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ब्रेक्सिट: ब्रिटेन सरकार को कोर्ट ने दिया झटका
यूरोपीय यूनियन ( ईयू) से अलग होने के पहले ब्रिटेन सरकार को इस मसले पर संसद में मतदान कराना होगा.
ब्रिटेन के हाई कोर्ट के इस निणर्य के अनुसार ब्रिटिश संसद को इस मसले पर मतदान करना होगा कि वह ईयू से अलग होने की प्रक्रिया आरंभ करता सकता है कि नहीं.
इस निर्णय के मुताबिक़ अब सरकार लिस्बन संधि के अनुच्छेद 50 को अपने स्वनिणर्य के आधार पर लागू नहीं कर सकती है.
अनुच्छेद 50 के ज़रिए यूरोपीय संघ से ब्रिटेन के अलग होने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू होनी है.
अब सरकार अपने तई ईयू से औपचारिक बातचीत तब तक शुरू नहीं कर सकती है जब तक ब्रिटेन की संसद में इस मसले पर मतदान न हो जाए.
सरकार, कोर्ट में अगले माह होने वाली सुनवाई के दौरान इस फ़ैसले पर अपील दायर करेगी.
ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे ने कहा है कि जनमत संग्रह और मंत्रियों की वर्तमान शक्तियों के हिसाब से सांसदों को इस मसले पर वोट करने की जरूरत नहीं हैं.
जनमत संग्रह के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे कार्यकर्ताओं ने सरकार के इस कदम को असंवैधानिक क़रार दिया है.
लेबर पार्टी ने सरकार से कहा है कि, 'वह बिना देर किए अपनी शर्तों को संसद के सामने फौरन रखे. ब्रेक्सिट के मसले पर संसद के साथ पारदर्शिता और जवाबदेही बरती जानी चाहिए.'
यूके इंडिपेंडेंस पार्टी यानी यूकिप के प्रमुख नाइजल फ़राज ने कोर्ट के इस निणर्य को 51 फीसदी मतदाताओं के साथ विश्वासघात होने की अशंका के साथ जोड़ दिया है.
फ़राज ने प्रवासियों के मुद्दे को ज़ोर शोर से उठाया था. आगे चलकर ये मु्द्दा ब्रिटेन की संस्कृति, पहचान और राष्ट्रीयता से जुड़ता चला गया.
ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे ने इससे पहले बयान दिया था कि यूरोपीय संघ से बाहर निकलने की औपचारिक बातचीत की प्रक्रिया ब्रिटेन अगले साल मार्च के आखिर से शुरू करेगा.
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