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ज़रूरत पड़ेगी तो सीमा पर लड़ने जाऊँगा: अन्ना
- Author, सुप्रिया सोगले
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी के लिए
लोकपाल बिल के लिए हुए दिल्ली आंदोलन से चर्चा में आए सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने कश्मीर में हुए उड़ी हमले की निंदा की है.
अन्ना का कहना है कि ज़रूरत आने पर वो देश की रक्षा के लिए सीमा पर जाकर युद्ध में भागीदारी इस उम्र में भी लेना चाहेंगे.
अपनी बायोपिक फ़िल्म "अन्ना" के ट्रेलर लॉंन्च पर मुंबई पहुंचे अन्ना हज़ारे ने पत्रकारों से बातचीत में पाकिस्तान और भारत के मौजूदा रिश्ते पर टिपण्णी करते हुए कहा, "दोनों देशों को अच्छे पड़ोसी का धर्म निभाना चाहिए और एक-दूसरे के सुख दुःख में शामिल होना चाहिए."
1965 के युद्ध को याद करते हुए अन्ना ने कहा, "उस युद्ध में मैं भी था और हमारे बम लाहौर में जाकर गिरे इसलिए उसी समय पाकिस्तान रुक गया. अभी पाकिस्तान को पता है की भारत की शक्ति क्या है और उन्हें ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए. दोनों देशों के लिए युद्ध ठीक नहीं पर फिर भी ऐसा कुछ होता है तो मैं 79 उम्र में फिर से सीमा पर जाना चाहूंगा और युद्ध में भागीदारी लेना चाहूंगा."
अन्ना हज़ारे ने उड़ी हमले को कायर हमला करार दिया और भारत सरकार के बयान का समर्थन किया.
महाराष्ट्र की राजनीतिक पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) की भारत में काम कर रहे पाकिस्तानी कलाकारों को देश छोड़ने की चेतावनी पर अन्ना ने कहा, "लड़ाई और कला को अलग रखना चाहिए और कला में नफ़रत नहीं लानी चाहिए पर अगर कला या कोई कलाकार देश या समाज को नुकसान पंहुचा रहा है तो वो मंज़ूर नहीं."
अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) की वर्तमान स्थिति पर अन्ना ने कहा, "अरविंद जब पार्टी बना रहे थे तब मैंने उनसे पूछा था कि पार्टी में आने वाले लोगों को कैसे तय करोगे कि वो अचार-विचार से शुद्ध हैं, उनमें त्याग की भावना है? और उस समय उसके पास कोई जवाब नहीं था. आज मैं देख रहा हूँ कि कितने लोगो कों निकालना पड़ रहा है क्योंकि खोजने का तरीका ही नहीं था."
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