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अमरीकी पाकिस्तानियों में ट्रंप के फ़रमान का ख़ौफ़
- Author, ब्रजेश उपाध्याय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, वॉशिंगटन
सात मुसलमान-बहुल देशों से आने वालों पर लगी पाबंदी के बाद से अमरीका में रह रहे पाकिस्तानी मूल के लोगों में भी डर और दहशत का माहौल है.
पाकिस्तान इन देशों की सूची में नहीं है, लेकिन सवालों के जवाब में ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने कहा है कि 90 दिन के बाद ये लिस्ट बढ़ाई भी जा सकती है और मीडिया की बहसों में पाकिस्तान का ज़िक्र अक्सर आता है.
न्यूयॉर्क के लॉन्ग आइलैंड में ट्रैवल एजेंसी चलाने वाले अमान सलमान का कहना है कि डोनल्ड ट्रंप के आदेश के बाद से घबराहट का ये आलम है कि पिछले चार-पांच दिनों में ग्रीन कार्ड पर रह रहे जिन पाकिस्तानियों ने टिकट बुक करा रखे थे, उनमें से 95 फ़ीसद ने उन्हें रद्द करा दिया है.
वो कहते हैं, "इन दिनों सऊदी एयरलाइन उमरा और पाकिस्तान का पैकेज डील सिर्फ़ 895 डॉलर में दे रही है, लेकिन कोई खरीदार नहीं आ रहा है."
जो लोग पाकिस्तान गए हुए हैं वो अपनी वापसी की टिकट की तारीख़ जल्द से जल्द करवा रहे हैं कि कहीं उनके रहते-रहते पाकिस्तान का इस लिस्ट में नाम न आ जाए.
एक ग्राहक का ज़िक्र करते हुए सलमान का कहना था कि उनकी मां पाकिस्तान में बेहद बीमार हैं और उनकी पत्नी और बच्ची उनके साथ यहां अमरीका में रहती हैं.
सलमान कहते हैं, "मुझसे बात करते-करते वो रो पड़े और कहा कि अगर मैं नहीं गया और मेरी वालिदा को कुछ हो गया तो ज़िंदगी भर ख़ुद को माफ़ नहीं कर पाऊंगा. और जाकर अगर वहां फंस गया तो मेरी बीवी और बच्ची को यहां कौन देखेगा."
कहते हैं कि कुछ दिनों पहले तक वो दिन में 15-16 टिकट जारी करते थे, लेकिन इन दिनों मुश्किल से एक या दो जारी करते हैं और वो भी उन्हीं के जो यहां के नागरिक बन चुके हैं.
ग्यारह सितंबर के हमलों के बाद सरकारी कहर झेल चुके पाकिस्तानी मूल के बहुत से लोगों को डर है कि एक बार फिर से वैसे ही हालात पैदा होने वाले हैं.
न्यूयॉर्क के लिटिल पाकिस्तान कहलाने वाले इलाके में टैक्स कंसल्टेंट का काम करने वाली बाज़ा रूही कहती हैं कि इन दिनों उनके ऑफ़िस में आने वाले लोग हर वक्त यही बात करते हैं कि हालात ग्यारह सितंबर के बाद से भी बदतर होने वाले हैं.
वो कहती हैं, "एक साहब को मैं जानती हूं जिनकी बेटियां यहां पैदा हुई हैं. बरसों से यहां के सिटिज़न हैं, लेकिन उन्होंने अपना मकान बेचने का फ़ैसला कर लिया है कि ज़रूरत पड़ने पर पाकिस्तान लौट सकें."
अफ़वाहों का बाज़ार भी ख़ासा गर्म है. कोई कह रहा है कि 329 पाकिस्तानियों को एयरपोर्ट पर रोक कर वापस पाकिस्तान भेज दिया गया है तो कोई न्यू जर्सी में पाकिस्तानी दुकानों पर छापों की बात कर रहा है और इन सबसे दहशत और बढ़ रही है.
वर्जीनिया में मुसलमान समुदाय के साथ काम करने वाले ज़ुल्फ़िकार काज़मी कहते हैं कि उनके एक क़रीबी जानने वाले ज़ियारत के लिए इराक़ जा रहे थे लेकिन उन्होंने अपना टिकट रद्द करवा लिया है.
काज़मी कहते हैं, " ये पाबंदी तो 90 दिनों के लिए है, लेकिन उस दौरान किस तरह के फ़ैसले लिए जाएंगे इस बात को लेकर ख़ासी चिंता है."
दस्तावेज़ों को देखा जाए तो लोगों की चिंता बिल्कुल ही बेबुनियाद भी नहीं दिखती.
आप्रवासन मामलों के वकील भी सलाह दे रहे हैं कि जो लोग ग्रीन कार्ड या किसी और वीज़ा पर भी हों वो अमरीका से बाहर न जाएं और जो बाहर हैं वो जल्द से जल्द लौटें.
उसकी वजह है कि एक तरफ़ जहां सात देशों से आने वाले लोगों पर पाबंदी की बात है, वहीं ये भी कहा गया है कि जहां आतंकवाद का काफ़ी असर है वहां से आने वालों की 'गहन जांच' की जाएगी. पाकिस्तान की गिनती ऐसे देशों में अक्सर की जाती है.
ख़ासतौर से कैलिफ़ोर्निया के सैन बर्नाडिनो में हुए हमले में कथित रूप से शामिल पाकिस्तानी दंपत्ति का ज़िक्र बार-बार होता है. उनमें से एक यहां का नागरिक था और पत्नी स्पाउज़ वीज़ा पर यहां आई थीं.
पिछले चार-पांच दिनों में जो लोग पाकिस्तान से यहां आए हैं उनकी कोई बड़ी शिकायत या परेशानी सामने नहीं आई है.
लेकिन वकीलों का कहना है कि संभव है कि 'गहन जांच' के तहत दूतावासों को ये आदेश जारी कर दिए जाएँ कि पाकिस्तान से आने वालों के वीज़ा में सख्त कटौती की जाए.
पाकिस्तान से कुछ लोग यहां शरणार्थी के तौर पर भी आते हैं, लेकिन उस पर भी 120 दिनों तक की रोक ये कहकर लगा दी गई है कि उस दौरान ये ''तय किया जाएगा कि शरणार्थियों को जगह देने से पहले इस बात की पूरी तरह से कैसे जांच हो कि ये लोग अमरीका के लिए ख़तरनाक नहीं साबित होंगे."