आईसीजे में मार्शल आईलैंड का मामला ख़ारिज

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संयुक्त राष्ट्र की एक अदालत ने परमाणु हथियारों का प्रसार रोकने में कथित असफलता के लिए ब्रिटेन, भारत और पाकिस्तान के ख़िलाफ़ लाए मार्शल आईलैंड के मामलों को ख़ारिज कर दिया है.
बिकिनी एटोल में अमरीकी बमों के परीक्षण से हुई पर्यावरणीय तबाही के बाद परमाणु हथियारों के ख़िलाफ़ मुहिम में मार्शल आईलैंड के लोग बहुत आगे रहे हैं.
ब्रिटेन, भारत और पाकिस्तान पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 1968 की परमाणु अप्रसार संधि की बाध्यताओं पर ठीक से अमल नहीं किया है.
लेकिन 'इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस' का कहना है कि वो इस मामले में कोई व्यवस्था नहीं दे सकता है.
मार्शल आईलैंड चाहता है कि 'इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस' में लाए गए मामले का इस्तेमाल परमाणु शक्तियों के निरस्त्रीकरण के लिए किया जाए.
दक्षिण प्रशांत महासागर में बसे इस छोटे से देश मार्शल आईलैंड ने ब्रिटेन, अमरीका, रूस, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इसराइल और उत्तर कोरिया के ख़िलाफ़ 'इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस' में मामले दायर किए थे.
इन सभी 9 देशों ने परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तख़त किए हैं. लेकिन इनमें से केवल तीन देश ब्रिटेन, भारत और पाकिस्तान हेग स्थित 'इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस' के अधिकार-क्षेत्र को मान्यता देते हैं.
परमाणु निरस्त्रीकरण के ख़िलाफ़ मुहिम चलाने वाले 'कैम्पेन फॉर न्यूक्लियर डिसआर्म्समेंट' ने 'इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस' के फ़ैसले पर खेद जताया है.












