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हिमालय की ऊंचाई नापने पर भारत से करार नहीं - नेपाल
भारतीय सरकार ने कहा है कि वे हिमालय पर्वत की ऊंचाई दूसरी बार नापने की योजना बना रही है जिससे ये पता चल सके कि 2015 में नेपाल में आए भूकंप की वजह से इसकी ऊंचाई में कहीं कोई बदलाव तो नहीं हुआ.
सर्वेक्षण जनरल स्वर्ण सुब्बा राव ने कहा कि दो महीनों के भीतर दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ के लिए एक अभियान भेजा जाएगा.
हालांकि नेपाल के अधिकारियों ने बीबीसी को बताया कि किसी भारतीय दल को आने की अनुमति देने पर कोई समझौता नहीं हो पाया है.
उपग्रह से मिली जानकारियों से संकेत मिले हैं कि भकूंप के प्रभाव से पर्वत की ऊंचाई कम हुई है.
नेपाल और चीन की सीमा पर स्थित हिमालय की सबसे ज़्यादा मान्यता प्राप्त ऊंचाई 8,848 मीटर (29,028 फीट) है जिसे 62 साल पहले किए गए एक भारतीय सर्वे में नापा गया था.
वैज्ञानिकों का कहना है कि नेपाल में आए 7.8 तीव्रता के भूकंप के कुछ समय बाद हिमालय की एक घाटी (पट्टी) की ऊंचाई करीब एक मीटर तक कम हुई.
साथ ही उन्होंने कहा है कि ये तय करने के लिए कि दुनिया की सबसे ऊंची चोटी में कुछ सेंटीमीटर का बदलाव हुआ है या नहीं एक ज़मीनी सर्वेक्षण और जीपीएस या कोई हवाई सर्वेक्षण की ज़रूरत पड़ेगी.
राव ने बीबीसी से कहा कि भारत की केंद्रीय मानचित्रण एजेंसी, सर्वे ऑफ इंडिया, नेपाल सरकार के साथ काम करेगी, जो ऊंचाई नापने की कोशिशो में "सहयोग के लिए सैद्धांतिक तौर पर सहमत हो गई है."
लेकिन नेपाल के सर्वे विभाग के उप-प्रमुख गणेश भट्टा ने बाद में बीबीसी को बताया कि भारत के साथ कोई करार नहीं हुआ है और दरअसल नेपाल अपने ख़ुद के सर्वे करने की योजना बना रहा है.
हिमालय की वास्तविक ऊंचाई को नापने के लिए जीपीएस और त्रिकोणों को नापने की विधि को एक साथ मिलाकर अपनाने की ज़रूरत है.
राव ने कहा कि यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि भूकंप ने हिमालय की ऊंचाई को प्रभावित किया है या नहीं.
उन्होंने कहा, "हमें नहीं मालूम कि क्या हुआ है, इस बारे में कोई पुष्ट रिपोर्ट नहीं. कुछ वैज्ञानिकों का मानना है कि ये सिकुड़ा है. लेकिन एक ऐसी भी सोच है जिसके मुताबिक इसकी ऊंचाई शायद बढ़ गई हो."
भट्टा ने भारतीय समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि 30 सदस्यों की एक मज़बूत टीम को अपनी टिप्पणी के लिए क़रीब एक महीने का वक़्त लगेगा और इसकी गणना और जानकारियों के एलान के लिए अगले 15 दिनों का समय चाहिए.
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