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अफ़गान तालिबान नए चीफ़ के पाक कनेक्शन पर ख़ामोश
- Author, ख़ुदा-ए-नूर नासिर
- पदनाम, बीबीसी अफ़गान सेवा
"अफ़गानिस्तान चरमपंथियों का कब्रिस्तान है. यह क्षेत्र आत्मसम्मान, बहादुरी और गौरवशाली इतिहास की बुलंद मिसाल है. यह ऐतिहासिक हस्तियों की रिहाइश है जहां जिहाद करने, शहीद होने और कुर्बानी देने की शिक्षा दी जाती है."
यह किसी आम अफ़गान के अलफाज़ नहीं हैं, बल्कि अफ़गान तालिबान के ही हैं जिन्होंने लगभग छह महीने बाद अपने नए प्रमुख मुल्ला हेपतुल्ला अखवंदजादा का प्रोफ़ाइल पांच भाषाओं में प्रकाशित किया है और पहले ही पैराग्राफ में ऊपर लिखे शब्दों में अफ़गानिस्तान की ऐसी तस्वीर दुनिया के सामने रखने की कोशिश की है.
वीडियो: अफ़गान तालिबान ने चुना नया नेता
तालिबान के अनुसार उनके प्रमुख मुल्ला हपतुल्ला मौलवी मोहम्मद खान के बेटे हैं और मौलवी खुदा-ए-रहीम के नाती हैं. उनका जन्म 1967 में कंधार प्रांत में हुआ था.
प्रोफ़ाइल में उनकी रोजमर्रा की जिंदगी की खूबियों का बखान करते हुए कहा गया है कि "मुल्ला हेपतुल्ला किसी भी बैठक में अक्सर खामोश रहते हैं, लेकिन जरूरत पड़ने पर कम लफ्जों में असरदार बात करते हैं."
वीडियो- अफग़ान तालिबान के लिए अहम समय
तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहउल्लाह मुजाहिद की ओर से जारी किए गए प्रोफ़ाइल में इसका जिक्र है कि नए प्रमुख पिछले दस सालों से कुरान और हदीस पढ़ा रहे हैं.
लेकिन इस प्रोफ़ाइल में पाकिस्तान के क्वेटा में मौजूद कचलाक मदरसे का कोई जिक्र नहीं है, जहां मुल्ला हेपतुल्ला एक अर्से से मौलवी थे.
तालिबान के सूत्रों से बीबीसी को पता चला है कि जब मुल्ला हेपतुल्ला को तालिबान के दूसरे प्रमुख मुल्ला अख्तर मंसूर का डिप्टी चुना गया था तो बहुत सारे लोगों ने उन्हें इसी मदरसे में ही बधाई दी थी.
सूत्रों के अनुसार मुल्ला हेपतुल्ला तब तक इसी मदरसे में थे.
मई 2016 में उनके तत्कालीन चीफ़ मुल्ला अख्तर मंसूर की हत्या हो गई थी और उनकी जगह मुल्ला हेपतुल्ला को उत्तराधिकारी नियुक्त किया गया.
इसके बाद वह कचलाक का मदरसा छोड़कर अज्ञात स्थान पर चले गए थे.
अलबत्ता प्रोफ़ाइल में यह बताया गया है कि सन 80 के दशक में अफगानिस्तान में हिंसा के बाद मुल्ला हेपतुल्ला के परिवार ने बलूचिस्तान में शरण ली थी.
अंतरराष्ट्रीय जगत एक अर्से से पाकिस्तान पर यह आरोप लगाता रहा है कि पाकिस्तान ने अफ़गान तालिबान को क्वेटा, पेशावर और कबायली इलाकों में पनाह दे रखी है.
इस इल्ज़ाम ने उस वक्त ज़ोर पकड़ा जब 19 मई 2016 को बलूचिस्तान में एक अमीरीकी ड्रोन हमले में तत्कालीन तालिबान प्रमुख मुल्ला अख्तर मंसूर मारे गए.
हालांकि पाकिस्तान और तालिबान दोनों ही अफ़ग़ान तालिबान की वहां मौजूदगी के आरोपों को खारिज करते आए हैं.
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