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बाप-चचा को कभी माफ़ कर पाएगी ताहिरा?
- Author, सबा एतजाज़
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, कराची
ताहिरा शाह अपनी ससुराल की किचन में बर्तन धो रही हैं. जेठानी के साथ उनकी गपशप चल रही है.
नए घर में उन्हें ससुराल का प्यार और बहू की इज्ज़त तो मिलती है लेकिन उनकी वैवाहिक ज़िंदगी अधूरी है क्योंकि उनके शौहर कामरान लाड़क अब इस दुनिया में नहीं हैं.
कामरान और ताहिरा का घर आमने सामने ही था. लेकिन दोनों परिवारों की हैसियत में ज़मीन आसमान का अंतर है.
ताहिरा का परिवार आर्थिक रूप से काफ़ी संपन्न है जबकि कामरान के घर वाले एक छोटी से दुकान के सहारे गुजर बसर करते हैं.
लेकिन ताहिर और कामरान के बीच प्यार हो गया. इसके बाद दोनों ने अपनी मर्ज़ी से शादी भी कर ली.
इसके बाद वही हुआ जो सिंध में इन दिनों ख़ूब देखने को मिल रहा है. ताहिरा के परिवार वालों को लगा कि उनकी तो समाज में इज़्जत नहीं रही. इसके बाद ताहिरा के घर वालों ने कामरान और ताहिरा को बंदूक की नोक पर ज़हर पिला दिया.
ताहिरा ने बताया, "कामरान मेरे सामने गिरकर तड़पने लगे. मुझे मालूम हो गया कि बस अब वह ख़त्म है और इसके साथ मैं भी ख़त्म."
हालांकि पुलिस मौक़े पर पहुंच गई, ताहिरा और कामरान को अस्पताल पहुंचाया गया. ताहिरा बच गईं लेकिन कामरान को बचाया नहीं जा सका.
ताहिरा कहती हैं, "काश हम दोनों बच जाते तो शायद मैं अपने घर वालों को माफ़ कर देती. लेकिन मैं कैसे भूल जाऊं कि कामरान को सिर्फ़ इसलिए मार दिया गया क्योंकि वह उस घर की बेटी से प्यार करता था. क्या दोष था उसका?"
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ताहिरा अब कभी अपने घर नहीं जा सकतीं. उनकी ज़ान को ख़तरा है. लेकिन वह अपने ससुराल में रह रही हैं, और सामने उसका अपना घर है जहां उसके पति की हत्या हुई.
कामरान के पिता के अनुसार उनपर आरोपियों के ख़िलाफ़ मुकदमा वापस लेने का जबर्दस्त दबाव है. कामरान की मां का दर्द उनकी सिसकियों से ज़ाहिर होता है.
उनकी 16 साल की बेटी आयशा सहमी सहमी नज़रों ने खिड़की से बाहर उस आलीशान घर को बार बार देख रही है, जहां से उनके भाई वापस नहीं लौटे.
कामरान के पिता ग़ुलाम रसूल लाड़क के बाल सफ़ेद हो चुके हैं, पर आंखें ग़म और ग़ुस्से से लाल हैं. बात करने के दौरान वे अपनी भावनाओं पर काबू पाने की कोशिश करते रहे.
वे बताते हैं, "हम भी बच्चों के साथ गए थे, ताकि कुछ सुलह सफ़ाई करवा सकें. लेकिन उन ज़ालिमों ने हमारी एक न सुनी. बेटा और बहू मेरे सामने तड़पते रहे और मैं उनकी बंदूक के सामने बेबस था."
ग़ुलाम रसूल आगे बताते हैं, "उन्होंने ये भी कहा कि तुम्हारे घर पर बुलडोज़र चलवा देंगे. घर की औरतों को उठा लेंगे. समाज के बड़े बड़े वाले लोग हमारे पास आ रहे हैं और कह रहें कि हमें माफ़ कर दो. वे ताक़तवर लोग हैं लेकिन हमें अल्लाह पर भरोसा है और तो हमारे पास कुछ नहीं है."
पुलिस ने ख़बर मिलते ही छापा मारा और ताहिरा के पिता और चाचाओं को गिरफ़्तार कर लिया. लेकिन मामला अभी तक उससे आगे नहीं बढ़ा है.
सिंध में ऑनर किलिंग के मामले लगातार बढ़ रहे हैं.
हालाकि ये ख़ानदान की इज़्जत बचाने के नाम पर किए जाते हैं लेकिन समाजिक विश्लेषकों के मुताबिक़ ऑनर किलिंग की आड़ में संपत्ति और सामुदायिक विवाद भी निपटाए जा रहे हैं.
ख़ैरपुर के एक पुलिस अधिकारी ने बताया, "ऐसे मामलों में सामाजिक दबाव भी होता है. हमें न्याय प्रक्रिया को मज़बूत करने की ज़रूरत है."
उन्होंने ये भी बताया कि ऑनर किलिंग के ख़िलाफ़ क़ानून तो बन चुके हैं लेकिन उसे लागू करने की ज़रूरत है.
ख़ैरपुर में कामरान लाड़क की हत्या की जगह से कुछ ही दूर पर उनकी क़ब्र है. कामरान के बूढ़े पिता जो बड़ी हिम्मत से हमें इंटरव्यू दे रहे थे, क़ब्र के पास पहुंचने पर ज़ार-ज़ार रोने लगे.
उनके बुढ़ापे का सहारा ऑनर किलिंग की भेंट चढ़ चुका है.
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