You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
रूसी योग शिक्षक के ख़िलाफ़ मामला ख़त्म
रूस की एक अदालत ने योग शिक्षक दिमित्री ऊगाय के ख़िलाफ़ कोर्ट में चल रही सुनवाई को रोक दिया है.
उन पर ग़ैर क़ानूनी तरीके से मिशनरी चलाने और लोगों का धर्म बदलवाने का आरोप लगाया गया था. योग पर लेक्चर देने के कारण ऊगाय को गिरफ्तार किया गया था.
रूस के सेंट पीटर्सबर्ग शहर की एक अदालत में उनके खिलाफ़ 'व्रोवाया क़ानून' के तहत मुक़दमा चल रहा था.
इस मामले की जांच कई महीनों से चल रही थी और इसे लेकर आम लोग भी परेशान हो रहे थे.
यह पहला मौक़ा है जब रूस की दंड संहिता में "आतंकवाद निरोधी संशोधनों" के तहत हुए बदलाव के बाद किसी के ख़िलाफ़ मुक़दमा दर्ज किया गया. रूसी संसद की सदस्य इरीना व्रोवाया और विक्टर ओज़रव ने ये संशोधन पेश किए थे जिके बाद व्रोवाया कानून बना था.
मामले की शुरुआत बीते साल 22 अक्टूबर को हुई, जब ऊगाय सेंट पीटर्सबर्ग में भारतीय संस्कृति पर आयोजित एक समारोह में 'वैदिक जीवन' पर बोल रहे थे.
शिकायत मिलने पर पुलिस ने कार्रवाई की, ऊगाय को भाषण देने से रोक दिया और उनके ख़िलाफ़ आरोप लगाए. उन पर 830 डॉलर तक का ज़ुर्माना लगाया जा सकता था.
ऊगाय का कहना था कि उनका भाषण किसी तरह का मिशनरी काम नहीं था. यह योग की बुनियादी बातों के बारे में था.
कोर्ट में मामला रोक दिए जाने के बाद ऊगाय ने कहा, "मैं भाषण देता रहूंगा, यह मेरे मत के ख़िलाफ़ नहीं है. मेरे अधिकारों की पड़ताल हुई और यह साफ़ हो गया कि अंत में जीत प्रकाश की ही होती है."
व्रोवाया संशोधनों के पारित होने के बाद मिशनरी काम में "सार्वजनिक धार्मिक सेवा, धार्मिक रीति रिवाज और अनुष्ठान, प्रवचन गतिविधियों, प्रार्थना सभा और धार्मिक बैठक" आयोजित करने को शामिल कर लिया गया.
इसके साथ ही सार्वजनिक जीवन को प्रभावित करने, चरमपंथी अपील और किसी के पारिवारिक जीवन को प्रभावित करने पर भी रोक लगा दिया गया.
धार्मिक संगठनों और दूसरे लोगों ने इन संशोधनों की यह कह कर आलोचना की कि इन्हें पेश करने के पहले आम जनता से राय मशविरा नहीं किया गया था.