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आख़िर डोनल्ड ट्रंप की जीत से किनकी नींद उड़नी चाहिए?
अमरीकी जनता ने डोनल्ड ट्रंप को संयुक्त राज्य अमरीका का 45वां राष्ट्रपति चुना है. इस चुनावी नतीजे से बहुतों में खुशी हैं, तो दूसरी तरफ लाखों लोगों में बेचैनी भी.
ऐसे में डोनल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने से कौन जीता हुआ महसूस कर रहा है और कौन हारा हुआ? आइये इसे समझते हैं.
अरबपति बिज़नेसमैन डोनल्ड ट्रंप को चुनाव जीतने से पहले उनके भाषणों के जरिए समझा जा सकता है. डोनल्ड ट्रंप ने उपराष्ट्रपति के लिए इंडियाना के गवर्नर माइक पेंस को चुना है. माइक अपने दक्षिणपंथी विचारों के लिए जाने जाते हैं. ऐसे में अमरीका की कमान ट्रंप के हाथों में आने से किसकी परेशानी बढ़ने वाली है?
महिला की भूमिका और उनके मुद्दे
अमरीका के चुनावी इतिहास में 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में जेंडर की जितनी बड़ी भूमिका रही उतनी कभी देखने को नहीं मिली. डेमोक्रेट नेता हिलेरी क्लिंटन ने जेंडर से जुड़े मुद्दों को ज़ोर-शोर से उठाया भी.
हिलेरी ने ट्रंप की महिलाओं के साथ समस्या को जमकर उठाया. इस मुद्दे के सहारे उन्होंने महिलाओं को गोलबंद करने की कोशिश भी खूब की. हिलेरी ने कहा कि ट्रंप महिलाओं को नीचा दिखाते हैं और उनका अपमान करते हैं.
हालांकि आंकड़ें देखने के बाद पता चलता है कि हिलेरी की यह कोशिश औंधे मुंह गिरी.
एग्जिट पोल के मुताबिक़ 42 फ़ीसदी महिलाओं ने ट्रंप को वोट किया. 53 फ़ीसदी गोरी महिलाओं ने ट्रंप के पक्ष में मतदान किया. लेकिन काली महिलाओं ने बुरी तरह से ट्रंप और पेंस की जोड़ी को खारिज किया. महज चार फ़ीसद काली महिलाओं ने ट्रंप को वोट किया.
अब क्या उम्मीद?
ट्रंप ने महिलाओं के बारे में कई हैरान करने वाले बयान दिए थे.
ट्रंप ने कहा था कि जो महिलाएं गर्भपात कराती हैं उन्हें दंडित किया जाना चाहिए. ट्रंप ने फॉक्स न्यूज की एक एंकर पर पीरियड्स को लेकर भी तंज कसा था.
महिलाओं को लेकर ट्रंप ऐसा सोचते हैं तो आख़िर उन्हें वोट कैसे मिला? जो महिलाएं मां के तौर पर घरों में रहती हैं, उन्होंने लैंगिक समानता को तवज्जो नहीं दी.
वामपंथी रुझान वाली वेबसाइट वॉक्स का कहना है कि जिन महिलाओं के लिए लेबर मार्केट में कामयाबी की बहुत संभावना नहीं थी, उन्होंने ट्रंप का समर्थन किया. गर्भवती महिलाओं और भूतपूर्व सैनिकों को ट्रंप प्रशासन से फ़ायदा मिल सकता है. इस मामले में ट्रंप की बेटी इवांका ने भी उनकी मदद की. गर्भवती महिलाओं को छह महीने की पेड छुट्टी मिलेगी. रिटायर्ड महिला सैनिकों के लिए भी ट्रंप ने मुफ़्त में इलाज का वादा किया है.
जिन महिलाओं को चिंता होनी चाहिए
अमरीका में महिला अधिकारों से जुड़ी कार्यकर्ताओं की मुख्य चिंता है कि आख़िर ट्रंप गर्भपात क़ानून के साथ क्या सलूक करेंगे.
फिलहाल 1973 में सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले से सभी 50 राज्यों को गर्भपात का अधिकार मिला है.
यदि ट्रंप सुप्रीम कोर्ट में कंजर्वेटिव की नियुक्ति करते हैं और वहां कंजर्वेटिव बहुमत में आते हैं तो इस क़ानून को बदला भी जा सकता है. गर्भपात को लेकर ट्रंप की राय सालों से सख्त रही है. 1999 में उन्होंने कहा था, ''मैं गर्भपात से नफ़रत करता हूं. मुझे बिल्कुल नफ़रत है. जो इसके पक्ष में हैं, उन सभी से नफ़रत है. मुझे शर्म आती है जब लोग इस मुद्दे पर बात करते हैं.''
मार्च 2016 में ट्रंप ने कहा, ''रोनल्ड रीगन की तरह गर्भपात पर मेरी राय बदली नहीं है. मैं जीवन के पक्ष में हूं.''
मुसलमानों की दिक्कत
मुसलमानों पर ट्रंप की टिप्पणी सबसे ज़्यादा विवादास्पद रही. अमरीकी मुसलमानों को डर सताने लगा कि यदि ट्रंप जीत गए तो क्या होगा.
उन्होंने कहा था कि अमरीका में सभी मस्जिदों पर निगरानी रहेगी.
ट्रंप ने कहा कि उन्हें पॉलिटिकली करेक्ट होने की चिंता नहीं है. इसके साथ ही ट्रंप ने यह भी कहा था कि चरमपंथी विरोधी अभियान में मुसलमानों पर नज़र रखी जाएगी.
ट्रंप सभी अमरीकी मुसलमानों का डेटाबेस रखना चाहते थे. ट्रंप के जीतने से अमरीका में मुसलमानों को क्या फ़ायदा होगा, यह देखा जाना बाकी है.
आलोचकों का कहना है कि ट्रंप ने इस्लाफोबिया फैलाया है.
आलोचक यह भी कहते हैं कि अमरीका में आतंकी हमले का डर फैलाकर उन्होंने मतदाताओं को गोलबंद किया. कैलिफोर्निया के सैन बर्नादिनो की मास शूटिंग में 14 लोगों के मारे जाने के बाद ट्रंप ने एक प्रेस रिलीज़ जारी कर कहा था कि बाहरी देशों से अमरीका में मुस्लिमों के आने पर पाबंदी लगा देनी चाहिए.
ट्रंप की इस टिप्पणी की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी आलोचना हुई थी.
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