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बाप ने बेटे को लगाई एड्स इंफ़ेक्शन की सुई
- Author, लुसी हैंकाक
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
ब्रायन जैक्सन के पिता ने जब नवजात ब्रायन को एचआईवी संक्रमित इंजेक्शन लगाया था तो उन्होंने सोचा था कि उनका बेटा ज़िंदा नहीं बचेगा.
उस वक़्त किसी ने भी यह कल्पना तक नहीं कि थी 24 साल के बाद ये बाप अपने बेटे की ज़ुबान से अपने अपराध के ख़ौफ़ की दास्तां को सुनेगा.
मिसौरी के सुधार विभाग में यह लंच का वक़्त है और मायूस ब्रायन जैक्सन वहां एक कमरे में मौजूद हैं.
इसी कमरे के दूसरी तरफ क़ैदियों के कपड़े में ब्रायन स्टुवर्ट यानी जैक्सन के पिता उनका इंतज़ार कर रहे हैं.
हालांकि जैक्सन जब बच्चे थे तभी से दोनों की मुलाक़ात नहीं हुई है.
जैक्सन यहां एक बयान दर्ज कराने आए हैं और वो उम्मीद कर रहे हैं कि इससे उनके पिता और लंबे वक़्त तक जेल की सलाखों के पीछे रहेंगे. यह वही बयान है जिसके बारे में बहुत कम लोगों को उम्मीद थी कि जैक्सन कभी इसे पढ़ पाएंगे.
डॉक्टरों को 1992 में जैक्सन के एड्स के संक्रमण का पता चला था.
इस बयान को हाथ में थामे जैक्सन चुपचाप अपनी मां की बगल वाली कुर्सी पर बैठ जाते हैं.
जैक्सन का कहना है, "मैं सामने की ओर देखने की कोशिश कर रहा था. लेकिन मैं उनसे नज़र नहीं मिलाना चाहता था. मैं कभी भी उन्हें अपना पिता नहीं मानूंगा".
पेरोल बोर्ड ने उन्हें पीड़ित के बयान को पढ़ने के लिए बुलाया है.
वो बताते हैं, "उस वक़्त मैं सोच रहा था कि क्या मैं सही काम कर रहा हूं, लेकिन मेरी मां ने मुझे हमेशा साहसी बनना सिखाया है."
जैक्सन ने एक गहरी सांस ली, नज़रें पेरोल बोर्ड से मिलाई और अपनी कहानी सुनानी शुरू की.
इसकी शुरुआत उस वक़्त होती है जब उनकी मां और पिता मिसौरी के एक सैनिक प्रशिक्षण केंद्र में मिले. दोनों ही वहां मेडिकल की ट्रेनिंग ले रहे थे. वो दोनों साथ रहते थे और पांच महीने बाद 1991 के मध्य में उनकी मां गर्भवती हो गईं.
जैक्सन का कहना है, "जब मेरा जन्म हुआ तो मेरे पिता काफ़ी खुश थे, लेकिन जब वो 'ऑपरेशन डेज़र्ट स्टॉर्म' के लिए गए तो सबकुछ बदल गया. वो सऊदी अरब से लौटे तो मेरे प्रति उनका रवैया पूरी तरह से बदला हुआ था".
स्टुवर्ट ने जैक्सन को अपना बच्चा मानने से इंकार करना शुरू कर दिया. वो इसके लिए डीएनए टेस्ट की मांग करने लगे और जैक्सन की मां पर कई तरह के अत्याचार शुरू कर दिए.
अंत में जब जैक्सन की मां ने स्टुवर्ट को छोड़ दिया, तो इस दंपति का बच्चे की देख रेख के ख़र्च पर बड़ा झगड़ा शुरू हो गया. स्टुवर्ट ने यह ख़र्च देने से मना कर दिया था.
जैक्सन का कहना है, "वो कहते थे कि तुम्हारा बेटा पांच साल से ज़्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रहेगा. और जब मैं तुम्हें छोड़ दूंगा तो मैं कोई रिश्ता बचा नहीं रहने दूंगा".
