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दो सितारों के बीच चुनावी जंग | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
"जिस व्यक्ति को रुपहले पर्दे पर गरजते देखते और सुनते थे या टीवी स्क्रीन पर जिसकी कटाक्ष भरी मुस्कान से हज़ारों लोग लोट-पोट होते हों वह अचानक मेरे घर के सामने हाथ जोड़े मेरे अभिवादन के लिए खड़ा हो तो किसे अच्छा नहीं लगेगा, मैं तो खूब मज़े ले रहा हूँ". फ़िल्मी सितारे शत्रुघ्न सिन्हा और टीवी जगत के नामचीन अदाकार शेखर सुमन जब पटना साहिब के एक मतदाता रंजीत कुमार की गली से होकर गुज़रे तो रंजीत की ज़ुबान से यही बात निकली. चालीस डिग्री के क़रीब तापमान और धूल भरी हवाओं के झोंके के बीच पटना साहिब के मतदाता अपने चहेते सितारों की एक झलक देख कर उत्साहित हैं. जब उनसे पूछा जाता है कि पटना साहिब का सांसद कौन होगा तो वह इस बात पर चुप्पी साध लेते हैं. शायद उन्हें लगता है कि ऐसे सवाल उनसे न पूछे जाएँ, उन्हें सितारों के दर्शन होते रहें बस. सितारों का जलवा सात मई को होने वाले चुनाव में पटना साहिब से तो कई प्रत्याशी मैदान में हैं लेकिन भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी और बिहारी बाबू यानी शत्रुघ्न सिन्हा, कांग्रेस प्रत्याशी शेखर सुमन और राष्ट्रीय जनता दल के लोकजनशक्ति पार्टी समर्थित विजय साहू के अलावा दूसरे उम्मीदवार उनकी चमक-दमक में गुम से हो गए लगते हैं. वैसे एक और कलाकार औन मासूमी भी आज़ाद उम्मीदवार के बतौर पटना साहिब से अपनी राजनीतिक तक़दीर आज़मा रहे हैं. मासूमी एक संगीत मंडली के संचालक हैं और पटना में उनकी पहचान मोहम्मद रफ़ी के गीतों की नकल करके गाने को लेकर है. वातानुकूलित माहौल में जीवन जीने के आदी बिहारी बाबू और शेखर सुमन के लिए चेहरे झुलसा देने वाली गर्मी में चुनाव प्रचार करना, पर्दे की ज़िंदगी से अलग एक नई ज़िंदगी का अहसास करा रहे हैं. शेखर के क़रीबी कार्यकर्ता तो यहाँ तक कह रहे हैं कि लू के थपेड़ों ने उन्हें एक बार डिहाड्रेशन का शिकार भी बना डाला था. शेखर सुमन के दिन की शुरुआत उनके कार्यकर्ताओं की आमद से होती है. लोहानीपुर स्थित अपने पैतृक घर में रात बिता रहे शेखर को कांग्रेस के उत्साहित कार्यकर्ता जगाते हैं. वह एक मझे हुए राजनेता की तरह सबका अभिवादन करते हैं और फटाफट नहा-धोकर चुनाव प्रचार के लिए निकल पड़ते हैं. राजनीतिक कवायद इस दौरान बिहार प्रदेश कांग्रेस के बड़े नेता अमूमन नज़र नहीं आते. बस युवाओं की मंडली ही इनके साथ होती है. अगर आप प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से शेखर के लोकेशन के बारे में पूछें तो सिर्फ़ वह आपको उनका मोबाइल नंबर ही दे पाएँगे ओर कहेंगे कि आप खुद उनसे पूछ लीजिए. बिहारी बाबू इस मामले में अपने बारह वर्षों के राजनीतिक अनुभव का लाभ उठा रहे हैं. उन्हें पटना साहिब की कुछ अधिक जानकारी है. उनके लिए उनकी पत्नी पूनम सिन्हा भी प्रचार में जुटी हैं. वह महिलाओं पर अपना ध्यान केंद्रित कर रही हैं. शेखर और बिहारी बाबू के चुनाव प्रचार में एक बात समान है. दोनों ही राजनीति के जातीय गणित के सूत्र को ठोक बजाकर इस्तेमाल कर रहे हैं. दोनों ही कायस्थ बिरादरी से हैं और यहाँ कायस्थों की अच्छी खासी आबादी भी है. स्थानीय अखबारों में इस बिरादरी