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'कश्मीर पर तो कभी भी लिखा जा सकता है'
- Author, वुसतुल्लाह खान
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
1992 में जब बाबरी मस्जिद ढहाई गई तब उसके नाराज़गी में पाकिस्तान में कई मंदिर जलाए गए या फिर तोड़-फोड़ की गई.
मारी माता नाम का मंदिर कराची में भी था. जिसे 1957 में कराची के हिंदू पंचायत के प्रधान टीमोतन दा ने बड़े चाव से बनवाया था.
जब बाबरी मस्जिद ढहाए जाने की ख़बर पहुंची तो मारी माता मंदिर के करीब रहने वाली लक्ष्मी बाई ने मोहर्रम का ताजिया बनाने के एक विशेषज्ञ से छोटा सा ताजिया लेकर मारी माता मंदिर में रख दिया.
और मंदिर के बाहर इमामबाड़े का बोर्ड टांग दिया. जब हुजूम मारी माता मंदिर तोड़ने आया तो लक्ष्मी बाई ने कहा, "कौन सा मंदिर? ये तो इमामबाड़ा है. जलाना है तो जला दो."
हुजूम पलट गया और मंदिर जलने से बच गया. फिर ये हुआ कि लक्ष्मी बाई कुछ दिनों के बाद मुसलमान हो गई और अपना नाम जन्नत बाई रख लिया.
इसके बाद यात्रियों और पुजारियों से कहा कि अब वो पूजा-पाठ के लिए कोई और जगह तलाश करें. अब ये सचमुच का इमामबाड़ा है.
मगर पिछले हफ़्ते एक हिंदू नागरिक आत्मप्रकाश चनानी और उनके ग्यारह सहयोगियों ने कराची में सिंध हाई कोर्ट में याचिका डाली कि मारी माता मंदिर पर से जन्नत बाई का नजायज कब्जा ख़त्म करवाया जाए.
अदालत ने सूबे और केंद्र की हुकूमत को 29 सितंबर तक मारी माता मंदिर के मिल्कियत के कागज पेश करने का हुक्म दिया ताकि मामला तुरंत सुलझाया जा सके.
उधर, सिख समुदाय के लिए एक अच्छी ख़बर यह है कि सरकारी इवैक्वी प्रॉपर्टी ट्रस्ट ने पहली बार ग्रंथ साहिब पाकिस्तान में छापने का फ़ैसला लिया है.
छपाई में कोई ग़लती ना रह जाए इस बारे में बोर्ड ने भारत की शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी से भी मदद मांगी है.
दूसरी अच्छी ख़बर यह है कि जिस तरह से मक्के के हाजी अपने साथ बोतल में आबे जमजम भरकर पिलाते हैं. इसी तरह इवैक्वी प्रॉपर्टी ट्रस्ट ने ननकाना साहब के बीवी नानकी कुएं का पवित्र अमृत जल बोतल में भरकर एक्सपोर्ट करके और पाकिस्तान आने वाले यात्रियों को मुहैया करवाने का फ़ैसला लिया है.
बोतलबंद अमृत जल 14 नवंबर को बाबा नानक के जन्मदिन पर मिलना शुरू हो जाएगा.
और इसी दिन ननकाना साहब में इंटरनेशनल गुरुनानक यूनिवर्सिटी का ईंट-पत्थर भी रखा जाएगा. जबकि तक्षशिला में प्राचीन गंधारा यूनिवर्सिटी के नक्शे-कदम पर एक मॉडर्न पाठशाला बनाने के लिए भी एक सरकारी कमिटी बना दी गई है जो साल भर में अपना काम मुकम्मल कर लेगी.
वैसे कल से मेरा मन कश्मीर पर कुछ लिखने को कर रहा था मगर कश्मीर पर कभी भी लिखा जा सकता है.
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