इसी दौरान स्टुवर्ट को एस लैब में ख़ून की जांच करने वाले की नौकरी मिल गई. बाद में जांच अधिकारियों ने पाया कि स्टुवर्ट ने घर में गुप्त तौर पर संक्रमित ख़ून के नमूनों को जमा करना शुरू कर दिया था.
जिस वक़्त जैक्सन ग्यारह महीने के थे तो उनके मां-बाप के बीच संपर्क पूरी तरह से टूट चुका था. लेकिन जब जैक्सन दमे की वजह से हॉस्पिटल में भर्ती हुए तो उनकी मां ने उनके पिता को फोन किया.
जैक्सन बताते हैं, "जब मां ने फोन किया तो मेरे पिता के सहकर्मी ने बताया कि ब्रायन स्टुवर्ट को तो कोई बच्चा नहीं है".
लेकिन जिस दिन जैक्सन को हॉस्पिटल से छुट्टी मिलने वाली थी, स्टुवर्ट अचानक ही हॉस्पिटल पहुंच गए.
जैक्सन का कहना है, "वो एक अच्छे पिता नहीं थे, इसलिए जब उन्होंने इसका दिखावा किया तो हर किसी को हैरत हुई. उन्होंने मेरी मां को कैफ़ेटेरिया में कुछ खाने पीने को भेज दिया. उसके बाद वो मेरे साथ अकेले ही मौजूद थे".
इसी दौरान स्टुवर्ट ने अपने बेटे को एचआईवी संक्रमित ख़ून का इंजेक्शन लगा दिया.
जैक्सन का कहना है, "वो उम्मीद कर रहे थे कि इससे मेरी मौत हो जाएगी और उन्हें मेरी परवरिश का ख़र्च नहीं भरना पड़ेगा".
जब उनकी मां वापस लौटीं तो देखा कि जैक्सन अपने पिता की बाहों में ज़ोर ज़ोर से रो रहा है. इससे सारे डॉक्टरों को हैरानी हुई.
वो इस बात से बेख़बर थे कि यह जानलेवा वायरस जैक्सन की नसों में पहुंच रहा है. डॉक्टरों ने जैक्सन की धड़कन और बुख़ार जैसी कुछ जांच की और घर भेज दिया.
लेकिन उसके कुछ हफ़्तों के बाद जैक्सन की मां ने देखा कि उनके बेटे की सेहत बिगड़ रही है.
जैक्सन का कहना है, "मेरे इलाज के लिए मां मुझे कई डॉक्टरों के पास लेकर गई. वो डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ाती थीं कि मैं क्यों मौत के क़रीब पहुंच गया हूं. लेकिन किसी भी जांच से इसका कोई सुराग़ नहीं मिला".
जैक्सन जब बच्चे थे, तो उस वक़्त भी उन्हें इस बात का एहसास था कि उनकी हालत बहुत नाज़ुक है.
वो कहते हैं, "मुझे याद है कि आधी रात को नींद से उठ कर मैं अपनी मां को कहता था कि मां मुझे मरने नहीं देना."
हर संभावित बीमारी की जांच के बाद, एक रात उनके डॉक्टर ने अस्पताल को एचआईवी की जांच करने को कहा.
जैक्सन बताते हैं, "जब वह जांच रिपोर्ट आई तो मुझे पूरी तरह एड्स और तीन संक्रमण हो चुके थे. डॉक्टरों की राय में मेरे बचने की कोई उम्मीद नहीं थी."
लेकिन डॉक्टरों ने हर मौजूद दवा से जैक्सन का इलाज जारी रखा.
जैक्सन का कहना है कि एक दिन वो बेहतर दिखते थे तो अगले ही घंटे किसी संक्रमण की वजह से उन्हें भागकर अस्पताल ले जाना पड़ता था.