के कुछ संगठन बिहारी बाबू को समर्थन देने की अपील कर रहे हैं तो कुछ संगठन शेखर के लिए. शेखर कहते हैं कि शत्रुघ्न सिन्हा ने पटना वालों के लिए कुछ नहीं किया इसलिए उन्हें अवसर दीजिए, वह सभी समस्याओं का हल निकाल देंगे. शेखर सुमन कहते हैं, "मैं कथनी और करनी के फर्क को मिटाने के लिए चुनाव लड़ रहा हूँ. मुझे वोट दें और मैं वादा करता हूँ कि पटना की तस्वीर बदल दूंगा." वह अपने राजनीतिक विरोधी शत्रुघ्न सिन्हा का नाम नहीं लेते पर कहते हैं, "जो व्यक्ति जहाजरानी मंत्रालय से लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय तक की ज़िम्मेदारी संभाल चुका हो और पटना के लोगों को कुछ फायदा न पहुँचा सका हो तो आप समझ सकते हैं कि भाजपा उम्मीदवार अब आप के लिए क्या कर सकते हैं." कौन बनेगा सांसद? शेखर सुमन उन क्षेत्रों में अपना ध्यान ज़्यादा केंद्रित कर रहे हैं जहाँ मुसलमानों की आबादी अधिक है. इसकी वजह स्पष्ट है. वह मान कर चल रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी के पारंप्रिक विरोधी मुसलमानों को शत्रुघ्न सिन्हा के ख़िलाफ़ गोलबंद करना अपेक्षाकृत आसान है. इसलिए वह दरगाहों, इमामबाड़ों, मदरसों और मज़ारों पर दस्तक देना नहीं भूलते. दूसरी तरफ इसके जवाब में शत्रुघ्न सिन्हा कहते हैं, "शत्रुघ्न सिन्हा को जो वोट मिल रहे हैं वह मुख्यमंत्री नितीश कुमार के तीन सालों के अच्छे कामों की बदौलत मिल रहे हैं. नितीश कुमार ने हिंदू-मुस्लिम के नाम पर अलग-अलग काम नहीं किया है. वह तो सभी धर्मों के लोगों में लोकप्रिय हैं इसिलए हमें पूरा भरोसा है कि हमे हिंदू-मुस्लिम सब का आशीर्वाद मिलेगा." बिहारी बाबू केंद्र सरकार पर फ़िल्मी अंदाज़ में गरजते हैं. पटना की झुग्गी बस्तियों में पहुँचते हैं तो कहते हैं, "केंद्र सरकार के सौतेले रवैये ने आप ग़रीबों के रास्ते बंद कर दिये हैं. लेकिन अब आपके साथ अन्याय नहीं होगा." शत्रुघ्न सिन्हा के साथ अमूमन भाजपा के कई राज्यस्तरीय नेता भी होते हैं जो चुनाव प्रचार को व्यवस्थित ढंग से संचालित करते हैं. पर इस मामले में शेखर को कांग्रेसी व्यवस्था के बजाए ज़्यादातर अपनी व्यवस्था पर ही भरोसा करना पड़ रहा है. चुनाव के दिन क़रीब आ रहे हैं. पर लगता है कि इस चुनाव में असल जीत तो युवा मतदाताओं को पहले ही मिल चुकी है. शनिवार को शेखर सुमन को स्थानीय पुलिस ने थोड़ी देर के लिए आचार संहिता के उल्लंघन में गिरफ़्तार कर फिर छोड़ दिया. उस वक्त सब्ज़ीबाग़ क्षेत्र के युवा इरफ़ान वहीं मौजूद थे. वह कहते हैं, "जीते या हारे कोई हमें इससे क्या मतलब. हमने सोचा भी नहीं था कि शेखर सुमन को इतना क़रीब से देखने को मौक़ा मिलेगा." इरफ़ान कहते हैं," शेखर को देखने के लिए मुझे धक्कम-धुक्की भी करनी पड़ी ओर पुलिस की हलकी लाठी भी खानी पड़ी. पर कोई बात नहीं शेखर को देख तो लिया." | इससे जुड़ी ख़बरें चुनावी अखाड़े में उतरे फ़िल्मी सितारे01 अप्रैल, 2009 | मनोरंजन एक्सप्रेस शत्रुघ्न सिन्हा के मुक़ाबले शेखर सुमन06 अप्रैल, 2009 | भारत और पड़ोस अमिताभ से कोई मतभेद नहीं: शत्रुघ्न सिन्हा03 मई, 2008 | मनोरंजन एक्सप्रेस शेखर सुमन के साथ 'एक मुलाक़ात'21 अक्तूबर, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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