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गर्भपात कानून के खिलाफ महिलाओं की हड़ताल
पोलैंड में गर्भपात पर पूरी तरह से पाबंदी लगाए जाने के प्रस्ताव के ख़िलाफ महिलाएं हड़ताल पर हैं.
प्रस्ताव के विरोध में महिलाओं ने काले कपड़े पहनकर सड़क पर मार्च निकाला.
कामकाजी महिलाएं दफ्तर नहीं गईं. छात्राओं ने स्कूल का रुख नहीं किया वहीं घरेलू महिलाओं ने भी घर के कामकाज से दूरी बनाए रखी.
ये हड़ताल साल 1975 में आइसलैंड में हुई महिलाओं की हड़ताल से प्रेरित है.
राजधानी वार्सा में मार्च निकालने वाली महिलाओं ने इसे 'काले सोमवार' का नाम दिया.
ये साफ नहीं है कि विरोध में कितनी महिलाएं शामिल हैं और बड़े शहरों के बाहर इसका कितना असर होगा.
अगर ये कानून पारित हुआ तो पोलैंड में यूरोप के दो अन्य देशों माल्टा और होली सी की तरह गर्भपात कानून बेहद कड़ा हो जाएगा.
गर्भपात कराने वाली महिला को पांच साल तक की जेल की सज़ा हो सकेगी. इस कानून में गर्भपात में सहयोग करने वाले डॉक्टरों को भी जेल की सजा का प्रावधान है.
इस कानून के आलोचकों का कहना है कि इस स्थिति में दुर्घटनावश गर्भपात होने की स्थिति में भी जांच होगी कि कहीं जान बूझकर तो गर्भपात नहीं कराया गया है.
पोलैंड में गर्भपात से जुड़े कानून पहले ही काफी सख्त हैं.