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ट्रंप: गर्भपात क़ानून पर हस्ताक्षर, एक भी महिला मौजूद नहीं
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने एक विशेष गर्भपात क़ानून को फिर से लागू कर दिया है.
नए राष्ट्रपति के रूप में कार्यालय के पहले दिन सोमवार को उन्होंने क़ानून पर दस्तखत किए.
ट्रंप का ये आदेश वॉशिंगटन में ट्रंप के खिलाफ हुए महिलाओं के विरोध प्रदर्शन के दो दिन बाद आया है.
अमरीका में गर्भपात पर पाबंदी पर एक बार फिर से चर्चा छिड़ गई है.
यह विशेष गर्भपात क़ानून कहता है कि गर्भपात करवाने में मदद करने या इसके बारे में जानकारी देने वाले अंतरराष्ट्रीय संगठनों को अमरीका की सरकारी एजेंसियों की ओर से अनुदान नहीं मिलेगा.
क़ानून पर दस्तखत करती ट्रंप और उनके सहयोगियों की तस्वीर और टैगलाइन सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.
ट्विटर पर इस तस्वीर को "महिला देह के बारे में फैसला करते पुरुष" के साथ हज़ारों बार शेयर किया गया.
सोशल मीडिया पर लोग चिंता जता रहे हैं कि महिलाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण इस क़ानून पर मुहर लगाते वक्त वहाँ एक भी महिला मौजूद नहीं थी.
जहाँ कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर गर्भापत पर ट्रंप की इस पहल का स्वागत किया है , वहीं कुछ लोग इसके असर को लेकर चिंता जता रहे हैं.
लेकिन इसके बारे में जो तस्वीरें और बातें वायरल हो रही हैं वे पूरी हकीकत नहीं बताते. तो चलिए इस पूरे मसले को समझते हैं कि ट्रंप के इस आदेश का आखिर मतलब क्या है.
अमरीका में गर्भपात
कहीं ये अमरीका में गर्भपात पर पाबंदी लगाने की ओर बढ़ा एक कदम तो नहीं है?
ऐसा नहीं है, क्योंकि इस क़ानून का अमरीका से फिलहाल कोई लेना-देना नहीं है.
क़ानून कहता है कि सरकार से अनुदान पाने वाली ग़ैरसरकारी एजेंसियों को ये बात माननी होगी कि " वो ना तो गर्भपात को बढ़ावा देंगे और न ही दूसरे देशों में परिवार नियोजन के लिए इस प्रकिया को बढ़ावा देंगे."
हां, इससे विकासशील देशों में, महिला अधिकारों के लिए अभियान चलाने वाले, संगठनों को खासी चिंता में डाल दिया है, क्योंकि यहाँ अनुदान और संसाधन पहले से ही कम हैं.
भले ही ये नीति अमरीका को सीधे तौर पर प्रभावित नहीं करती, लेकिन ट्रंप अमरीका में भी गर्भपात पर पाबंदी लगाने के पक्ष में हैं.
रोक लगाने वाले ट्रंप पहले नहीं हैं
लेकिन गर्भपात से जु़ड़े विदेशी अनुदानों पर रोक लगाने की शुरुआत करने वाले डोनल्ड ट्रंप पहले व्यक्ति नहीं हैं.
गर्भपात पर रिपब्लिकन और डेमोक्रेट के बीच दशकों से रस्साकशी जारी है.
मेक्सिको सिटी क़ानून को सबसे पहले रिपब्लिकन राष्ट्रपति रोनल्ड रीगन 1984 में लेकर आए थे. तब गर्भपात करने और इसके बारे में जानकारी उपलब्ध करवाने वाले अंतरराष्ट्रीय समूहों को मिलने वाले अनुदान पर रोक लगा दी गई थी.
लेकिन बाद में डेमोक्रेट बिल क्लिंटन प्रशासन ने 2001 और बराक ओबामा प्रशासन ने 2009 में इस क़ानून को स्थगित कर दिया था.
और अब यह फिर से वापस आ गया.
कानून का नाम मेक्सिको सिटी कानून
इस विशेष कानून का नाम मेक्सिको सिटी क़ानून है. ये नाम इसलिए पड़ा क्योंकि राष्ट्रपति रीगन ने इसे सबसे पहले मेक्सिको सिटी में हुए संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या सम्मेलन में लागू किया था.
दुनिया भर के संगठनों ने इस क़ानून की ये कहते हुए आलोचना की है कि महिलाओं को परिवार नियोजन पर सलाह देने में अब दिक्कत आती हैं.
यदि वे नियम का उल्लंघन करते हैं तो उन्हें अनुदान के पैसों से हाथ धोना पड़ेगा. यही नहीं कुछ खास परियोजनाएं भी खटाई में पड़ जाएंगी.
हालांकि प्रो-लाइफ समूहों ने ट्रंप सरकार के इस कदम की सराहना की है.
अमरीका के प्रो-लाइफ संगठन सूसन एंथोनी लिस्ट के अध्यक्ष कहते हैं, "राष्ट्रपति ट्रंप के इस फैसले से इंसान के जीवन के प्रति सम्मान बढ़ेगा. "
केवल पुरुषों का फैसला?
गर्भपात से जुड़े मेक्सिको सिटी क़ानून पर जब डोनल्ड ट्रंप ने दस्तख़त किए तो वहां एक भी महिला मौजूद नहीं थी.
तो क्या हस्ताक्षर वाली जगह पर इतने सारे पुरुषों का होना असामान्य है?
ऐसा नहीं है. दूसरे सरकारी आदेशों की ही तरह गर्भपात के नियम भी पुरुष अधिकारियों की ओर से तय किए जाते हैं.
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने तर्क दिया कि 1973 में रो वी वेडे ने भी एक अहम फैसला दिया था. और फैसले देने वाले में सारे पुरुष ही थे.
रो वी वेडे के फैसले में कहा गया था कि जब तक एक भ्रूण में संभावना बाकी है, खासकर 22 और 24 हफ्तों के बीच, गर्भपात गैरकानूनी है.
गर्भपात पर ट्रंप की सोच
नए राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की पहले गर्भपात के बारे में अलग ही राय रही है. 1999 में वे इसके विरोध में नहीं थे.
हालांकि उनका ये भी कहना है कि वे बलात्कार या गलत संबंध जैसे हालात में गर्भ के मामलों सहित कुछ अपवादों पर छूट रहेगी.
राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने कहा था कि यदि गर्भपात को अपराध घोषित कर दिया जाए तो जो महिलाएं गर्भपात कराती हैं उन्हें 'सज़ा दी जानी चाहिए'.