दुआ करता हूं कि ट्रंप पाकिस्तानियों को वीजा न दें: इमरान खान

इमरान खान

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    • Author, अखिल रंजन
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग

अमरीका में कुछ मुस्लिम बहुल देशों के लोगों के दाखिल होने से रोकने वाले राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के फरमान पर दुनिया भर में तीखी प्रतिक्रिया हुई है. लेकिन पाकिस्तान की तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के नेता और इमरान खान की राय औरों से काफी अलग है.

उन्होंने कहा, "मैं दुआ करता हूं कि ट्रंप पाकिस्तानियों को वीजा देना बंद कर दें क्योंकि इसके बाद ही हम अपने देश की मुश्किलों को ठीक करने की कोशिश करेंगे."

पाकिस्तानी मीडिया में भी अमरीकी राष्ट्रपति के कार्यकारी आदेश को लेकर खूब चर्चा है. अमरीका ने ईरान, इराक, सीरिया, लीबिया, सूडान, सोमालिया और यमन के लोगों पर अपने यहां दाखिल होने से 120 दिनों के लिए रोक लगा दी है.

डोनल्ड ट्रंप, वीजा बैन

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पाकिस्तानी मीडिया में इस बात को लेकर आशंका जाहिर की जा रही है कि वीज़ा रोक के दायरे में उनके मुल्क को भी लाया जा सकता है.

अंग्रेजी अखबार 'डेली टाइम्स' ने सुर्खी लगाई है, "मुस्लिम जगत को झटका, ट्रंप के वीजा बैन पर गुस्सा फूटा."

कराची से निकलने वाले अखबार 'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की हेडलाइन है, "अमरीका का इशारा, पाकिस्तान पर भी लग सकता है वीजा बैन."

उदारवादी माने जाने वाले इस अखबार ने व्हाइट हाउस के चीफ ऑफ स्टाफ राइंस प्रीबस के हवाले से कहा है कि अस्थाई पाबंदी की सूची में शामिल देशों की तरह और भी कई देश हो सकते हैं जिनके यहाँ ऐसी ही समस्याएँ हैं- जैसे पाकिस्तान या दूसरे देश जहां इस पाबंदी को और सख्त किया जाए.

वीडियो कैप्शन, बदल रहा है अमरीका

लाहौर से निकलने वाले पाकिस्तानी अखबार 'पाकिस्तान टुडे' ने अपने संपादकीय में लिखा है, "इस्लामाबाद देर सवेर इसके दायरे में आएगा ही. रिपब्लिकंस के हालिया संकेतों को देखें तो बदले हालात में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में साथ देने की सूरत खत्म होती हुई दिख रही है."

इस बीच पंजाब में एक पार्टी रैली में इमरान खान ने ईरान के जैसे को तैसा वाले जवाब की तारीफ की. ईरान ने अमरीकी प्रतिबंध के हटाए जाने तक उसके नागरिकों के भी अपने यहां आने पर रोक लगा दी है.

इस्लामाबाद से निकलने वाले उर्दू अखबार 'जिन्ना' ने अमरीका की इस फैसले के लिए मुखालफत की है.

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उसने लिखा है, "पिछली अमरीकी सरकार ने मानवाधिकारों के संरक्षण का भरोसा दिलाया था. अमरीकी फौज अल-कायदा और तालिबान के खिलाफ अफगानिस्तान में लड़ी, लेकिन व्हाइट हाउस ने अफगान नागरिकों के अमरीका में दाखिल होने पर कोई रोक नहीं लगाई. ओसामा बिन लादेन ऐबटाबाद में मारा गया, लेकिन तब अमरीका ने पाकिस्तानी नागरिकों पर ऐसी कोई रोक नहीं लगाई. कर्नल गद्दाफी की सरकार को लीबिया में उखाड़ फेंका गया, लेकिन लीबीयाई लोगों पर ऐसी कोई पाबंदी नहीं लगी. लेकिन डोनल्ड ट्रंप हर वो काम करने के लिए तैयार हैं जिसके बारे में अमरीकी प्रशासन ने सोचा तक नहीं था. नए अमरीकी प्रशासन के सामने ट्रंप के रूप में सबसे बड़ी चुनौती है."

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