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बुधवार, 22 अप्रैल, 2009 को 14:45 GMT तक के समाचार
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उधमपुर में टक्कर कांग्रेस बनाम भाजपा

राहुल गांधी और उमर अब्दुल्ला
उधमपुर में 13 लाख 62 हज़ार तीन सौ बयासी मतदाता हैं और 15 उम्मीदवार मैदान में है

भारत प्रशासित जम्मू-कश्मीर के उधमपुर लोकसभा क्षेत्र में चुनाव सरगर्मियाँ काफ़ी धीमी रही हैं और चुनावों में बुनियादी सुविधाओ की कमी या कोई और समस्या चुनावी मुद्दा नहीं बन पाईं हैं.

उधमपुर लोकसभा क्षेत्र में दूसरे चरण में मतदान होना है और ये चुनाव क्षेत्र छह ज़िलों में फैला हुआ है जिनमें पाँच ज़िले पर्वतीय हैं जबकि एक ज़िला सीमावर्ती है.

इस क्षेत्र की अनेकों समस्याएं हैं, जैसे बुनियादी सुविधाएं, संपर्क का अभाव, रोज़गार की कमी है, लेकिन ये समस्याएं मुद्दा नहीं बन सकीं.

इस चुनाव क्षेत्र में कुल 13 लाख 62 हज़ार तीन सौ बेरासी मतदाता हैं जो चुनावी मैदान में 15 प्रत्याशियों के भाग्य का फ़ैसला करेंगे. लेकिन कांग्रेस के लाल सिंह और भारतीय जनता पार्टी के निर्मल सिंह के बीच सीधे मुक़ाबले की उम्मीद की जा रही है.

हालांकि पीपुल ड्रमोक्रेटिक पार्टी के बलबीर सिंह, बहुजन समाज पार्टी के राकेश वज़ीर और जम्मू-कश्मीर नेशनल पेंथर पार्टी के भीम सिंह भी चुनावी मैदान में दूसरे अहम प्रत्याशियों में हैं.

धीमा चुनाव अभियान

 किश्तवाड़ एक बहुत ही पीछड़ा हुआ इलाक़ा है और लोग यहाँ अर्द्ध आदिम अवस्था में रहते हैं, सड़कों का संपर्क बहुत कम है, बेरोज़गारी अपनी चरम सीमा पर है और विकास का कोई काम नहीं हुआ है
किश्तवाड़ के रियाज़ अहमद ज़रगर

इस चुनाव क्षेत्र में चुनाव अभियान काफ़ी धीमा रहा है और कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के अलावा किसी दूसरे नेता की कोई बड़ी रैली नहीं हो सकी है और कोई स्थानी प्रत्याशी भी बड़ी रैली करने में कामयाब नहीं हो सका.

यहां तक के राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने उधमुर और रेसाइ ज़िले में कांग्रेस के समर्थन में चुनावी रैलियों को संबोधित किया, लेकिन कोई भीड़ इक्ट्ठा करने में कामयाब नहीं हो सके.

ये चुनाव क्षेत्र डोडा, रामबन, रेसाई, उधमपुर, किश्तवाड़ और कथुआ तक फैला हुआ है.

किश्तवाड़ के रियाज़ अहमद ज़रगर ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया, "यह एक बहुत ही पीछड़ा हुआ इलाक़ा है और लोग यहाँ अर्द्ध आदिम अवस्था में रहते हैं, सड़कों का संपर्क बहुत कम है, बेरोज़गारी अपनी चरम सीमा पर है और विकास का कोई काम नहीं हुआ है जबकि यहाँ चिनाब नदी की वजह से पानी का बड़ा श्रोत है."

उन्होंने इस इलाक़े के विकास के लिए सरकार की अक्षमता पर नाराज़गी भी जताई.

कथुआ की भी हालत कोई अलग नहीं है, हालांकि वहां बड़ा उद्योगिक इकाई भी हैं, लेकिन रोज़गार अधिकतर प्रवासी मज़दूरों को मिलता है क्योंकि वो कम पैसे पर मज़दूरी करने के लिए तैयार रहते हैं.

कथुआ के एक मतदाता बालक राम जो इस बार वोट नहीं डालने का फ़ैसला किया है, सवाल करते हैं, "हम सब लोग भ्रमित हैं... क्या मुद्दें हैं और कहां जा रहे हैं हम, असल समस्याओं से निपटने के लिए क्या तरीक़े अपनाए जा रहे हैं."

इस चुनाव क्षेत्र में मतदान सांप्रदायिक आधार पर भी बंटगेंगे क्योंकि लोगों के ज़हनों में अमरनाथ की ज़मीन को लेकर हुए प्रदर्शनों की याद ताज़ा है.

जम्मू-कश्मीर युनिवर्सिटी की प्रोफेसर रेखा चौधरी कहती हैं, "मैं समझती हूँ कि मुसलमान भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध वोट देंगे, जिससे कांग्रेस प्रत्याशी को फ़ायदा होगा."

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