित होते हैं- उत्सर्जन का स्तर और सामान्य हवा की गुणवत्ता वाला सूचकांक.
आंकड़ों से बदलाव
चीनी थिंक टैंक क्लीन एयर एलायंस के टॉनी जाई के मुताबिक हवा के गुणवत्ता को मापने से लोगों के भरोसे का स्तर बढ़ा है. दूसरे शहरों में भी प्रदूषण फैलाने वाले लोगों के नाम और उनकी सजा को सार्वजनिक करने की मांग होने लगी है.
वैसे विशेषज्ञों की राय ये भी है कि शेनज़ेन में प्रदूषण के स्तर को कम करने में इसलिए मदद मिली है क्योंकि शहर में काम करने का तरीका बदला है, अब लोग इनोवेशन, स्टार्ट अप्स और टेक्नालॉज़ी फर्म में काम करने लगे हैं.
इससे आसपास की स्थिति भी बेहतर हुई है. वहीं दूसरी ओर उत्तरी चीन में अभी भी भारी उद्योग धंधे चलते हैं, वहां जाड़े में धुंध का स्तर काफ़ी बढ़ जाता है. इन इलाकों की हवा को साफ़ करने के लिए कई तरह के प्रयोगों को अपनाने की जरूरत है.
क्लीन एयर एलायंस के टॉनी जाइ के मुताबिक, "विज्ञान की भूमिका अहम हो गई है, अगर आपके पास बेहतर योजना होगी, तभी आपको बेहतर हवा मिलेगी."