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खतने के डर से स्कूल में ही हैं लड़कियां
कीनिया की सैकड़ों लड़कियां क्रिसमस की तैयारी घर पर नहीं, बल्कि स्कूलों में रहकर कर रही हैं. इन्हें डर है कि इनके माता-पिता कहीं जबरन इनका खतना न करा दें.
छुट्टियों के कारण स्कूलों को एक महीना पहले बंद हो जाना चाहिए था, लेकिन इन लड़कियों के लिए स्कूल अब भी खुले हुए हैं. इसके साथ ही अन्य लड़कियां चर्चों में रह रही हैं.
14 साल की एलिस ने बीबीसी को बताया कि आर्थिक और सांस्कृतिक वजहों से ज़्यादातर माता-पिता इस परंपरा (खतना किए जाने के) के समर्थक हैं.
एलिस का कहना है, ''मेरे माता-पिता दहेज की वजह से जबरन खतना कराना चाहते हैं. जब लड़कियों का खतना किया जाता है, तो यह माना जाता है कि अब उनकी शादी कर दी जाएगी. क्योंकि खतना होने के बाद माता-पिता अपनी बेटियों को पेश कर देते हैं. फिर उनके परिवार वालों को दहेज में गाय मिलती हैं.''
2011 खतना को ग़ैरक़ानूनी बनाया जा चुका है. इसके साथ ही दोषियों पर भारी जुर्माना भी लगाया जाता है, लेकिन यह परंपरा अब भी थमी नहीं है.
कीनिया के कई हिस्सों में लड़कियों का खतना अब भी हो रहा है. दिसंबर की छुट्टियां यहां की लड़कियों के लिए किसी शामत से कम नहीं होती हैं.
इसी महीने में लड़के और लड़कियों का खतना किया जाता है.
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स्कूलों के हेडमास्टरों को लड़कियों को स्कूलों में रखने की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है.
इन्हें साल खत्म होने तक स्कूलों में रहने देने का निर्देश दिया गया है. ऐसा कम उम्र में शादी और खतने को रोकने के लिए किया गया है.
कीनिया सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़, यहां 15 से 49 साल के बीच की पांच में से हर एक महिला का खतना हुआ है. कुछ ऐसी ही निराशाजनक स्थिति यहां की बच्चियों के साथ भी है.
कीनिया में ब्यूरो ऑफ स्टैटिस्टिक्स की रिपोर्ट के मुताबिक़, 20 साल से पहले जिन लड़कियों का खतना हुआ, उनमें से एक तिहाई वैसी लड़कियां हैं जिनके साथ ऐसा 5 से 9 साल की उम्र में ही हो गया.
सेंट कैथरीन गर्ल्स स्कूल की स्टूडेंट्स खतने के खिलाफ मुहिम में शामिल हैं. ये गीत गाते हुए अपने माता-पिता से आग्रह कर रही हैं खतना से बचाएं और उन्हें अपनी ज़िंदगी जीने की आजादी दें.
मैरी जेपकोमोई अगले साल सेकंडरी स्कूल जॉइन करने की तैयारी कर रही हैं. उन्होंने बताया कि हाल में जिन लोगों का खतना हुआ उन सबकी शादी कर दी गई.
उन्होंने कहा, ''आपको इन पर दया आनी चाहिए. ये बच्चे हैं. जब आप उनसे पूछेंगे कि क्यों तो वे जवाब देंगे- मैं क्या करूं? इन्हें मदद की ज़रूरत है. मैंने खतने से बच गई.'' जो लड़कियां डर से घर छोड़कर भाग गई हैं, उनका स्थानीय लोग समर्थन कर रहे हैं.
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