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अफ्रीकी राजकुमार और ब्रितानी लड़की की प्रेम कहानी
जब साल 1948 में एक अफ्रीकी राजकुमार और एक गोरी लड़की का विवाह हुआ, तो इसने ब्रिटेन और अफ्रीका को अचंभित कर दिया.
बोतस्वाना के राजकुमार रेसिका कांबा और ब्रितानी लड़की रूथ की इस प्रेम कहानी की गवाह रही रूथ की बहन मयूरियल विलियम्स सैंडर्सन ने बीबीसी को इस अनोखे प्यार के बारे में बताया.
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान कांबा की मुलाक़ात रूथ विलियम्स से हुई थी.
पढ़ाई समाप्त कर उन्हें ब्रितानी सरंक्षण वाले बेतियुनालैंड और बेचियानालैंड (अब बोतस्वाना) जाना था और फिर शायद उनका विवाह क़बीले के किसी लड़की से होता. लेकिन विलियम्स के साथ उनके रोमांस ने सब कुछ बदल कर रख दिया.
उनके परिवार ने इस रिश्ते को अस्वीकार कर दिया और कांबा को उनके तख़्त के दावे को छोड़ने को मजबूर किया गया. हालांकि बाद में बोतस्वाना के एक स्वतंत्र राष्ट्र बनने पर वह वहां के पहले राष्ट्रपति बने.
मयूरियल विलियम्स सैंडर्सन बताती है, "साल 1946 तक मैं कभी भी किसी अफ्रीकन से नहीं मिली थी. जब तक मैं लंदन मिशनरीज सोसाइटी कंसर्ट नहीं गई थी. तब मैं 24 साल की भी नहीं थी. हम डिनर पर गए और वो टेबल रेसिका कांबा का था और वह अपनी कबीले के मुखिया की विरासत संभालने वाले थे. वह एक राजा की तरह ही थे. हम बहुत अच्छे दोस्त बन गए. मैं हमेशा हर शनिवार की रात वहां जाया करती थी. मेरी बहन विल्स शनिवार को खाली रहती थी, इसलिए मैंने उससे अपने साथ चलने को कहा."
अपनी प्रेम कहानी के बारे में साल 1991 में रूथ कांबा ने बीबीसी अफ्रीका सर्विस को बताया "हम दोनों इंडॉयरेक्टली अपनी बहन के जरिए लंदन मिशनरीज सोसायटी में मिले वहां हम अफ्रीकन छात्रों के लिए विशेष सप्ताहांत में जाया करते थे.
उन्होंने कहा, "हम एक -दूसरे से बेहद प्यार करते थे, हम जानते थे कि इससे हमारे परिवार ख़फ़ा होंगे. लेकिन हम अलग नहीं रहना चाहते थे."
रूथ का कहना था, "हम दोनों ज़िद्दी थे. जब लोग एक साथ ज़िद्दी होते हैं तो लोग उन्हें रोकने की कोशिश करते हैं. "
उन्होंने कहा, " शादी के बाद भी लोग हमे अलग करने की कोशिश कर रहे थे. "
मयूरियल विलियम्स सैंडर्सन बताती है, "ये एक किस तरह का आकर्षण था, ये वर्णन करना मुश्किल है, लेकिन ये उन दोनों के बीच था. ये काफ़ी आश्चर्यजनक था कि अलग-अलग सामाजिक पृष्ठभूमि के दो लोग कैसे क़रीब आ गए. "
उन्होंने बताया, "उन दिनों लंदन की जातिगत स्थिति अच्छी नहीं थी. गोरे और काले एक साथ बाहर नहीं घूम सकते थे, विशेषकर एक गोरी लड़की और काला आदमी "
सैंडर्सन कहती है, "वह काफ़ी बहादुर थीं और वो भी बहादुर थे, काफ़ी कम उम्र के उनके पिता की मौत हो गई थी, इसलिए उनका पालन-पोषण चाचा सिकेडी के संरक्षण में हुआ. उनके चाचा सिकेडी इस शादी के काफ़ी ख़िलाफ़ थे. उनका मानना था कि गोरी दुल्हन के पति के मुखिया बनने से क़बीले की बेइज्ज़ती होगी."
उन्होंने बताया, "वे दोनों अमरीकन चर्च में शादी करना चाहते थे, लेकिन दुर्भाग्यवश चाचा सिकेडी ने लंदन मिशनरीज सोसायटी को उनकी विवाह रोकने के लिए ख़त लिखा दिया. तब उन्होंने बिशप ऑफ लंदन से संपर्क किया. "
दक्षिण अफ्रीका में इस शादी का विवाह का काफ़ी विरोध हुआ.
ब्रितानी सरकार दबाव में आ गई और कामा को उनके देश से देश से निकाला दे दिया गया.
इस विवाह की ब्रितानी संसद और चर्च में भी चर्चा हुई, लेकिन अपनी शादी को सही साबित करने में इस जोड़े ने कोई कसर नहीं छोड़ी.
सैंडर्सन बताती है, "मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि मुझे, रूथ और मेरे परिवार को इस कठिन परिस्थिति से जूझना पड़ेगा."
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