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'नॉन स्टेट एक्टर्स' पर कार्रवाई के लिए पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली की विदेश मामलों की एक कमेटी में शामिल सत्ताधारी पार्टी के एक सांसद ने हाफिज़ सईद समेत सभी 'नॉन स्टेट एक्टर्स' के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है.
जमात उद-दावा प्रमुख हाफिज़ सईद को भारत साल 2008 में मुंबई में हुए चरमपंथी हमलों का मास्टरमाइंड बताता है.
पाकिस्तान में बुधवार को कश्मीर के मुद्दे पर आयोजित संसद के संयुक्त सत्र में हुई बहस के दौरान भी नॉन स्टेट एक्टर्स से छुटकारा पाने की बात उठी थी.
संयुक्त सत्र में पाकिस्तान के ऊपरी सदन में विपक्ष के नेता एतज़ाज एहसन ने कहा, "पाकिस्तान आज अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकेला पड़ गया है क्योंकि यहां नॉन स्टेट एक्टर आज़ाद घूमते हैं."
इसके पहले संसद की विदेश मामलों की कमेटी की बैठक में पाकिस्तान की सत्ताधारी पार्टी के सांसद राणा मोहम्मद अफजल ने हाफिज़ सईद का नाम लेकर कहा, "हाफिज सईद कौन से अंडे देता है कि जिस वजह से हमने उसे पाल रखा है."
उन्होंने आगे कहा, " पाकिस्तान की विदेश नीति का हाल ये है कि हम आज तक हाफिज़ सईद को खत्म नहीं कर सके."
राणा अफजल ने कहा कि भारत ने हाफिज सईद को लेकर दुनिया में पाकिस्तान की एक ऐसी छवि बना दी है कि जब कश्मीर के मुद्दे पर पाकिस्तान दुनिया को अपना रुख बताने जाता है तो वहां के अधिकारी कहते हैं कि हाफिज सईद की वजह से दोनों देशों के संबंध खराब हैं.
उन्होंने कहा, "ऐसी रुकावटों को दूर करने की जरुरत है जिनकी वजह से दुनिया पाकिस्तान को अकेला करके चरमपंथियों का समर्थक देश बताने की कोशिश करती है."
राणा अफजल उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे जो भारत प्रशासित कश्मीर में मानवाधिकारों की खराब होती स्थिति को लेकर फ्रांस की सरकार को जानकारी देने के लिए पेरिस गया था.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ ने दुनिया के कई देशों में ऐसे प्रतिनिधिमंडल भेजे थे.
वहीं संसद के संयुक्त सत्र में बुधवार को एहसन ने अपने भाषण में कहा था कि पाकिस्तान में बड़ी तादात में नॉन स्टेट एक्टर्स की मौजूदगी की वजह से अंतरराष्ट्रीय समुदाय की उंगलियां पाकिस्तान पर उठती हैं.
उन्होंने पाकिस्तान सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि नॉन स्टेट एक्टर्स के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई. जबकि चरमपंथ के खिलाफ बनी राष्ट्रीय कार्य योजना में साफ तौर पर कहा गया था कि ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारतीय जासूस कुलभूषण यादव की गिरफ्तारी का जिक्र न करने पर प्रधानमंत्री नवाज़ शऱीफ की आलोचना की.
उन्होंने कहा, "जब तक प्रधानमंत्री शरीफ कुलभूषण का नाम नहीं लेते तब तक भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शर्मिंदा नहीं किया जा सकता."
एहसन का ये भी कहना था कि अगर पाकिस्तानी फौज का कोई अधिकारी जासूसी के आरोप में भारत में गिरफ्तार होता तो नरेंद्र मोदी इस मामले को संयुक्त राष्ट्र में जरुर ले जाते और पाकिस्तान के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुहिम चलाते.
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