दवाओं के साइड इफ़ेक्ट से उनमें बहरापन भी आ गया.
लेकिन जैक्सन हॉस्पिटल में जिन दूसरे बच्चों से मिले थे वो ज़िंदा नहीं रह सके. डॉक्टरों की वजह से आश्चर्यजनक तौर पर जैक्सन की सेहत में सुधार होने लगा.
धीरे धीरे जैक्सन की सेहत इतनी अच्छी हो गई कि वो स्कूल जाने लगे. उनका बैग दवाइयों से भरा रहता था.
हर किसी से स्नेहपूर्ण व्यवहार रखने वाला यह बच्चा एड्स की बीमारी के साथ मौजूद सामाजिक कलंक से अनजान था.
वो कहते हैं, "मेरे स्कूली ज़िंदगी की दुखद बाद यह है कि मेरा स्कूल मुझे नहीं चाहता था. वो लोग डरे हुए थे. 1990 के दशक में लोग ये सोचते थे कि उन्हें टॉयलेट सीट से भी एड्स की बीमारी हो सकती है".
इसकी शुरुआत बच्चों के अभिभावकों ने की थी जो जैक्सन को बर्थडे पार्टी में नहीं बुलाते थे. यहां तक कि उनकी सौतेली बहन को भी ऐसी पार्टियों में नहीं बुलाया जाता था. लेकिन जैसे जैसे बच्चे बड़े होते गए तो उन्होंने भी जैक्सन के प्रति अपने मां बाप जैसा भेदभाव शुरू कर दिया.
जैक्सन कहते हैं, "वो लोग मुझे एड्स बॉय, गे बॉय जैसे नाम से पुकारते थे. उसी वक़्त से मैं ख़ुद को अलग थलग और अकेला महसूस करने लगा. मुझे लगता था कि दुनिया में मेरे लिए कोई जगह नहीं है".
10 साल की उम्र में उन्होंने अपने बाप के अपराध की कहानियों को इकट्ठा करना शुरू कर दिया था.
वो बताते हैं, "शुरू में मैं बहुत गुस्से में था. मैं ख़ुद को समझा नहीं पा रहा था कि मेरा अपना ही बाप मेरे साथ ऐसा किस तरह से कर सकता है."
जैक्सन का कहना है, "उन्होंने न केवल मुझे जान से मारने की कोशिश की थी, बल्कि मेरी ज़िंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया."
वो ब्रायन स्टुवर्ट जूनियर के रूप में पैदा हुए थे लेकिन उन्होंने अपने मां के सरनेम को अपना लिया और जैक्सन बन गए.
वो कहते हैं, "नाम को बदलने से मैं यह बता सकता था कि इस अपराध के कसूरवार ब्रायन स्टुवर्ट से मेरा कोई संबंध नहीं है."
जैक्सन बताते हैं, "पेरोल पर सुनवाई के दौरान वो मुझे अपने बेटा कहते रहे. मैंने ये गुज़ारिश करने की कोशिश की थी कि वो मुझे अपने अपराध का शिकार कहें."
जुलाई में जैक्सन को मिसौरी के सुधार विभाग का एक ख़त मिला, जिसमें बताया गया कि सुनवाई के आधार पर उनके पिता को और पांच साल के लिए पेरोल देने से इनकार कर दिया गया है.
इस बीच जैक्सन लगातार डॉक्टरों की आशंका को पराजित कर रहे हैं. वो कहते हैं, "मैं एक घोड़े की तरह सेहतमंद हूं."
हालांकि जैक्सन मोटिवेशनल स्पीकर के अपने करियर में व्यस्त रहते हैं. उनकी संस्था 'होप इज़ वाइटल' एचआईवी को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने का काम करती है. लेकिन वो अक्सर कल्पना में ख़ुद को एक पिता के तौर पर देखते हैं.
वो कहते हैं, "मैं अपने बच्चों को बताना चाहता हूं कि मैं हमेशा उनकी सुरक्षा के लिए मौजूद हूं."
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